लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। * गुर्बत हटेगी बोल के कुर्सी जिन्हें मिली उनको गरीब लोग ही जल-पान हो गये।२। * घर में बहार नल से जो आयी…See More
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान । सोच रहा वह  इश्क में, क्या पाया नादान ।।आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी हौसलाअफ़ज़ाई का आभारी हूँ "
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक बधाई।"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान । सोच रहा वह  इश्क में, क्या पाया नादान ।।आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उसकी हो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में मुझ से मुझ ही को दूर करने ये आयी तन्हाई शाम ए फ़ुर्क़त…"
Wednesday

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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो, छूती  मेघ पतंग ।गलत हाथ में जो गई, खंडित  होते अंग ।। ... वाह वाह ... क्या व्यंजना है  ..…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला बढ़ाया आपके अमूल्य इस्लाह से ग़ज़ल निखर गईं है आपके सारे इस्लाह मंज़ूर अलबत्ता चीन ज्यूँ आ गया था तिब्बत…"
Wednesday