For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sudhir Sharma
  • Male
  • Bhopal, Madhyapradesh
  • India
Share on Facebook MySpace

Sudhir Sharma's Friends

  • Azeez Belgaumi
  • Akshay Thakur " परब्रह्म "
  • Aparna Bhatnagar
  • Venus
  • Kanchan Pandey
  • PREETAM TIWARY(PREET)
  • Admin

डांकिया

Loading… Loading feed

 

Sudhir Sharma's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal madhyapradeash
Native Place
Bhopal
Profession
Media professional
About me
i`am TV Radio Professional working with Reliance Media Pvt ltd.like & write Poems.Love to travel & Music.

Sudhir Sharma's Blog

होली

 

 

   यूकेलिप्टस से बाएं को मुडके...

   सफ़ेद कुरते में निकला था दिन अकेला सा..

   जेब में रख गुलाल की पुडिया..

   गाल उसका छुआ था...हौले से...

   सजा दिए थे सभी रंग एक ही पल में... नीले,पीले, गुलाबी और हरे..

  और एक रंग गिर गया था वहीँ...

  घर के बारामदे की चौखट…
Continue

Posted on March 19, 2011 at 5:52pm — 3 Comments

लिफ़ाफ़ा

नाम नहीं कोई पता नहीं है....

कोई भी पहचान नहीं है....
जाने किस एक शख्स ने अपने,

सहमें सहमें जज्बातों को,
बंद लिफाफे में रखकर के,

मेरे नाम से लिख भेजा है....
काश के ऐसा कोई लिफाफा

आज से पंद्रह बरसों पहले,
तुमने मुझको भेजा होता...

Posted on February 24, 2011 at 11:30pm — 1 Comment

ग्रीटिंग

याद है जब एक साल तुम्हारा ग्रीटिंग मुझे नहीं पहुंचा था...

ग्रीटिंग जिसके भीतर मैं तुमको पढता था...

जिसके एक-एक हर्फ़ से अफ़साने गढ़ता था

बहुत पुरानी बात है वो भी नया साल था.......

कई दिनों तक रक्खी थीं उम्मीद होल्ड पर...

...आज भी बीता बरस सिराने जाता…
Continue

Posted on January 1, 2011 at 2:15am — 5 Comments

रात..........

लिटाया तकिये पे हौले से थपकियाँ देकर .

और परियों की कहानी भी सुना डाली हैं...

उनींदी रात ये जगार की एक जिद सी लिए बैठी है...

चाँद आये तौ मैं कह दूंगा सुला दौ इसको...

तमाम ख्वाब मेरे खिडकियों पे बैठे हैं....…
Continue

Posted on December 10, 2010 at 11:19pm — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' posted a blog post

मैं कौन हूँ

मैं कौन हूँअब तक मैं अपना  पहचान ही नहीं पा सका भीड़ में दबा कुचला व्यथित मानवदड़बे में बंद…See More
11 hours ago
Zaif commented on Zaif's blog post ग़ज़ल - थामती नहीं हैं पलकें अश्कों का उबाल तक (ज़ैफ़)
"आ. बृजेश जी, बहुत आभार आपका।"
yesterday
Usha Awasthi posted a blog post

मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?

उषा अवस्थीमन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?वे घर ,जो दिखते नहींमिलते हैं धूल में, टिकते नहींपर "मैं"…See More
yesterday
Rachna Bhatia posted a blog post

सदा - क्यों नहीं देते

221--1221--1221--1221आँखों में भरे अश्क गिरा क्यों नहीं देतेहै दर्द अगर सबको बता क्यों नहीं देते2है…See More
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् आपके कहे अनुसार ऊला बदल लेती हूँ। ईश्वर आपका साया हम पर…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
Saturday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते' ऊला यूँ…"
Saturday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं…"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। शंका समाधान के लिए आभार।  यदि उचित लगे तो इस पर विचार कर सकते…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
Friday

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service