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Saurabh Pandey's Blog – January 2014 Archive (5)

पाँच दोहे : आज के मन-भाव // --सौरभ

मन के सुख-दुख, पीर भी, कैसे पायें भाव

टिप-टिप अक्षर आज के, टेक्स्ट हुए बर्ताव       



चिट्ठी से तब भाव मन, होता था अभिव्यक्त

दिल के आँसू वाक्य थे, शब्द-शब्द थे रक्त



वह भी अद्भुत दौर था, यह भी अद्भुत दौर

अब’ कार्डों से भाव सब, ’तब’ अमराई…

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Added by Saurabh Pandey on January 31, 2014 at 4:30pm — 32 Comments

तुम आओगी न, सुजाता.. // --सौरभ

पीपल की छाँव में खीर खाये एक अरसा हो गया है

मन फिर से चंचल है

तुम आओगी न, सुजाता !



उसके होने न होने से कोई विशेष अंतर नहीं पड़ना था,

ऐसा तो नहीं कहता

लेकिन क्या वो

कोई आम, अशोक, महुआ या जामुन नहीं हो सकता…

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Added by Saurabh Pandey on January 27, 2014 at 8:00pm — 31 Comments

आज के बाज़ार पर.. (नवगीत) // --सौरभ

बिस्तर-करवट-नींद तक

रिस आया बाज़ार



हर कश से छल्ले लिए

बातें हुई बवण्डरी

मुदी-मुदी सी आँख में

उम्मीदें कैलेण्डरी

गलबहियों के ढंग पर

करता कौन विचार..…

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Added by Saurabh Pandey on January 18, 2014 at 3:30am — 26 Comments

कुण्डलिया : मैं-तुम-हम // --सौरभ

'मैं-तुम’ के शुभ योग से, 'हम’ का आविर्भाव

यही व्यष्टि विस्तार है, यही व्यष्टि अनुभाव

यही व्यष्टि अनुभाव, ’अपर-पर’ का संचेतक    

’अस्मि ब्रह्म’ उद्घोष, ’अहं’ का धुर उत्प्रेरक

’ध्यान-धारणा’  योग, सतत…

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Added by Saurabh Pandey on January 7, 2014 at 1:00am — 24 Comments

ग़ज़ल- पर सुगम होगा सफ़र, लगता है // --सौरभ

दिन उगे का तो पहर लगता है

यों अभी थोड़ी कसर, लगता है..



साँस लेना भी दूभर लगता है

क्या ये मौसम का असर लगता है



क्या हुआ साथ चलें या न चलें…

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Added by Saurabh Pandey on January 6, 2014 at 3:00am — 22 Comments

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"ज़नाब Samar kabeer साहब जी, शुक्रिया"
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"जनाब रोहित जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।तो"
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