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करके दिखाया देश में किसने कहा हुआ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२


सेवा  के  नाम  खाते  हैं  मेवा  छिपा  हुआ
इनके सिवा बताओ तो किसका भला हुआ।१।
*
मिलती हैं रोटियाँ जो ये कुर्सी के खेल से
है रक्त बेबशों  का  भी  इन में लगा हुआ।२।
*
मुकरे  हैं  नेता  सारे  ही  देकर  वचन हमें
करके दिखाया देश  में  किसने कहा हुआ।३।
*
नेता हुए हैं आज  के  गिरगिट सरीखे सब
खादी को ऐसे कर दिया सबसे गिरा हुआ।४।
*
ये  नीरो  जैसे  देश  में  रहते  हैं  इसलिए
भाता इन्हें भी खूब है  उपवन जला हुआ।५।
*
कालिख बहुत छिपाये हैं खादी में लोग ये
कारण से इनके नित्य ही शासन बुरा हुआ।६।

(१६-६-२१)
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 17, 2021 at 6:13pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , सराहना और गलती की ओर ध्यान दिलाने के लिए आभार...

Comment by Samar kabeer on July 17, 2021 at 3:42pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'है रक्त बेबशों  का  भी  इन में लगा हुआ'

इस मिसरे में 'बेबशों' को "बेबसों" कर लें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 15, 2021 at 6:24am

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति सराहना और सुझाव के लिए धन्यवाद।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 11, 2021 at 3:35pm

जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ।

'कारण से इनके नित्य ही शासन बुरा हुआ।६।' इस मिसरे को यूँ कहना उचित होगा - 

"कारण सदा इन्हीं के ही शासन बुरा हुआ"       दूसरे शे'र में 'बेबशों' को बेबसों कर लें।  सादर। 

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