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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त के लिए बहुत बहुत शुक्रिया भी तमाम जी..."
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बढ़िया कहा भाई मनोज जी...बधाई कुबूल करें..."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: जैसे जैसे ही ग़ज़ल रुदाद ए कहानी पड़ेगी
"अच्छी लगीं आपकी कोशिशें भाई तमाम जी...बाकी इस्लाह तो गुणीजन ही कर सकते हैं।"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"क्या कहने वाह बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय...हरिक शे'र लाजबाब"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने कहीं पे लौट आ बचपन क्या लिख दिया-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय..."
Friday
Aazi Tamaam commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"बेहद खोइबसूरत ग़ज़ल है आदरणीय बृज जी सादर प्रणाम आदरणीय अमीर सर ने जो 'भी' वाले शैर में सुझाया उसकी लय बेहद निखर के आ रही है कभी हमारे ग़मों पे जो तुझ को प्यार आये वहीं उसी पल कतार भावों की मोड़ देना......... बेहतरीन शैर है सादर"
Apr 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना

121   22   121   22   121   22अगर कभी जो क़रार आये झिझोड़ देना मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देनाबिना तुम्हारे  ये ज़िन्दगी अब  कटेगी कैसे जो तू नहीं तो नफ़स की डोरी भी तोड़ देनाजरा  सी कोई  रहे  हरारत  न जान  बाकी कि  जाते जाते  बदन  हमारा निचोड़ देनाकभी हमारे ग़मों पे तुझको दुलार आये वहीं उसी पल कतार भावों की मोड़ देनातेरे ग़मो का उसे न होगा पता, है मुमकिन मगर सिरा 'ब्रज' उदासियों का न जोड़ देना(मौलिक एवं अप्रकाशित)  बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Apr 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"ये आपकी इस्लाह और आपस मे हुई चर्चा का नतीजा है आदरणीय अमीरुद्दीन जी...सादर आभार"
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"बृजेश जी, अब दोनों शे'र दुरुस्त हो गये हैं। बधाई हो। "
Apr 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"इसके अलावा चौथे शे'र में "भी प्यार" की जगह नया शब्द "दुलार" रखता हूँ जिसका अर्थ प्यार स्नेह ही होता है।इससे मात्रा पतन की जरूरत भी नही पड़ेगी।सादर"
Apr 12
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी विस्तार से बताने के लिए आपका अत्यंत आभारी हूँ।उला को  अगर कभी जो करार आये झिंझोड़ देना...करता हूँ।क्योंकि सानी में मेरी और मुझे रखना ज्यादा जम रहा। देखिये "अगर कभी जो करार आये झिंझोड़ देना        …"
Apr 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"//लेकिन जो मतला अभी है उसमें कोई कमी है??दरअसल मौजूदा स्थिति में मुझे रवानगी ज्यादा समझ मे आ रही।// जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी, हर शे'र में शाइर का अपना नज़रिया होता है, मतले के ऊला मिसरे में अगर आप का नज़रिया ये है कि मुझे बेक़रारी में रह रह कर…"
Apr 12
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी ग़ज़ल पे आपकी उपस्थित एवं इस्लाह के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया...आपका दोनों सुझाव बेहद खूबसूरत हैं।लेकिन जो मतला अभी है उसमें कोई कमी है??दरअसल मौजूदा स्थिति में मुझे रवानगी ज्यादा समझ मे आ रही।"
Apr 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें। 'कभी-कभी जो क़रार आये झिझोड़ देना  मेरी उदासी मुझे अकेला न छोड़ देना'      इस शे'र को यूँ कहें - 'मुझे कभी जो क़रार आये झिंझोड़ देना मेरी…"
Apr 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"सादर आभार आदरणीय धामी जी..."
Apr 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: माँ
"बड़े ही प्यारे भाव हैं भाई तमाम जी...इसकी मापनी क्या है?"
Apr 9

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना

121   22   121   22   121   22

अगर कभी जो क़रार आये झिझोड़ देना

मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना

बिना तुम्हारे  ये ज़िन्दगी अब  कटेगी कैसे

जो तू नहीं तो नफ़स की डोरी भी तोड़ देना

जरा  सी कोई  रहे  हरारत  न जान  बाकी

कि  जाते जाते  बदन  हमारा निचोड़ देना

कभी हमारे ग़मों पे तुझको दुलार आये

वहीं उसी पल कतार भावों की मोड़ देना

तेरे ग़मो का उसे न होगा पता, है मुमकिन

मगर सिरा 'ब्रज' उदासियों का न जोड़…

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Posted on April 7, 2021 at 10:30am — 11 Comments

ग़ज़ल-उदासी इस क़दर मुझमें उतरती जा रही है

1222      1222      1222      122

ग़मों की दिन-ब-दिन क़िस्मत सँवरती जा रही है

उदासी इस क़दर मुझमें उतरती जा रही है



अभी तो वक़्त है पतझर के आने में,हवा क्यों

चली ऐसी कि मन वीरान करती जा रही है



बहारों ने चमन लूटा मगर बाद-ए-सबा ये 

खिज़ाओं पे हरिक इलज़ाम धरती जा रही है



फ़िराक-ए-यार का मौसम बहुत नज़दीक…
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Posted on March 19, 2021 at 10:30am — 14 Comments

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन

ज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो

आज फिर से आँखें नम हैं और तुम हो

लग रहा है अब मिलन संभव नहीं है

वक़्त से लाचार हम हैं और तुम हो

रात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम

इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम हो

दिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ

नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम हो

क्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां

वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो

(मौलिक एवं अप्रकाशित)…

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Posted on February 18, 2021 at 9:30pm — 11 Comments

गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)

विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l

ह्रदय बसाये देवी सीता

वन वन भटकें राम

लोचन लोचन अश्रु बावरे

बहते हैं अविराम

सुन चन्दा तू नीलगगन से

देख रहा संसार

किस नगरी में किस कानन में

खोया जीवन सार

हे नदिया हे गगन,समीरा 

ओ दिनकर ओ धूप

तृण तृण से यूँ हाथ जोड़कर

पूछ रहे…

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Posted on December 10, 2020 at 7:00pm — 8 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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