For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया

बह्र-221/2121/1221/212

वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया
आँखों से मेरी प्यार का मौसम चला गया[1]

उसको ख़बर थी ख़ौफ़ मुझे तीरगी से है
जलते हुए चराग़ तभी तो बुझा गया[2]

आँखों में था मलाल वो रुख़सत हुआ था जब
मुड़ मुड़ के दूर तक वो मुझे देखता गया[3]

आँखों में जिसकी 'मीत' में रहता था रात दिन
मुझको वो आज अपनी नज़र से गिरा गया[4]

रूपम कुमार 'मीत'

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 86

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:36pm

आदरणीय अमरुद्दीन 'अमीर' साहब जी, आपकी मौजूदगी देख कर बहुत ख़ुशी हुई,,, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, कुछ दिन पहले से ठीक है अब।। आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर जरूर अलम करूँगा।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:35pm

आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह  साहब, आदाब, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, कुछ दिन पहले से ठीक है अब।। आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर जरूर अलम करूँगा।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:34pm

आदरणीय तेजवीर सिंह साहब, आदाब, क़ुबूल कीजिए इस बालक का, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:32pm

आदरणीय सालिक गणवीर साहब, आदाब, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, कुछ दिन पहले से ठीक है अब।। आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर जरूर अलम करूँगा।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:30pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब, आदाब, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर कायम हूँ।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 12, 2020 at 4:01pm

जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। 

जनाब रवि भसीन जी की बातों का संज्ञान लें।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on July 12, 2020 at 1:06pm

आद0 रूपम कुमार जी सादर अभिवादन

ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। बधाई स्वीकार कीजिये। आद0 रवि भसीन साहिब की बातों का संज्ञान लीजिएगा।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 11, 2020 at 6:26pm

हार्दिक बधाई आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' जी।बेहतरीन गज़ल।

लगता है उसकी आंख में थोड़ा मलाल है
जब जा रहा था दूर मुझे देखता गया[5]

Comment by सालिक गणवीर on July 11, 2020 at 9:42am

प्रिय रूपम

आदाब

अच्छी ग़ज़ल हुई है, और बेहतरी के लिए गुणीजनों की इस्लाह पर अमल करो.सस्नेह.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 11, 2020 at 6:45am

आ. भाई रुपम कुमार जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई स्वीकारे । आ. भाई रवि जी के मसविरे से गजल और बेहतर होगी । सादर...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin posted discussions
8 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-चाँद के चर्चे आसमानों में
"आभार संग नमन आदरणीय धामी जी..."
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
11 hours ago
dandpani nahak commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post है जो कुछ भी धरती का - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल)
"आदरणीय लक्षमण धामी 'मुसाफ़िर ' भाई आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! और…"
12 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post है जो कुछ भी धरती का - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल)
"बहुत ख़ूब आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, इस सुंदर ग़ज़ल पर आपको ढेरों बधाई!"
12 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीय dandpani nahak साहिब, आपकी नवाज़िश और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ!"
18 hours ago
dandpani nahak commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(मूंदकर आंखें.....)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
18 hours ago
dandpani nahak commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
19 hours ago
dandpani nahak commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीय रवि 'भसीन' शाहिद जी आदाब बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई और शैर दर शैर…"
19 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)

22 / 22 / 22 / 22 / 22 / 22एक नया दस्तूर चलाया जा सकता हैग़म को भी महबूब बनाया जा सकता है [1]अपने आप…See More
19 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(मूंदकर आंखें.....)
"आपका हार्दिक आभार,आदरणीय लक्ष्मण भाई।"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service