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कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'

 221 2121 1221 212      

  

कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया              

राधा को श्याम श्याम को राधा बना दिया               

 

उस बेर की मिठास तो बस जाने राम जी      

सबरी ने जिसको चख के है मीठा बना दिया

  

यूसुफ़ नहीं था चाहने वाला था जो मेरा 

लेकिन उसी ने मुझको  ज़ुलेख़ा बना दिया       

 

खिलता रहे ख़ुलूस-ओ-वफ़ा प्यार का चमन

ये सोच के ख़ुदा ने है दुनिया बना दिया

 

ये इश्क़ है जुनूं है मोहब्बत  है या नशा                  

मजनू बना दिया कभी राँझा  बना दिया  

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by SALIM RAZA REWA on December 10, 2019 at 8:55pm

नज़रे इनायत के लिए बहुत शुक्रिया नीलेश भाई , आप सही कह रहें हैं कुछ मशवरा अत फरमाएं।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 10, 2019 at 1:08pm

आ. सलीम साहब,
अच्छा प्रयास है। . पोस्ट करने की जल्दबाज़ी में 
यूसुफ़ तो नहीं था वो मेरा चाहने वाला..बहर चूक गए इस मिसरे में 
ये सोच के ख़ुदा ने है दुनिया बना दिया.. दुनिया स्त्रीलिंग है। .बना दिया में पुल्लिंग का भाव है 
सादर 

Comment by SALIM RAZA REWA on December 9, 2019 at 10:34pm

भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब आपकी पुरख़ुलूस महब्बत का बेहद शुक्रिया।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 9, 2019 at 6:30am

आ. भाई सलीम जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

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