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आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127 

विषय - "हम होंगे कामयाब"

आयोजन अवधि- 15 मई 2021, दिन शनिवार से 16 मई 2021, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 15 मई 2021, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
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मंच संचालक
ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
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स्वागतम् !! 

सादर अभिवादन आदरणीय सौरभ पाण्डे जी 

हम होंगे कामयाब
_____________


तू' और 'मैं' से उठकर 
जिस दिन हम 'हम' होंगे
 कामयाबी का आधा रास्ता
 तय समझो 
नहीं तो गाते रहो
स्वार्थ से गंधाते
 अपने अपने खोलों में 
अपनी अपनी ढफली, जड़ता 
और कट्टरता के साथ 
 कामयाबी का बेसुरा 
और निरा बेमानी गाना
 'हम' को हटाकर
कोई फायदा नहीं
मात्र कंठ दुखाई है 
_______


मौलिक व अप्रकाशित

आ. प्रतिभा बहन सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी

आदरणीया, प्रतिभा  पांडे  जी, नमस्कार ! रचना  किस विधा  में है, आपने, विदुषी, कुछ नहीं  बताया ! सो, सही मूल्यांकन संभव नहीं हुआ, क्षमा  करें  !

आदरणीय चेतन प्रकाश जी 

 ये एक छंदमुक्त/ अतुकान्त रचना है।

सादर

 जी, प्रतिभा जी, आपने सही  कहा ! विषय को दृष्टिगत रखते हुए अच्छा  प्रयास  है आपका, सु श्री जी !

गीत...... 

फिर भी हम जीतेंगे बाजी.. ! 

कोरोना की मार पड़ी है

मौत ताण्डव मचा रही है

हर आदम रोता मिलता है

सोग जिन्दगी मना रही है! 

माना अंधेरा जग बहुत है

फिर भी हम जीतेंगे बाजी !! 

कुछ दिन में होंगे कामयाब

बना रहेगा माँ का रुआब

वैक्सीन हम लगवाएंगे

मास्क लगे जब बढ़ेगा ताब ! 

एक नया सूरज निकलेगा

कि गाँव शहर जलेगी बाती !! 

अभी टाल दें ब्याह काज सब

शुभ मुहूर्त सुझाएगा वो रब 

दो गज दूरी बनी जरूरत, 

माँ प्रबंध हो जायेगा सब  ! 

कृष्ण रहे अर्जुन के साथी

समय कठिन जीतेंगे बाजी  !! 

लहर तीसरी भी आनी है

तैयारी करके रखनी है

डाक्टर नर्स विज्ञानी हैं सब

युग के वो राजा रानी हैं! 

हे देव तुम्हें मौत भगानी

हार गयी मानवता जब है

जीतेंगे हम हर इक बाजी!  !! 

शील्ड रहे या कोवैक्सीन

कुरोना की  दुश्मन संगीन

बदल हम देंगे वो हर सीन! 

हम सब चुन चुन कर मारेंगे 

कोरोना खतरनाक बागी  !! 

फिर भी हम जीतेंगे बाजी  !! 

मौलिक एवं अप्रकाशित

आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई।

 आ. भाई लक्ष्मण जी सप्रेम  व॔दे ! आप का अतिशय  आभार  कि आप  'गीत' तक पहुँचे और उसको अनुश॔सा  मिली  ! 

 

इस सकारात्मक गीत सृजन पर हार्दिक बधाई आदरणीय चेतन प्रकाश जी

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1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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