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राज़ नवादवी's Comments

Comment Wall (15 comments)

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At 6:10pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
भाई राज़ नवादवी जी
आदाब
बहुत उम्दा ग़ज़ल की बधाइयां स्वीकारें. आशा करता हूँ कि भविष्य में भी ऐसी ही रचनाओं को पढ़ने का अवसर प्राप्त होता रहेगा.
At 9:42am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय राज़ जी
बहुत बहुत शुक्रिया आपका
At 9:54pm on August 28, 2017, Samar kabeer said…
जनाब राज़ साहिब,कृपया फोन कर लें,मुझे ओबीओ पर चेट करना नहीं आता ।
At 2:14am on July 31, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें.

At 3:21pm on July 18, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

जी आप कुछ कुछ ठीक कह रहे हैं त्रुटी वश ये न की जगह ना लिखा गया 'केवल दो किलोमीटर पीछे हुए एक्सीडेंट का वो बेचारा पेशेंट साइकिल वाला था न  और ये कार वाला, क्या ये  अंतर मैं नहीं समझती'----ये इस तरह लिखा था मेरी मूल लघु कथा में ----हम दैनिक बोलचाल में न शब्द का इस्तेमाल ? के साथ करते हैं  इसमें न के बाद ? मार्क लगाना भूल गई बहुत बहुत आभार इस और ध्यान दिलाने के लिए 

At 12:30pm on July 18, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

सादर आभार तहे दिल से शुक्रिया ग़ज़ल आपको पसंद आई राज़ जी 

At 5:36pm on October 11, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

welcome sir

At 2:36pm on October 11, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

aapki rachnaen behatreen hain

At 4:38pm on October 8, 2012, नादिर ख़ान said…

मुझको तिरी बेजारियों का कुछ गिला नहीं

मेरी भी ज़िंदगी अना दिखला के रह गई  

मैं भी न मिल सका उसे पिछले बरसके बाद

तनहा कली कहीं कोई मुरझा के रह गई

बहुत ही उम्दा गज़ल है राज़ भाई  बहुत ख़ूब

At 11:45am on September 21, 2012, प्रमेन्द्र डाबरे said…

राज़ साहब आपने मुझ नाचीज़ की भी रचना पढ़ी मैं धन्य हो गया, आपकी दाद मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है और कुछ और अच्छा लिखने की प्रेरणा अब मुझे मिलती रहेगी.... आपका तलबगार  प्रमेन्द्र डाबरे

At 10:24am on September 21, 2012, लोकेश सिंह said…

राज भाई तहे दिल से मेरा शुकराना स्वीकार करे ,आपके स्नेहिल वचन मुझे और अच्छे काव्य की रचना की प्रेरणा देंगे ,सराहना के लिए बहुत -बहुत साधुवाद ......लोकेश सिंह

At 12:37am on June 27, 2012, Albela Khatri said…

राज़ साहेब, आप नये हैं ये मुझे मालूम नहीं था क्योंकि मैं ख़ुद यहाँ नया हूँ......हा हा हा हा ....लेकिन आपसे पहली मुलाक़ात  अच्छी रही........मुझे  इस महफ़िल में बहुत प्यार और  मुहब्बत से नवाज़ा गया है और आप भी  यहाँ के दोस्ताना माहौल  में रस से सराबोर हो जायेंगे . ऐसा मेरा यक़ीन है

___ओ बी ओ  है ही ऐसी जगह.................आपका  तहेदिल से इस्तेकबाल है भाई साहेब !

At 12:24am on June 27, 2012, Albela Khatri said…

वाह वाह वाह वाह
निहाल कर दिया  साहेब
___जनाब राज़ नवादवी जी.........गज़ब है !

___मुबारक  हो ये उम्दा शाइरी........

At 11:37pm on June 26, 2012, Albela Khatri said…

aapka dili isteqbaal hai janaab !

At 10:11pm on February 5, 2012, Admin said…

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