साथियों,
विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही है । विगत दिनों एक अनौपचारिक बातचीत के क्रम में आदरणीय तिलक राज कपूर जी का सुझाव आया कि क्यों न सभी चारों लाइव आयोजनों को माह के प्रथम सप्ताह में लगा दी जाय और एक साथ पूरे माह के लिए लाइव कर दिया जाय, जिससे सदस्यों की सहभागिता बढ़ सकेगी ।
मित्रों, इस विषय पर आप सभी अपना मंतव्य, नवीन विचार रखें ताकि कुछ बेहतर किया जा सके ।
सादर
Admin
साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक साथ लगा दिया जाय और एक सप्ताह हेतु ओपन कर दिया जाय, यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आगे इसे कंटिन्यू किया जा सकेगा अन्यथा अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा ।
अतः सभी आयोजन एक साथ 25 मार्च से 31 मार्च तक अर्थात एक सप्ताह आप के पोस्ट्स एवं टिप्पणियों के लिए खुले रहेंगे ।
सुलभ प्रसंग हेतु आयोजनों का लिंक निम्नानुसार है...
"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
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'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177
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"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
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"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
on Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय
सभी की नमस्कार,
यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है, किन्तु मंच और कार्यकारिणी को अपने अनुभव से अवगत करवाना भी मैं अपना कर्त्तव्य समझता हूँ।
ईमानदारी से कहूँ तो मैं चारों आयोजन एक साथ खुले होने के बावजूद किसी एक आयोजन पर ध्यान नहीं लगा पा रहा हूँ। साथ ही उलझन इस बात की है कि कौन से आयोजन में नई रचनाएं आईं होंगी। हर बार टिप्पणी करने के लिए चारों आयोजनों को खोलना भी जटिल लगता है।
फिर भी, आयोजन पूरे होते होते स्थिति पूरी स्पष्ट हो जाएगी। इस बार यूँ भी समय कम था तो वो भी एक कारण हो सकता है। फिलहाल हम सब आयोजनों की सफलता के लिए आशान्वित ही रहना चाहेंगे। अन्य सदस्यों के अनुभव मुझ से भिन्न हों, इस बात से भी कोई इनकार नहीं है।
सादर
14 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन किसी को नहीं मालूम यह कितने मास के लिए है। प्रयोग सफल हो गया तो शायद इसे ही जारी रखेंगे ।
पुनः एक अनुरोध है ........ अप्रैल मास से प्रयोग 9 दिन का कर दीजिए।
तृतीय शनिवार से चतुर्थ रविवार तक [ दो शनिवार और दो रविवार तो मिलना ही चाहिए ]
7 hours ago