For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 19724

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

//

दीप बनकर जलूँ निरंतर मैं

जुगनू देकर दुआ गया है मुझे//

ग़ज़ल पर सुन्दर प्रयास हुआ है, उक्त शेर का मिसरा सानी देख लें, बात कुछ बन नहीं रही, बधाई इस प्रस्तुति पर.

अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीया वन्दना जी| हार्दिक बधाई| 

बोलना जब से आ गया है मुझे

चुप रहूँ ये कहा गया है मुझे

.

मेरी सूरत बिगाड़ने वाला
आइना कल दिखा गया है मुझे

धोका, रुसवाई, दर्द, तन्हाई
चाहा क्या, क्या दिया गया है मुझे

सहरा सहरा भटक रहा हूँ अब
इश्क़ पागल बना गया है मुझे

वक़्त का आज फिर कोई लम्हा
आँसुओं में डुबा गया है मुझे

जाना तो मुझको चाहिए था मगर
छोड़ कर वो चला गया है मुझे

जो कहानी कहीं पे ख़त्म न हो
इश्क़ है वो बता गया है मुझे

फल मिलेगा न जाने कब देखो
"सब्र करना तो आ गया है मुझे"

उसने मुझको कभी पढ़ा ही नहीं
जिसकी ख़ातिर लिखा गया है मुझे

कोई मुझको समझ न पाएगा
इतना आसाँ बना गया है मुझे

(मौलिक व अप्रकाशित)

आ. महेंद्र कुमार जी अच्छा प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई आपको

हौसला अफ़ज़ाई का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय शिज्जु "शकूर" जी। हार्दिक आभार। सादर।

जनाब महेंद्र साहिब ,

अच्छी ग़ज़ल कही, मुबारकबाद आपको,,

हार्दिक आभार आदरणीय अफ़रोज़ 'सहर' साहब। बहुत-बहुत शुक्रिया। सादर।

        आदरनीय महेंद्र जी, बहुत सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई हो 

उत्साहवर्धन के लिए बहुत शुक्रिया आदरणीय मोहन बेगोवाल जी। हार्दिक आभार। सादर।

आ. महेंद्र जी,

अच्छी ग़ज़ल हुई है..
मतले   के ऊला और सानी को आपस में बदल लें...
बोलना जब से आ गया है मुझे
चुप रहूँ ये कहा गया है मुझे 
ये ज़ियादा प्रभावोत्पादक है 
बधाई 

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय निलेश सर। आपका सुझाव अनुकरणीय है। संशोधन हेतु अनुरोध कर दिया है। हार्दिक आभार। सादर।

जबाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

मतले पर जनाब निलेश जी का सुझाव अच्छा है ।

गिरह उम्दा हो गई अब ।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गजल-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई जैफ जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
31 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"Zaif saheb बहुत बहुत शुक्रिया |"
36 minutes ago
Zaif commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गजल-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद मुसाफिर सर, सादर"
57 minutes ago
Zaif commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"बहुत ख़ूब ग़ज़ल, सर जी। सादर।"
1 hour ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"रोचक संस्मरण। पर क्षमा के साथ एक प्रश्न, क्या इसे लघुकथा कह सकते हैं ?"
1 hour ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आपका हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई जी।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप कोई तो जलाये शाम के (गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गजल-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन।अच्छी लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आपका हार्दिक आभार आदरणीया प्रतिभा जी।"
4 hours ago
स्वतंत्र लेखिका replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आदरणीय शेख़ जी, सादर प्रणाम ।  मैं पूंछना चाहती हूं कि क्या संस्मरण लघुकथा के अंतर्गत आ सकते…"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप कोई तो जलाये शाम के (गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर और सार्थक प्रस्तुति सर"
5 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service