For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हमें पाकर भी उन्हें क्या मिलेगा

पल भर की खुशी फिर रोज़ हीं जलेगा

चाहे कहे या ना कहे वो होठों से मगर

ये सिलसिला तो अब रोज़ हीं चलेगा

 

नही पता उसने ऐसा क्यों किया

हमें जानकर भी अपना दिल क्यों दिया

ज़ख़्म उसे सुकून देते हैं शायद

तभी उसने दर्द से अपना दामन भर लिया

 

मेरी लाख लानतों के बाद भी

क्यों वो हर रोज़ चला आता है

लगता है उसे मेरे शौक पसंद है

तभी हर रोज़ मज़ा देने आता है

 

कोई इतना ग़म कैसे ढो सकता है

बंज़र दिल मे प्यार के बीज बो सकता है

बस एक हमारे सुकून की खातिर

हर बार वो हमसे रुसवा हो सकता है

"मौलिक व अप्रकाशित" 

अमन सिन्हा

 

Views: 278

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by AMAN SINHA on September 7, 2021 at 9:42am

@योगराज प्रभाकर,

श्रीमान, मेरी गलतियोंं से मुझे अवगत करवाने के लिये अपका आभार। 

मैं आगे से ज्यादा ध्यान लगाकर लिखने की कोशिश करुंगा।

 

Comment by AMAN SINHA on September 7, 2021 at 9:40am

@समर कबीर साहब, 

सबसे पहले तो मैं आप से क्षमा चाहुंगा क्युंकि शायद मैने अपने पहले टिप्पणी मे आपका नाम गलत लिख दिया था। 

बाकी हौसला बढाने के लिये अपाका दिल से धन्यवाद। 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on September 6, 2021 at 2:42pm

भाई मनोज कुमार अहसास जी. इन शब्दों को हिज्जे ग़लत थे, इसलिए लेखक को बताने के उद्देश्य से मैंने इन्हें बोल्ड कर दिया.  

Comment by Samar kabeer on September 6, 2021 at 6:34am

जनाब अमन सिंहा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by AMAN SINHA on September 4, 2021 at 12:08pm

@Manoj Kumar Ahsaas महोदय टिप्पणी के लिये धन्यवाद। मैं आपको ये बाताना चाहुंगा की मैं काव्य लिखने के विषय मे आपके तरह अनुभवी नही हूँ। सच कहूंं तो मैं किसी भी विधा से अवगत नही हूँ। मगर मैं इतना जरूर बता सकता हूँ की ये हाईलाइटेड शब्दों मेंं मेरा कोई हाथ नही है । ये एक प्रोग्राम से दुसरे प्रोग्राम मे कापी करते समय हुई तकनिकी गडबडी जान पडती है। मैं आगे से इस बात का ध्यान रखुंगा। आपके सुझाव और प्रतिक्रिया का सदैव स्वागत रहेगा।

धन्यवाद 

अमन सिन्हा     

Comment by मनोज अहसास on September 2, 2021 at 11:56pm

प्रस्तुति के लिए हार्दिक स्वागत आदरणीय कृपया यह बताने का कष्ट करें यह कौन सी विधा है आपने किस विधा में रचना की है तथा यह जो आपने हाईलाइट किए हैं शब्द इसका क्या कारण है सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन पर आपके अनुमोदन से बन्दे को तसल्ली हुई ।अरकान जल्दी में 2122 की जगह…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है, और इस विधा में भी आप कामयाब हुए,हार्दिक बधाई…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई। भाई समर जी का सुझाव उत्तम है । मिसरे…"
15 hours ago
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम आपकी बहुमूल्य इस्लाह से ग़ज़ल लाभान्वित हुई है आप सदैव यूं ही…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
Sunday
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
Sunday
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
Sunday
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तन-मन के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। दोहों की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तन-मन के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन और त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने के लिए…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर गजल -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Sunday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service