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Usha Awasthi
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Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post बचपने की उम्र है
"आदाब,  समर कबीर जी , हार्दिक धन्यवाद आपका"
22 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post बचपने की उम्र है
"आदाब,अमीरुद्दीन खान साहेब ,मैं स्वयं विधा की जानकार नहीं हूँ।मैं तो केवल अपने भावों को शब्दों में  पिरो देती हूँ।हार्दिक आभार आपका।"
22 hours ago
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post बचपने की उम्र है
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
23 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on Usha Awasthi's blog post बचपने की उम्र है
"आदरणीय ऊषा अवस्थी जी, आदाब। हालांकि मुझे हिन्दी पद्य विधा के विषय में अधिक ज्ञान नहीं है, फिर भी आपकी ये रचना मुझे बहुत अच्छी लगी। बधाई स्वीकार करें। सादर। "
yesterday
Usha Awasthi posted a blog post

बचपने की उम्र है

खेल लेने दो इन्हे यह बचपने की उम्र हैगेंद लेकर हाथ में जा दृष्टि गोटी पर टिकीलक्ष्य का संधान कर ,  एकाग्रता की उम्र हैखेल.....गोल घेरे को बना हैं धरा पर बैठे हुएहाथ में कोड़ा लिए इक,सधे पग धरते हुएइन्द्रियाँ मन में समाहित, साधना की उम्र हैखेल.....टोलियों में जो परस्पर आमने और सामनेज्यों लगे सीमा के रक्षक शस्त्र को हैं ताननेव्यूह रचना कर समर को जीतने की उम्र हैखेल.....मौलिक एवं अप्रकाशित See More
yesterday
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"सकारात्मक टिप्पणी हेतु धन्यवाद बबीता गुप्ता जी"
May 11
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"भाई सत्य नारायन सिंह जी , हार्दिक आभार आपका"
May 11
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"हार्दिक धन्यवाद , भाई अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी"
May 11
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"हार्दिक धन्यवाद आपका, भाई दयाराम जी।"
May 11
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"आभार आपका ,आशीष यादव जी"
May 10
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"भाई धामी जी, कृपया मेरी बात को अन्यथा ना लें। मुझे बहुत प्रसन्नता होगी यदि आप गलतियाँ कहाँ पर हैं? बताएँ। यह  मेरे हित में है। बहुत धन्यवाद।"
May 10
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"भाई लक्ष्मण धामी जी ,धन्यवाद। मैं जो भी भाव आते हैं ,उन्हे लिख लेती हूँ। इसे किसी विधा को सोच कर नहीं लिखा। केवल यह ध्यान में रहता है कि जो मैं कहना चाह रही हूँ वह स्पष्ट रूप से कह सकूँ।जहाँ तक मुझे पता है,इस उसत्व में ऐसी कोई शर्त नहीं थी। मैं…"
May 10
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"घर परिवार धन्य भाग्य उनके बड़े , पलें बड़ों के बीच मिलते घर परिवार से,अनुशासन के बीज  दादी -दादा से मिलें सुन्दर , शुद्ध विचार मात - पिता से पा रहे अतुल,अनूठा प्यार चाची - चाचा से सदा पाएँ नेह,अशीष भाई -बहनों में रहे सहज परस्पर प्रीति पर्वों…"
May 9
Usha Awasthi shared Admin's discussion on MySpace
May 9
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post पर्यावरण सुरक्षा
"प्रणाम ,सुरेनद्र नाथ सिंह जी, आपको रचना पसंद आई ,जानकर खुशी हुई। हार्दिक आभार आपका"
May 2
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Usha Awasthi's blog post पर्यावरण सुरक्षा
"आद0 उषा अवस्थी जी सादर अभिवादन। उत्तम रचना, समसामयिक भी, और सन्देश देती हुई। बधाई स्वीकार कीजिए"
May 2

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

बचपने की उम्र है

खेल लेने दो इन्हे यह बचपने की उम्र है

गेंद लेकर हाथ में जा दृष्टि गोटी पर टिकी

लक्ष्य का संधान कर ,  एकाग्रता की उम्र है

खेल.....

गोल घेरे को बना हैं धरा पर बैठे हुए

हाथ में कोड़ा लिए इक,सधे पग धरते हुए

इन्द्रियाँ मन में समाहित, साधना की उम्र है

खेल.....

टोलियों में जो परस्पर आमने और सामने

ज्यों लगे सीमा के रक्षक शस्त्र को हैं तानने

व्यूह रचना कर समर को जीतने की उम्र है

खेल.....

मौलिक…

Continue

Posted on May 27, 2020 at 7:59pm — 4 Comments

पर्यावरण सुरक्षा

आज धरती धन्य है , उसका हृदय प्रमुदित हुआ

स्वच्छ वायु , स्वच्छ जल , पर्यावरण निर्मल हुआ

गर यही स्थिति रही तो संक्रमण मिट जाएगा

यदि पुनः मानव ना अपनी गलतियां दोहराएगा

क्या कभी नभ सर्वदा उज्ज्वल धुला  रह पाएगा ?

या कि फिर से धुन्ध का अजगर निगल ले जाएगा

है यही सपना निशा में दमकते नक्षत्र हों

चँहु दिशा पंछी चहकते उपवनों में मस्त हों

शुद्ध हो वातावरण , कैसे ? बड़ों से ज्ञान लें

उनकी अनुभव जन्य ज्ञान मशाल…

Continue

Posted on April 27, 2020 at 7:39pm — 6 Comments

गुलमोहर

रक्त वर्ण इन पुष्प गुच्छ से

तुमने जो श्रृंगार किया

तपती गर्म दोपहरी को भी 

है तुमने रसधार किया

लू के गर्म थपेड़ों से

बच रहने का उपचार किया

नारंगी और पीत रंग के

भावों से मनुहार किया

पथिकों को विश्राम , पंछियों को

आश्रय , उपहार दिया

जिस धरती से अंकुर फूटा 

उसका कर्ज़ उतार दिया

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 22, 2020 at 12:45pm

इच्छा नहीं

तर्क यदि दे सको तो

बैठो हमारे सामने

व्यर्थ  के उन्माद में , अब

पड़ने की इच्छा नहीं

यदि हमारी संस्कृति को

कह वृथा , ललकारोगे

ऐसे अज्ञानी मनुज से 

लड़ने की इच्छा नहीं

सर्व ज्ञानी स्वयं को

औरों को समझें निम्नतर

जिनके हृद कलुषित , है उनको

सुनने की इच्छा नहीं

व्यर्थ के उन्माद में , अब

पड़ने की इच्छा नहीं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 15, 2020 at 8:32pm — 8 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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