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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Tasdiq Ahmed Khan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - दिल मे भगवान का डर पैदा कर
"जनाब नवीन साहिब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं  शेर 1_उला मिसरे में आपने की जगह अपने करलें शेर 4_ ऊला मिसरा लय में नहीं है, यूँ कर सकते हैं "जिंदगी मांगेगी हर एक सद‌फ" शेर 6_ऊला मिसरा बहर में नहीं है, यूँ कर सकते हैं…"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल। सिर्फ धोखा मिला ज़माने से । जब कभी ऐतबार करते हैं ।। मैं तो इज्ज़त बचा के चलता हूँ । और वह तार तार करते हैं ।।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - दिल मे भगवान का डर पैदा कर
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल। देखता है वो तेरा जुल्मो सितम। दिल में भगवान का डर पैदा कर ।।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - दिल मे भगवान का डर पैदा कर
"आ. भाई नवीन जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - दिल मे भगवान का डर पैदा कर
"आद0 नवीन मणि त्रिपाठी जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर दाद के साथ बधाई स्वीकार कीजिए"
Friday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
May 16
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। बेदर्द जहां पर अफसर है इंसाफ का मंजर क्या होगा ।अब लोग सितमगर से ही तो हर घाव का मरहम पूछ रहे ।"
May 8
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।बेहतरीन गज़ल। बदला बदला आपका है ये मिज़ाज ।हाथ में क्या फिर खज़ाना आ गया ।।"
May 8
TEJ VEER SINGH left a comment for Naveen Mani Tripathi
"जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।"
May 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आद0 नवीन मनी त्रिपाठी जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकार कीजिये"
May 8
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 212जब लबों पर वह तराना आ गया ।याद फिर गुजरा ज़माना आ गया ।।शब के आने की हुई जैसे खबर ।जुगनुओं को जगमगाना आ गया ।।मैकदे को शुक्रिया कुछ तो कहो।अब तुम्हें पीना पिलाना आ गया ।।वस्ल की इक रात जो मांगी यहां ।फिर तेरा लहजा पुराना आ गया ।।छोड़ जाता मैं तेरी महफ़िल मगर ।बीच मे ये दोस्ताना आ गया ।।जब भी गुज़रे हैं गली से वो मेरे ।फिर तो मौसम क़ातिलाना आ गया ।।आरिजे गुल पर तबस्सुम देख कर ।तितलियों को भी रिझाना आ गया ।।उठ रहीं जब से कलम पर उँगलियाँ ।और चर्चा में फ़साना आ गया ।।कुछ तेरी सुहबत का शायद…See More
May 6
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

221 1222 22 221 1222 22गुज़री है मेरे दिल पर क्या क्या अब हिज्र का आलम पूछ रहे ।।मालूम तुम्हें जब गम है मेरा क्यूँ आंखों का पुरनम पूछ रहे ।।1इक आग लगी है जब दिल में चहरे पे अजब सी बेचैनी । इकरारे मुहब्बत क्या होगी ये बात वो पैहम पूछ रहे ।।2कुछ फ़र्ज़ अता कर दे जानां कुछ खास सवालातों पर अब ।होठों पे तबस्सुम साथ लिए जो वस्ल का आगम पूछ रहे ।।3हालात मुनासिब कौन कहे जलती है जमीं जलता भी है दिल।बादल से परिंदे रह रह कर बरसात का मौसम पूछ रहे ।।4हम यूँ ही तरक्क़ी करते हैं महफूज़ रहेगा मुल्क यहाँ ।।कुछ खास तो…See More
May 4
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 हरिओम श्रीवास्तव जी हार्दिक आभार"
May 4
Hariom Shrivastava commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"वाह,वाहहह,बड़ी बह्र पर लाजवाब ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी।"
May 4
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

