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आदरणीय काव्य-रसिको !
सादर अभिवादन !!
’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ सतहत्तरवाँ आयोजन है।
छंद का नाम - चौपाई छंद
आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ -
25 मार्च’ 26 दिन बुधवार से
31 मार्च’ 26 दिन मंगलवार तक
केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं.
चौपाई छंद के मूलभूत नियमों के लिए यहाँ क्लिक करें
जैसा कि विदित है, कई-एक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती हैं.
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आयोजन सम्बन्धी नोट :
फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ : 25 मार्च’ 26 दिन बुधवार से 31 मार्च’ 26 दिन मंगलवार तक रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रस्तुत की जा सकती हैं
अति आवश्यक सूचना :
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मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम
अजय गुप्ता 'अजेय
बौर से फल तक
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फागुन आया ऐसा छाया, बाग़ आम का है बौराया
भरी मंजरी ने तरुणाई, महक रही सारी अमराई
मंजर की ऐसी बहुतायत, नहीं राम से रही शिक़ायत
मौसम भी अनुकूल रहा है, बौर शाख पर झूल रहा है
रहा सदा जीवन का हिस्सा, हर हिस्से का है इक किस्सा
बौर नहीं आशा है अमवा, डरता-हँसता पागल मनवा
मधुआ-भोंगा से बच जाएँ, कीट-फफूंद नहीं खा जाएँ
आँधी बारिश ज्यादा ना हो, असमय लू से भी रक्षा हो
अब किसान हो कर उत्साहित, करने लगे इन्हें उपचारित
फिर कुछ हफ्तों बाद पकेंगें, मधुर-रसीले आम मिलेंगें
हापुस लंगड़ा केसर चौसा, सिंदूरी नीलम व सफेदा
तोतपुरी मलीहाबादी, और दशहरी रस की वादी
खट्टा-मीठा रस बरसाता, आम फलों पर राज चलाता
पर सबका आरंभ यहीं है, बौर नहीं तो आम नहीं है
#मौलिक एवं अप्रकाशित
Mar 28
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
चौपाई छंद ( संशोधित )
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ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥
आम लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में गाने॥
गुलमोहर टेशू भी फूले। अमराई में पड़ते झूले॥
नव कोंपल पेड़ों पर छाये। मौर सुगंधित मन हर्षाये॥
फागुन की रंगत है छाई। लिए सुगंध बहे पुरवाई॥
खायेंगे सब आम रसीले। हरा लालिमा औ कुछ पीले॥
सरसों भरे खेत हैं सारे। पीत वसन वसुधा के न्यारे॥
कूकत है कोयल बगिया में। खुशबू हर गाँव नगरिया में॥
बाल -युवा मिल उधम मचाएँ। रंग गुलाल अबीर उड़ाएँ॥
ध्वनि मृदंग की मन को भाए। ऋतु बसंत की छटा सुहाए॥
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मौलिक अप्रकाशित
Mar 31
pratibha pande
चौपाई छंद
Mar 31