दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान । सोच रहा वह इश्क में, क्या पाया नादान ।।आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत…See More
दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान । सोच रहा वह इश्क में, क्या पाया नादान ।।आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत…See More
"ग़ज़ल 2122 1212 22
आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में
क्या से क्या हो गए महब्बत में
मैं ख़यालों में आ गया उसकी
हो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में
मुझ से मुझ ही को दूर करने ये
आयी तन्हाई शाम ए फ़ुर्क़त…"
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई
सुघड़ हाथ में डोर तो, छूती मेघ पतंग ।गलत हाथ में जो गई, खंडित होते अंग ।। ... वाह वाह ... क्या व्यंजना है ..…"
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन
बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला बढ़ाया
आपके अमूल्य इस्लाह से ग़ज़ल निखर गईं है आपके सारे इस्लाह मंज़ूर अलबत्ता
चीन ज्यूँ आ गया था तिब्बत…"