For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1222   1222   1222   1222

मुहब्बत के नगर में आँसुओं के कारखाने है,
यहां रहकर पुराने जन्म के कर्ज़े चुकाने हैं.

सड़क पर आके देखों तो झुलस जाओगे शिद्दत से,
समाचारों में तो इस दौर के मौसम सुहाने हैं.

उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी,
मेरी चाहत के अफसाने में पटना के फसाने हैं.

फलक पर चाँद चाहे चौथ का हो या हो पूनम का,
हमें त्यौहार सब परदेस में तन्हा मनाने हैं.

कहाँ पे आके बिगड़ी ये कहानी सोचना यारो,
मुझे फिर से तुम्हें अपने सभी किस्से सुनाने हैं.

दिखाई दे रहा है आज भी मुझको तेरा दामन,
उसे शफ्फाक रखने को मुझे आँसू छुपाने हैं.

बहुत मुश्किल से दिल के दर्द शब्दों में उड़ाए थे,
बहुत जल्दी मगर ये सारे दिल मे बैठ जाने हैं.

किसी की क्या जरूरत है नई दुनिया के लोगों को,
न डोली ही उठानी है न छप्पर ही उठाने हैं.

हमारे हाथ से निखरा नहीं है शाइरी का हुश्न,
ग़ज़ल कहना तो खुद से दूर जाने के बहाने हैं.

बड़ी जल्दी किसी के आँसुओं को पोछने वालों,
उसे भी कुछ दिनों में दर्द सारे भूल जाने हैं.

सभी का हक़ बराबर राम के सुखराज में लेकिन,
बताओ बेर शबरी के यहाँ किस किस को खाने हैं.

जहाँ पर हो वहीं से दो हमें आशीष दादी माँ,
तुम्हारे बिन हमें पहली दफा दीपक जलाने हैं.

कोई अहसास बाकी हो तो उसको कल कहेगें अब
सुबह उठकर तो विद्यालय में बच्चें भी पढ़ाने हैं

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 65

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manoj kumar Ahsaas on October 21, 2019 at 4:35pm

आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है

बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ

सुझावों पर काम करता हूँ

हार्दिक आभार

Comment by Manoj kumar Ahsaas on October 21, 2019 at 11:53am

आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है

बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ

सुझावों पर काम करता हूँ

हार्दिक आभार

Comment by Samar kabeer on October 19, 2019 at 2:53pm

जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।

'उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी'

ये मिसरा बह्र में नहीं है,देखियेगा ।

'उसे शफ्फाक रखने को मुझे आँसू छुपाने हैं'

इस मिसरे में 'शफ्फाक' ग़लत शब्द  है,सहीह शब्द है "शफ़्फ़ाफ़" ।

'हमारे हाथ से निखरा नहीं है शाइरी का हुश्न'

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि इस बह्र में मिसरे के अंत में एक साकिन लेने की इजाज़त नहीं है ।

'तुम्हारे बिन हमें पहली दफा दीपक जलाने हैं'

इस मिसरे में 'दफ़ा' ग़लत शब्द है,सहीह शब्द है ''दफ़'अ" ।

'सुबह उठकर तो विद्यालय में बच्चें भी पढ़ाने हैं'

इस मिसरे में 'सुबह'12 ग़लत शब्द है,सहीह शब्द है "सुब्ह"21 देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय सुश्री उषा जी , बहुत ही प्रभावशाली क्षणिकाएं बनी हैं , व्यंग भी है , तंज भी है। बधाई , सादर।"
11 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post अपनी अपनी धुन(लघुकथा)
"बहुत बहुत आभार आदरणीय समर जी,नमन।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post उजला अन्धकार..
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्द: कविता लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कुछ दिए ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: कुछ ख़ास है उन बातों की बात
"मुहतरमा डॉ. गीता चौधरी जी आदाब, कविता का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करे । 'वो बिखरते सिमटते…"
14 hours ago
PHOOL SINGH joined Admin's group
Thumbnail

बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |
14 hours ago
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post अपनी अपनी धुन(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,बहुत अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Usha posted a blog post

क्षणिकाएँ।

करके वादा,किसी से न कहेंगे,दिल का दर्द मेरे जान लिया।ढोंग था सब,तब समझे हम कि,महफ़िल में सरे-आम…See More
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post प्यार पर चंद क्षणिकाएँ : .......(. 500 वीं प्रस्तुति )
"आदरणीया  vijay nikoreजी , सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ हाइकु :
"आदरणीया रचना भाटिया जी , सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ हाइकु :
"आदरणीय फूल सिंह जी , सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ हाइकु :
"आदरणीय डॉ विजय शंकर जी जी , सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service