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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – November 2020 Archive (2)

मुफलिसी में ही जिसका गुजारा हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२//१२२१/२२१२



मुफलिसी में ही जिसका गुजारा हुआ

कौन शासन जो  उस का सहारा हुआ।१।

**

उसको जूठन का मतलब न समझाइए

जिस ने पहना हो  सब का उतारा हुआ।२।

**

चाद किस्मत में उस के नहीं था मगर

आस भर को भी  कोई  न तारा हुआ।३।

**

जिस ने जीवन जिया  है सहज कष्ट में

आप कहते  हैं  उस को  ही  हारा हुआ।४।

**

है …

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 21, 2020 at 6:22am — 8 Comments

दीपावली - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )

२१२२/२१२२/२१२२/२१२



मेटती  आयी  है  घर  की  तीरगी  दीपावली

सब के मन में भी करे अब रोशनी दीपावली।१।

**

रीत कितने ही  युगों  से  चल रही हो ये भले

हर बरस लगती है सब को पर नई दीपावली।२।

**

तोड़ आओ ये नगर का जाल कहती साथियों

गाँव  की  नीची  मुँडेरों  पर  जली  दीपावली।३।

**

दीप सब ये प्रेम और' विश्वास के हैं इसलिए

आँख चुँधियाती नहीं  साथी  घनी दीपावली।४।…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 14, 2020 at 8:57am — 8 Comments

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