For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'लुभावने या डरावने दिन?' (लघुकथा)

"हम तो अपनी सरकारी नौकरी से मज़े में हैं! तुम सुनाओ, कैसी चल रही है तुम्हारी प्राइवेट टीचरी?"
"बढ़िया! मेरे ख़्याल से तुमसे भी बेहतर चल रहा है सब कुछ!"
"वो कैसे?"
"तुम्हारी नौकरी में तुम केवल सरकार और जनता को उल्लू बनाते हो या चूना लगाते हो! ... हम तो अपनी नौकरी में मैनेजमेंट को और माता-पिता-पालकों को और छात्रों को भी, क्योंकि वे हमें उल्लू बनाते हैं या चूना लगाते हैं! 'टिट-फॉर-टेट' और 'टेक इट ईज़ी' का ज़माना है न!"
"कुछ समझ में नहीं आया! हमने तो सुना है कि प्राइवेट संस्थायें या कम्पनियां अपने कर्मचारियों का तेल निकाल लेती हैं!"
"अरे, अशासकीय स्कूल प्राइवेट कम्पनियों जैसे थोड़े न होते हैं! वे तो धनोपार्जन करके हमें धनोपार्जन के नये-नये तरीक़े सिखाते हैं नयी व्यावहारिकता के साथ!"
"वो कैसे?"
"छात्रों का रटने, समझने, सालाना पाठ्यक्रम और परीक्षा-पाठ्यक्रमों का बोझ कम कर दो, बस! ... और उनके मां-बाप-पालकों वाली कुछ ज़िम्मेदारियां निभा दो! सब का संतुष्टिकरण; अपने मज़े ही मज़े, बस!"
"सही कह रहे हो! जमकर ट्यूशन भी कर लेते होगे और 'एक्टीविटीज़ और फ़न के ज़रिए शिक्षण' के बहाने ख़ूब मज़े भी लेते होगे!"
"और क्या! सरकारी नौकरियों में तो एक सीमा है! भ्रष्टाचार के मज़े लो, बस! प्राइवेट वालों का तो सूत्र है - 'जियो और जीने दो!' शॉर्टकट से बेहतरीन परीक्षा-परिणाम और लोकप्रियता दो, बस!"
"मतलब, 'मज़े लो और सबको लेने दो'! लेकिन भाईसाहब! बच्चों के विषय संबंधित, जीवन उपयोगी वास्तविक ज्ञान के अलावा चरित्र और चहुंमुखी व्यक्तित्व-विकास कैसे करा पाते होगे, ऐं?"
"वो तो हो रहा है न, नेताओं, मीडिया और डिजीटलीकरण वग़ैरह से! बच्चे टीचरों से बहुत ही आगे हैं भाई!"
"वो कैसे?"
"बच्चे झूठ बोलना सीख रहे हैं; बड़बोलापन, डींगें हांकना, दिवास्वप्न देखना, विकसित देशों का अंधानुकरण करना सीख तो रहे हैैं न! यही ज़माने की 'मांग' है मांग ... समझे न!"
"तो फ़िर स्वास्थ्य और यौन-शिक्षा भी न!"
"हां बिल्कुल! जो मां-बाप-पालकगण नहीं सिखा पाते, छात्र आपस में स्वत: एक-दूसरे से या मीडिया और डिजिटल डिवाइस वग़ैरह से आसानी से सीख ही लेते हैं! ज़िन्दगी तो वे ही जी रहे हैं न!"
"तो फ़िर हो गया इस देश का कल्याण!"
"क्या मतलब?"
"कहते हैं न कि देश का भविष्य बच्चे और युवा ही होते हैं!"
"भैया, अब तो इस मान्यता को बदल दो! यह कहो कि 'योग्य छात्र विदेश-निर्माण के भविष्य होते हैं और अयोग्य छात्र देश के मीडिया के,राजनीतिक दलों के, वोट और सत्ता के भविष्य होते हैं!"
"मतलब तुम जैसी सोच वाले लोग ही 'शिक्षक' का नाम बदनाम कर रहे हैं!"
"भाईसाहब! जहां धर्म, परमात्मा और धार्मिक चरित्रों का नाम बदनाम हो रहा हो, वहां शिक्षक की यही नियति है न! .. शिक्षक के साथ अपराध होते हैं, तो शिक्षक भी अपराधी होंगे न आजकल!"
" कुछ अच्छे शिक्षक भी तो होते हैं न!"
"होते तो हैं, लेकिन चलन की बिज़ली के हाई वोल्टेज में उनके 'जोश' के 'फ़्यूज़' उड़ा दिए जाते हैं न, मेरे भाई!"


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 61

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post चिट्ठियाँ --
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम बृजेश कुमार 'ब्रज साहब"
3 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post एक और कसम-व्यंग्य
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
3 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post चिट्ठियाँ --
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
3 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post पत्थरों पर गीत लिखे
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें । कुछ टंकण त्रुटियाँ देख लें ।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,होली पर अच्छे दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । '…"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कागा उवाच' (लघुकथा) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'होंगी ही उससे…"
4 hours ago
Hariom Shrivastava posted blog posts
4 hours ago
vishva prakash mehra is now a member of Open Books Online
6 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
19 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

   चल छुपे जो तेरे थे राज़ नुमायाँ कर दें।दर्द अपने को पराये या के दरमाँ कर दें।जिंदगी उम्र बताई न…See More
22 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service