घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े शरीर आप ही सम्मान हो गये।१। * गुर्बत हटेगी बोल के कुर्सी जिन्हें मिली उनको गरीब लोग ही जल-पान हो गये।२। * घर में बहार नल से जो आयी…See More