221 1222 22 221 1222 22गुज़री है मेरे दिल पर क्या क्या अब हिज्र का आलम पूछ रहे ।।मालूम तुम्हें जब गम है मेरा क्यूँ आंखों का पुरनम पूछ रहे ।।1इक आग लगी है जब दिल में चहरे पे अजब सी बेचैनी । इकरारे मुहब्बत क्या होगी ये बात वो पैहम पूछ रहे ।।2कुछ फ़र्ज़ अता कर दे जानां कुछ खास सवालातों पर अब ।होठों पे तबस्सुम साथ लिए जो वस्ल का आगम पूछ रहे ।।3हालात मुनासिब कौन कहे जलती है जमीं जलता भी है दिल।बादल से परिंदे रह रह कर बरसात का मौसम पूछ रहे ।।4हम यूँ ही तरक्क़ी करते हैं महफूज़ रहेगा मुल्क यहाँ ।।कुछ खास तो…See More
May 3
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"आ0 आसिफ जैदी साहब तहेदिल से शुक्रिया"
Apr 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल - दिल मे भगवान का डर पैदा कर

2122 1122 22

आपने जुमलों में असर पैदा कर ।

कुछ तो जीने का हुनर पैदा कर ।।

दिल जलाने की अगर है ख्वाहिश ।

तू भी आंखों में शरर पैदा कर ।।

गर ज़रूरत है तुझे ख़िदमत की ।

मेरी बस्ती में नफ़र पैदा कर ।।

हर सदफ जिंदगी तो मांगेगी ।

इस तरह तू न गुहर पैदा कर ।।

देखता है वो तेरा जुल्मो सितम।

दिल में भगवान का डर पैदा कर ।।

अब तो सूरज से है तुझे खतरा…

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Posted on May 16, 2019 at 1:35pm — 4 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

फासले    बेकरार    करते   हैं ।

और   हम   इतंजार  करते   हैं ।।

इक तबस्सुम को लोग जाने क्यूँ ।

क़ातिलों में सुमार करते हैं ।।

सिर्फ धोखा मिला ज़माने से ।

जब कभी ऐतबार करते हैं ।।

मैं तो इज्ज़त बचा के चलता हूँ ।

और वह तार तार करते हैं ।।

उम्र गुज़री है बस चुकाने में ।

आप जब भी उधार करते हैं।।

उनको गफ़लत हुई यही यारो…

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Posted on May 15, 2019 at 3:47pm — 1 Comment

ग़ज़ल

2122 2122 212

जब लबों पर वह तराना आ गया ।

याद फिर गुजरा ज़माना आ गया ।।

शब के आने की हुई जैसे खबर ।

जुगनुओं को जगमगाना आ गया ।।

मैकदे को शुक्रिया कुछ तो कहो।

अब तुम्हें पीना पिलाना आ गया ।।

वस्ल की इक रात जो मांगी यहां ।

फिर तेरा लहजा पुराना आ गया ।।

छोड़ जाता मैं तेरी महफ़िल मगर ।

बीच मे ये दोस्ताना आ गया ।।

जब भी गुज़रे हैं गली से वो मेरे ।

फिर तो…

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Posted on May 5, 2019 at 11:43pm — 3 Comments

ग़ज़ल

221 1222 22 221 1222 22

गुज़री है मेरे दिल पर क्या क्या अब हिज्र का आलम पूछ रहे ।।

मालूम तुम्हें जब गम है मेरा क्यूँ आंखों का पुरनम पूछ रहे ।।1

इक आग लगी है जब दिल में चहरे पे अजब सी बेचैनी ।

इकरारे मुहब्बत क्या होगी ये बात वो पैहम पूछ रहे ।।2

कुछ फ़र्ज़ अता कर दे जानां कुछ खास सवालातों पर अब ।

होठों पे तबस्सुम साथ लिए जो वस्ल का आगम पूछ रहे ।।3

हालात मुनासिब कौन कहे जलती है जमीं जलता भी है…

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Posted on May 3, 2019 at 12:30am — 3 Comments

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At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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विनय कुमार commented on TEJ VEER SINGH's blog post बौना आदमी - लघुकथा -
"बहुत बढ़िया प्रेरक रचना आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको"
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"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब"
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विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तेज वीर सिंह जी"
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