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ईंटा पत्थर कंकड़ बजरी ले कर आऊँगा---ग़ज़ल

22 22 22 22 22 22 2 

ईंटें पत्थर कंकड़ बजरी ले कर आऊँगा
सुन; तेरे शीशे के घर पर सब बरसाऊँगा

फूँक-फाँक कर वर्ग विभाजन वाला हर अध्याय
क्या है सनातन सब को यह अहसास कराऊँगा

जान रहा, जग की रानी है मुद्रा-माया धारी
किन्तु मनुज से प्रीत ज़रूरी रोज़ सिखाऊँगा

मठ अधिपति को पूज रहे, जबकि नहीं हो निर्बल
वायु-अनल से युक्त बली हो, याद धराऊँगा

तीव्र प्रज्ज्वलित शब्द हैं मेरे ताप भयंकर है
किंतु स्वर्ण-मन-शोधन को मैं यूँ ही जलाऊँगा

मौलिक अप्रकाशित 

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 26, 2019 at 3:37pm
आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत बहुत आभार
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 19, 2019 at 5:11am

आ. भाई पंकज जी, सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई ।

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