मुख्य संयोजक आदरणीय शरदिंदु मुखर्जी और महनीया कुंती मुखर्जी की अनुपलब्धता के कारण ओपन बुक्स आन लाइन, लखनऊ चैप्टर की मासिक काव्य गोष्ठी गत माह की भांति इस माह भी डा0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव के संयोजन और संचालन में दिनांक 22 -02 -2015 को सेंट्रल आइडिया आफिस, द्वितीय तल एवं द्वितीय लेन, करामत मार्केट, निशातगंज, लखनऊ में यथा पूर्वसूचना सायं 2 बजे से प्रारंभ हुयी I गोष्ठी की अध्यक्षता वीर-रस के सिद्धहस्त कवि आत्म हंस मिश्र ‘वैभव’ ने की I काव्य-पाठ और सरस्वती-वन्दना से पूर्व अध्यक्ष महोदय द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिकृति पर माल्यार्पण किया गया और सभी उपस्थिति कवियों ने माँ के चरणों में फूल चदाये I कार्यक्रम में निम्नांकित महानुभावो ने भाग लिया I
सर्व श्री/
1- आत्म हंस मिश्र ‘वैभव’ अध्यक्ष
2- डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव संचालक/संयोजक
3- डा0 एस सी ब्रह्मचारी
4-- केवल प्रसाद ‘सत्यम’
5-पवन कुमार
6-अमित ‘सौम्य’
7-रोमेश रंजन
गोष्ठी का प्रारंभ माँ सरस्वती की वन्दना से हुआ I श्री आत्म हंस मिश्र ‘वैभव’ ने अपने ओजपूर्ण स्वर में माँ को समर्पित अपने मधुर गीत से वातावरण को भक्ति-रस-मय कर दिया I तदनंतर केवल प्रसाद ‘सत्यम’ ने गीत, अतुकांत और छंद सुनाकर सभी का सुन्दर मनोरंजन किया I उनके द्वारा पढा गया दुर्मिल सवैय्या निम्न प्रकार है –
समिधा सम दुर्गति नष्ट करे सत पुष्ट करे अति पावन हो
मन उज्जवल हो तब दान सधे तपनिष्ठ रहे मन पावन हो
अति दीन मलीन, कुलीन बने सुविचार दया गति पावन हो
नर-नारि सदा समभाव रहे हर काम दशा रति पावन हो
कवि और सम्मानित वैज्ञानिक डा0 एस0 सी0 ब्रह्मचारी ने इंसान की तलाश में अपने और अपने मन के पागलपन को बड़ी सुविचारित अभिव्यक्ति प्रदान की -
मंदिर द्वारे सुबह गुजारी
मस्जिद द्वारे शाम ढली
मिला न इंसा मुझको कोई
जाने कैसी हवा चली
आयेगी अब ऐसी बेला होगी जग से चला चली
मै पागल मेरा मन पागल ढूंढें इंसा गली गली
जनपद गोरखपुर से आकर संकल्प के धनी युवा कवि पवन कुमार ने इस कार्यक्रम को अंतर्जनपदीय बना दिया I आसन्न होली के वातावरण से आलोड़ित कवि पवन ने फागुन की आहट अपने अंतर्मन से सुनी और उसे निम्नांकित रीति से रूपायित किया –
अंतर्मन ने राग सुनाया
देखो फिर से फागुन आया
धरती ओढ़े चादर धानी
पंछी कहने लगे कहानी
अम्बर ने भी रस बरसाया
देखो फिर से फागुन आया
संचालक डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव ने माँ गंगा की व्यथा पर आधारित एक फैंटेसी ‘नारी आत्मा के स्वर‘ तथा ‘अनुभव’ शीर्षक से सजी एक अतुकांत कविता सुनायी और दो सुन्दर गीतों का भी सास्वर पाठ किया I उनके गीत ‘फिर वही अभिशाप’ की बानगी प्रस्तुत है-
यक्ष का सन्देश लेकर घिर उठी काली घटाएं
रो रहा है करुण बादल गूंजती सारी दिशायें
वृक्ष पर है मौन चातक दूर नभ में लौ लगाए
खिलखिलाती बिजलियाँ भी व्यंग्य करती है हवाएं
तुम अकेले ही नही हो विश्व में संताप मेरे
फिर उभर आये क्षितिज पर क्यों वही अभिशाप मेरे ?
