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Nemichandpuniyachandan's Blog – May 2011 Archive (2)

गजल-मुफलिसी बेबाक हो गई

गजल

 

मुफलिसी बेबाक हो गई।
भूख ही खुराक हो गई।।

 

जिसने किया खुदी को बुलंद
जहाँ में उसकी धाक हो गई।।

 

जो पल में छीन लेते थे जिंदगी।
वो हस्तियां भीं खाक हो गई।।

 

किसी को गरज नहीं यहां जहाँ की।
सबको अपनी प्यारी नाक हो गई।।

 

जिसने इंकलाब का बिगुल बजाया।
उसकी बात "चंदन" मजाक हो गई।।

Added by nemichandpuniyachandan on May 15, 2011 at 5:30pm — 1 Comment

ऐ काश! मेरे भी माँ होती

ऐ काश! मेरे भी माँ होती ।

जब-जब मेरी अखियाँ रोती ।

लापरवाहियां दुख देती।

सिर पे मेरे हाथ फिरोती।

ऐ काश मेरे भी माँ होती।

 

ममतामयी जवानी खोती।

सीने पर ज्यूं चले करोती।

अंखियां बरसे जैसे…

Continue

Added by nemichandpuniyachandan on May 8, 2011 at 11:30pm — 5 Comments

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