by Sushil Sarna
on Wednesday
दोहा पंचक. . . . . दिल
रात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।
उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान । सोच रहा वह इश्क में, क्या पाया नादान ।।
आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत के ईनाम । नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।
ख्वाबों सा हर पल लगे, उन बांहों में यार । जिस्मानी जन्नत मिली, दिल को मिला करार ।।
कैसी ख्वाहिश कर रहा , पागल दिल नादान । आसमान सम चाँद पर, खो बैठा ईमान ।।
सुशील सरना / 4-2-26
मौलिक एवं अप्रकाशित
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दोहा पंचक. . . दिल
by Sushil Sarna
on Wednesday
दोहा पंचक. . . . . दिल
रात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।
फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।
उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान ।
सोच रहा वह इश्क में, क्या पाया नादान ।।
आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत के ईनाम ।
नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।
ख्वाबों सा हर पल लगे, उन बांहों में यार ।
जिस्मानी जन्नत मिली, दिल को मिला करार ।।
कैसी ख्वाहिश कर रहा , पागल दिल नादान ।
आसमान सम चाँद पर, खो बैठा ईमान ।।
सुशील सरना / 4-2-26
मौलिक एवं अप्रकाशित