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मेरी आँखों में कभी अक्स ये अपना देखो

मेरी आँखों में कभी अक्स ये अपना देखो
इस बहाने ही सही प्यार का सहरा देखो
बेखबर गुल के लवों को छुआ ज्यों भँवरे ने
ले के अंगड़ाई कहा गुल ने ये पहरा देखो
वो नजाकत से मिले फिर उतर गये दिल में
अब कहे दिल की सदा हुस्न का जलवा देखो
मौला पंडित की लकीरों पे यहाँ सब चलते
तुम लकीरों से हटे हो तो ये फतवा देखो
वो भिखारी का भेष धरके बनेगा मालिक
अब सियासत में यूं ही रोज तमाशा देखो
साइकिल हाथ के हाथी के हैं जलवे देखे
अब कमल खिलने लगा चारसू भगवा देखो
ख्वाब टूटे हैं तो मतलब नहीं इसका हरगिज
ख्वाब जीवन में नहीं कोई सुनहरा देखो
एक जीवन है मिला उसको न जाया करना
हो मयस्सर तो कभी घूम के दुनिया देखो
तुमने पत्थर ही समझ मार दी जिसको ठोकर
हुस्न उस हीरे को सीने से लगाता देखो

मौलिक व अप्रकाशित

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