For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'

2122 1122 1122 22             

अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है

बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है

 

मेरे दामन से लिपट कर के वो रो लेती है

मेरी तन्हाई मेरे साथ ही सो लेती है

 

तब मुझे दर्द का एहसास बहुत होता है                 

जब मेरी लख़्त-ए-जिगर आंख भिगो लेती है      

 

मैं अकेला नहीं रोता हूँ शब-ए-हिज्राँ में 

मेरी तन्हाई मेरे साथ में रो लेती है 

 

अपने दुःख दर्द को मैला नहीं होने देती

अपनी आँखों से वो हर दर्द को धो लेती है

 

जब भी ख़ुश होके निकलता हूँ ‘रज़ा’ मैं घर से 

मेरी मायूसी मेरे साथ में हो लेती है

_________________________Oct-19

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 289

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on December 13, 2019 at 7:44am

बहुत ही सुन्दर रचना पेश की है, मित्र सलीम जी।हार्दिक बधाई।

Comment by SALIM RAZA REWA on December 9, 2019 at 10:37pm

आदरणीय शुशील सरना जी आपकी पुरख़ुलूस महब्बत का बेहद शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on December 9, 2019 at 10:35pm

भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब आपकी पुरख़ुलूस महब्बत का बेहद शुक्रिया।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 9, 2019 at 6:24am

आ. भाई सलीम जी, इस बेहतरीन मार्मिक ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on December 5, 2019 at 7:30pm

अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है

बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है

मेरे दामन से लिपट कर के वो रो लेती है

मेरी तन्हाई मेरे साथ ही सो लेती है

वाह आदरणीय सलीम साहिब वाह क्या खूब दर्दीले अहसासों को आपने लफ्ज़ अता किये हैं। इस बेहतरीन मार्मिक ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारक।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय श्री अमीरुद्दीन 'अमीर' बहुत अच्छी भाव वाली रचना हुई है। इस पर मेरी बधाई स्वीकार…"
1 hour ago
vandana replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुंदर भावयुक्त छंद रचना आदरणीय किंतु ग़ज़ल की बहर और छंद की मात्रा गणना के भेद पर थोड़ा सा…"
1 hour ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय श्री चेतन प्रकाश जी प्रणाम।  मैं श्री समर कबीर साहब से सहमत हूँ। अच्छी रचना पर बधाई…"
1 hour ago
vandana replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुंदर छंद हुए हैं आदरणीय कृपया "शिक्षा की"  या "शिक्षा कि" को…"
1 hour ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
""नहीं किन्तु अच्छा, उन्हीं का रवैया"  "नहीं(1 2) किन्तु(2 1) अच्छा(2 2),…"
1 hour ago
vandana replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुंदर भाव हैं आदरणीया "
1 hour ago
vandana replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बहुत आभार आदरणीय"
1 hour ago
vandana replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बहुत आभार आदरणीय"
1 hour ago
vandana replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रणाम आदरणीय, रूहानी को रुहानी लिखना वाकई मेरी गलती है इस पंक्ति को  इस प्रकार रखना…"
1 hour ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय श्री अशोक कुमार रक्ताले जी प्रदत्त चित्र एवं छंद विधा पर बहुत सुंदर रचना हुई है। मेरी ओर से…"
1 hour ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपका प्रयास सराहनीय है। मेरी अल्प जानकारी के अनुसार चूंकि वर्णिक छंद विधान…"
1 hour ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया वंदना जी, प्रदत्त चित्र एवं छंद पर बहुत अच्छी छंद बन पड़ी है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
1 hour ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service