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इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम
बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम

देखना कहीं कोई मासूम
बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम
चिंगारी ढूंढ रहा हो तो
उसके पास जाना तुम

रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम
इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

और देखना घर की झुर्रियाँ सभी
दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी
साथ मिलके सब अपनों के
एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी

एकता में बल है कितना ये बताना तुम
इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

सोचना अपनी और देश की भी तुम
फिक्र करना अपने परिवेश की भी तुम
एक कदम भी तुम्हारा है महत्वपूर्ण
दे देना आहुति सब क्लेश की भी तुम

सहस्त्र दीयों सा सदा ही जगमगाना तुम
इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम
बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम

मौलिक एवम् अप्रकाशित

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Comment by dandpani nahak on November 2, 2019 at 1:05am
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह ' कुशक्षत्रप' जी नमस्कार आपका बहुत बहुत शुक्रिया कविता आपको अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ कह सकता हूँ आपने जो हौसला बढ़ाया सदा आभारी रहूँगा
Comment by dandpani nahak on November 2, 2019 at 1:01am
आदरणीया डॉ. गीता चौधरी साहिबा नमस्कार बहुत धन्यवाद् आपका आपने मेरी रचना को सराहा मेरा हौसला बढ़ाया और इन सबके लिए अपना समय निकाला आपका ह्रदय से आभारी हूँ!
Comment by नाथ सोनांचली on November 1, 2019 at 1:31pm

आद0 dandpani nahak जी सादर अभिवादन। बेहतरीन रचना पर दिल खोल कर बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on October 30, 2019 at 10:35am

आदरणीय Dandpani Nahak ji, सुंदर सन्देश को सुंदर शब्दों में व्यक्त करने के लिए बहुत बधाई I

Comment by dandpani nahak on October 28, 2019 at 6:10pm
परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम! बहुत बहुत धन्यवाद् आपने समय निकाला और सराहा ! आपकी हौसला अफ़जाई मेरे लिए संजीवनी का काम करती है बहुत शुक्रिया आपकी कृपा बनी रहे|
Comment by Samar kabeer on October 28, 2019 at 4:10pm

जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब,बहुत अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by dandpani nahak on October 27, 2019 at 7:54pm
आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब नमस्कार बहुत बहुत शुक्रिया समय देने और सराहने के लिए बहुत धन्यवाद्
Comment by Asif zaidi on October 27, 2019 at 7:52pm

 आदरणीय नाहक जी बहुत ख़ूब बहुत बहुत बधाई सादर ।

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