अंत में अध्यक्ष आत्म हंस मिश्र ‘वैभव’ जो न केवल वीर-रस के सिद्ध हस्त कवि है अपितु देश के पूर्व प्रधान-मंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेयी से एकाधिक बार पुरस्कृत भी हो चुके है और कवि समूह में ‘ज्वाला’ के कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं, उन्होंने श्रमिको के महत्त्व को प्रतिपादित करती अपनी कविता में श्रमिको को विधाता के रूप में परिकल्पित किया I निदर्शन निम्न प्रकार है –
श्रम का प्रकाश बिखराते तुम चारो ओर
तुम ही प्रदीप्त तुम ही तो दिनमान हो
श्रम से बनाते तुम जड़ को भी चेतन और
गढ़ते नवीन तुम नित्य प्रतिमान हो
विश्व सारा याचक बना है खडा तेरे द्वार
तुम वरदानी करते जो श्रमदान हो
तुमको विलोक कर ‘वैभव’ यह कहता है
तुम हे श्रमिक ! विधाता के समान हो
इस प्रकार सायं 6 बजे तक चली गोष्ठी का अवसान अध्यक्षीय भाषण के उपरान्त संयोजक गोपाल नारायन श्रीवास्तव के आभार ज्ञापन के साथ हुआ जिन्होंन सभी कवियों के योगदान को सराहा और अंततः कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की I इति I
(मौलिक व् अप्रकाशित )
केवल प्रसाद 'सत्यम'
यह बात सत्य ही है कि आपकी लगन, परिश्रम व विवेक से ही ओ.बी.ओ. की मासिक गोष्ठी में चार चॉंद लग जाते हैं। जिसके कारण ही करामत मार्केट के आंगन में अदृश्य करामात से मासिक काव्य दरबार में नौ रसों का संयोजन, अलंकरण सहित सरसता व माधुर्य भर जाता है। उप-िस्थत कविगणों के हृदयों को आलौकिक आनन्द से अभिभूत करके सदैव के लिए घर कर जाती है। जिसके लिए आप और केवल आप ही बधाई के पा़त्र हैं,, शेष हम सब तो मंच के कठपुतली सदृश्य ही हैं। कार्यक्रम की सफलता हेतु आपको एक बार पुन: हार्दिक बधाई। हॉं ...मेंरा दुर्मिल सवैया......कुछ ऐसी है-
// समिधा सम दुर्गति नष्ट करें, सत पुष्ट करें अति पावन हो।
मन उज्वल हो कर दान सधे, तपनिष्ठ रहें मति पावन हो।।
अति दीन मलीन कुलीन बनें, सुविचार दया गति पावन हो।
नर-नारि सदा सम ज्ञान रहें, हर काम-दिशा रति पावन हो।।//
Mar 2, 2015
सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji
Mar 3, 2015
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
आदरणीय गोपालनारायनजी, गोष्ठी का सफल आयोजन संलग्न सदस्यों की मानसिक परिपक्वता का ही परिचायक है. मैं सभी उपस्थित सदस्यों के प्रति सादर भाव रखता हूँ.
आदरणीय शरदिन्दुजी से फोन पर हुई बातचीत के क्रम में इस तथ्य पर अवश्य बातें हुई हैं कि कैसे ओबीओ की मासिक गोष्ठी बिना किसी लाग-लपेट के निरंतर अयोजित हो रही है. इसका श्रेय सामुहिक संलग्नता को ही है. जो सदस्यों को समवेत जोड़ती है.
सादर बधाइयाँ और शुभकामनाएँ
Mar 4, 2015