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Amod Kumar Srivastava's Blog – April 2013 Archive (1)

मिमांस

दुखी सभी हैं यहाँ अपने अपने सुख के लिए..

तेरे लिए तो न कोई भी रोने वाला है ..

हजारों लोग इधर से गुज़र गए फिर भी ...

ये सिलसिला न कभी बंद होने वाला है..…

Continue

Added by Amod Kumar Srivastava on April 9, 2013 at 11:30am — 2 Comments

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