For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल

एक ग़ज़ल 

 

चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है. 

सिंदूर भर के मांग में सजना बसंत है.

 

चारों तरफ घिरी रहें यादों की बदलियाँ, 

फिर उनके साथ रात में जगना बसंत है. 

 

बिखरी हुई हो चाँदनी नदिया के तीर पर,

फिर चाँद का चकोर को तकना बसंत है.

 

मौसम का क्या उसे तो बदलना है उम्र भर,

हर पल तुम्हारे साथ में रहना बसंत है.

 

पूछा ‘बसंत’ क्या है? तो राधा ने यह कहा,  

माला किशन के नाम की जपना बसंत है.

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 268

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 27, 2021 at 8:50am

आदरणीय  Aazi Tamaam जी सादर नमस्कार ,

आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 27, 2021 at 8:50am

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार 

आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by Aazi Tamaam on April 27, 2021 at 8:03am

सादर प्रणाम आदरणीय बसंत जी सुंदर ग़ज़ल है

सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 26, 2021 at 11:12am

आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है नयी रदीफ के साथ । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"ग़ज़ल का प्रयास सराहनीय है आ. भाई दिनेश जी।  2nd शेर बढ़िया लगा। वाह"
4 minutes ago
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"सराहनीय प्रयास आ. मतले में, 6th शे'र में शुतुरगर्बा दोष है शायद। वादा करें जो साथ निभाने का…"
17 minutes ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय सौरभ जी, नमस्कार बहुत बहुत शुक्रिया आपका इस विषय पे प्रकाश डालने के लिए,  कुछ नया जानने…"
1 hour ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जी,उस्ताद जी.आपकी इस्लाह के बाद ग़ज़ल प्रस्तुत है. सुनाता है,की बजाय मैंने सुना रहा इस्तेमाल…"
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"बहुत बहुत धन्यवाद मान्या "
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"बहुत बहुत शुक्रिया मान्यवर "
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"शुक्रिया जनाब "
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"बहुत बहुत धन्यवाद मान्यवर "
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"बहुत बहुत धन्यवाद मान्या "
2 hours ago
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"अटके खजूर में जो गिरे आसमां से हमसहमे रहे हयात के हर इम्तिहाँ से हम अब हासिल-ए-सफ़र की भी ख़्वाहिश…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ. भाई नवीन जी यह टिप्पणी गलत थ्रेड में हो गई है। देखिएगा.."
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
2 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service