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dandpani nahak
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dandpani nahak commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - जिस दिन से इकतरफ़ा रिश्ता टूट गया
"आदरणीय निलेश शेवगाँवकर जी प्रणाम! उम्द:, शानदार, बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला वाह क्या कहने दूसरा शैर लाज़वाब वाह तीसरा शैर क्या बात है 'वो देखो इक और सितारा टूट गया ' वाह पाँचवा शैर बिल्कुल सच्ची बात है वाह 'कह के…"
Oct 3
dandpani nahak commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीया अंज़ुमन मंसूरी 'आरज़ू' साहिबा आदाब उम्द: ग़ज़ल हुई है दिली मुबारक़बाद क़ुबूल फरमाएँ"
Oct 3
dandpani nahak commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-घर बसाना था
"आदरणीया रचना भाटिया जी सादर नमस्कार! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Oct 3
dandpani nahak commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब आदाब उम्द: ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें वाह क्या कहने सच्ची बात कह दी आपने! शैर दर शैर दाद हाज़िर है वाह"
Oct 3
dandpani nahak commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं (२०२१ -१ )- डॉo विजय शंकर
"आदरणीय डॉ विजय शंकर जी प्रणाम! उम्द: क्षणिकाएँ हुईं हैं! हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Sep 29
dandpani nahak commented on Saurabh Pandey's blog post पाँच दोहे : उच्छृंखल संकोच // -- सौरभ
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी प्रणाम! लाज़वाब दोहे अद्भुत वाह! हार्दिक बधाई स्वीकार करें!"
Sep 29
dandpani nahak commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post स्वयं को तनिक एक बच्चा बना-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Sep 29
dandpani nahak commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post स्वयं को तनिक एक बच्चा बना-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' ji"
Sep 29
dandpani nahak commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी नमस्कार! उम्द: ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Sep 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय भाई लक्ष्मण जी मैं तो बहुत गर्व महसूस कर रहा हूँ जो ओ बी ओ से जुड़ा! ऐसी ज्ञानवर्धक बातें इतनी शालीनता से और कहाँसीखने को मिलेंगी!आप सब गुणीजनों का बहुत आभार!"
Sep 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय नादिर ख़ान साहब आदाब! अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Sep 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय दिनेश कुमार जी सादर अभिवादन! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें!"
Sep 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"दूसरा शैर इस तरह पढ़ा जाय       "जन्नत अगर कहीं है यहीं है यहीं तो है      अच्छे नहीं सनम यूँ ही सारे जहाँ से हम ""
Sep 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय संजय शुक्ला जी सादर अभिवादन!  बहुत बहुत शुक्रिया आपका आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आये और मेरा हौसला बढ़ाया! "
Sep 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"मेरा नाम दण्डपाणि नाहक है  आदरणीय "
Sep 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्कार! बहुत-बहुत शुक्रिया आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आये और मेरी हौसला अफ़ज़ाई की!दूसरे शैर का सानी में तब्दीली कर दी गई है सादर!"
Sep 25

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ से ना हो राब्ता कोई
ज़िन्दगी है की हादसा कोई

वो पुराने ज़माने की बात है
अब नहीं करता है वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का है न फ़लसफ़ा कोई

यहाँ सब बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 27, 2020 at 6:02pm — 13 Comments

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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