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संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी''s Comments

Comment Wall (35 comments)

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At 3:20pm on May 2, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

snehi sandip ji, saadar.

savadhik sakriya sadasya ke chayan hone par haardik shubh kamnayen. 

At 2:22pm on May 2, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई संदीप वाहिद जी को सद्यः-व्यतीत माह का सर्वाधिक सक्रिय सदस्य चयनित होने पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ. 

पूर्ण विश्वास है, इस मंच से आपकी संलग्नता इसी तरह बनी रहेगी. आपका प्रस्तुत सद्-व्यवहार नये सदस्यों के लिये सकारात्मक प्रेरणा का कारण भी है.

हार्दिक बधाई .. .

At 1:47pm on May 2, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय श्री संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' जी

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका प्यार इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
आपका
गणेश जी "बागी"

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:29pm on April 8, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…

वाहिद साहब जी आपने फर्क और पात्रता पर आपके कमेन्ट के लिए मै आपका आभारी हु  धन्यवाद 

At 11:01pm on April 5, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

hain bhai hai pradeepbhi hai.

alka, nisha ka hai intjar

aap unhen bulaye,

sarita ji lot gayin thi

dekh band dwar 

At 9:54pm on April 5, 2012, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जय हो बाबा काशी विश्वनाथ जी की ...आप सभी बन्धु बांधव को यहाँ देख मन गद गद हुआ --जमेगी --लगता है हम विलम्ब से पहुंचे ....भ्रमर 5   

साहित्य सृजन में बढ़ गए हाथ 
वयो वृद्ध ने हाथ मिलाया
नवयुवकों के साथ 
दीप्त प्रदीप हैं कहीं संदीप हैं 
कहीं सर्जना महिमा श्री है 
अलका निशा ऊषा संग आयें 
भ्राता भगिनी मित्र मण्डली 
सब कुछ वीणा वादिनी से पा 
मंच पे आ के कुछ रच जाएँ .....
भ्रमर ५ 
At 7:44am on April 3, 2012, JAWAHAR LAL SINGH said…
कृपया स्नेह बनाये रखियेगा! - जवाहर.
At 12:45pm on April 2, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

dhanyavad, vahid ji. apka sneh hi hai.

At 6:21am on March 15, 2012, JAWAHAR LAL SINGH said…

काफी दिनों बाद यहाँ पधारा हूँ, ऐसा लगता है गंगा में बहुत धाराएँ निकल चुकी हैं! सादर!

At 9:50pm on March 12, 2012, Chaatak said…

Nice compositions!

At 1:28pm on March 3, 2012, MAHIMA SHREE said…
नमस्कार वाहिद साहब,
ज़रूर करूँगी....आपका बहुत धन्यवाद..आपकी ग़ज़ल सुनी.....आपकी आवाज़ की संजीदगी और दर्द आपके ग़ज़ल की आत्मा को बाहर ले आती है....... शब्द नही है......मेरे पास...
At 10:29am on March 2, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

suprabhat, dhanyavaad.

kushwaha.

At 8:29pm on March 1, 2012, MAHIMA SHREE said…

wahid ji namaskar,

बरसों से मैं सफ़र में ही मुब्तला रहा,
अब भी वहीं खड़ा हूँ जिस दिन था मैं चला

bahut khub, maine is majmun pe badi si kavita likhi hai jise aapne do lino me hi kah dala......yahi to speciality hai aapki aur aapke gajal ki.....badhai

At 5:13pm on March 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

चले करने बयां अलफ़ाज़ में उन लम्हात को 'वाहिद',
समझ आया उन्हें ये शख़्स, अंधा-गूंगा-बहरा है;

aadarniya vahid ji, saadar abhivaadan 

unki  sada pe maine di sada 

vo unki ada thi ye meri adaa

jor tha unki sada main is kadar 

kashi na chuti  chod diya maghar

aaye hain tere dar pe shish navane

chute na saath bhale hon ham anjaane.

jo samjhte hon shaksh ko andha-goonga-bahra

gaflat main hain vo hakikat hansin  hain  kitni 

khvabon ka hasin chehra tasvir hain jamini 

sundar bhav. badhai. ....kushwaha.


At 8:23am on March 1, 2012, Admin said…

कृपया ध्यान दे...

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