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वीनस केसरी's Blog – June 2013 Archive (3)

वक्त जो हम पर भारी है - वीनस

छोटी बहर पर ग़ज़ल का एक प्रयास  .....

वक्त जो हम पर भारी है 

अपनी भी तय्यारी है 



पूरा कारोबारी है 

ये अमला सरकारी है 

.…

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Added by वीनस केसरी on June 20, 2013 at 11:00am — 36 Comments

ऐ दोस्त ! खुशतरीन वो मंज़र कहाँ गए

दोस्तो, एक और ग़ज़ल जो होते होते मुकम्मल हुई है, आपकी खिदमत में पेश कर रहा हूँ जैसी लगे वैसे नवाजें   ....



ऐ दोस्त ! खुशतरीन वो मंज़र कहाँ गए

हाथों में फूल हैं तो वो पत्थर कहाँ गए



डरता हूँ मुझसे आज के बच्चे न पूछ लें

तितली कहाँ गईं हैं, कबूतर कहाँ गए…



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Added by वीनस केसरी on June 6, 2013 at 12:30am — 34 Comments

वो एक बार तबीअत से आजमाए मुझे

एक ताज़ा ग़ज़ल आप सभी की मुहब्बतों के हवाले ....

वो एक बार तबीअत से आजमाए मुझे

पुकारता भी रहे और नज़र न आए मुझे

मैं डर रहा हूँ कहीं वो न हार जाए मुझे

मेरी अना के मुक़ाबिल नज़र जो आए मुझे



मुझे समझने का दावा अगर है सच्चा तो …

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Added by वीनस केसरी on June 4, 2013 at 1:00am — 32 Comments

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"आ. रोजीना जी, अभिवादन । प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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"आ. रिचा जी, अभिवादन । उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
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"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई समर जी, दो और शेर जोड़े हैं। इन्हें भी देखिएगा। सादर.. हो गयी है ऊँची कीमत नून लकड़ी तेल…"
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"आ. दीपांजलि जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. राजेश दी, सादर अभिवादन । बहुत सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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