For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - दिल मे भगवान का डर पैदा कर

2122 1122 22

आपने जुमलों में असर पैदा कर ।

कुछ तो जीने का हुनर पैदा कर ।।

दिल जलाने की अगर है ख्वाहिश ।

तू भी आंखों में शरर पैदा कर ।।

गर ज़रूरत है तुझे ख़िदमत की ।

मेरी बस्ती में नफ़र पैदा कर ।।

हर सदफ जिंदगी तो मांगेगी ।

इस तरह तू न गुहर पैदा कर ।।

देखता है वो तेरा जुल्मो सितम।

दिल में भगवान का डर पैदा कर ।।

अब तो सूरज से है तुझे खतरा ।

सह्न में कोई शजर पैदा कर ।।

तीरगी से है अदावत तेरी ।

शब ए पूनम सा क़मर पैदा कर ।।

देख लूं मैं तुझे भी जी भर के ।

या ख़ुदा मुझमें बसर पैदा कर ।।

बज्मे दिल से तू चला जायेगा ।

हिज्र के नाम ज़िगर पैदा कर ।।

स्याह ये रात गुजरनी मुश्किल ।

अपने दम पे तू सहर पैदा कर ।।

चाहतें मेरी समझने के लिए ।

ऐ सनम एक नज़र पैदा कर ।।

डॉ नवीन मणि त्रिपाठी

मौलिक अप्रकाशित

Views: 54

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 21, 2019 at 1:15pm

जनाब नवीन साहिब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं 

शेर 1_उला मिसरे में आपने की जगह अपने करलें

शेर 4_ ऊला मिसरा लय में नहीं है, यूँ कर सकते हैं "जिंदगी मांगेगी हर एक सद‌फ"

शेर 6_ऊला मिसरा बहर में नहीं है, यूँ कर सकते हैं "अब तो सूरज से है तुझको ख़तरा"

शेर 7_ सानी मिसरे में शब और पूनम में इज़ाफत सही नहीं है, यूँ कर सकते हैं, " चौदहवीं शब सा क़मर पैदा कर"

शेर 8_ ऊला मिसरा लय में नहीं है, यूँ कर सकते हैं," देख लूँ मैं भी तुझे जी भर के" सानी मिसरे में बसर की जगह

बशर कर लीजिए 

Comment by TEJ VEER SINGH on May 21, 2019 at 10:37am

हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल।

देखता है वो तेरा जुल्मो सितम।

दिल में भगवान का डर पैदा कर ।।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 21, 2019 at 9:44am

आ. भाई नवीन जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on May 17, 2019 at 6:49pm

आद0 नवीन मणि त्रिपाठी जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर दाद के साथ बधाई स्वीकार कीजिए

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय दण्डपाणी भाई , बढिया कही है ग़ज़ल , बधाई"
12 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय आसिफ भाई , बधाई अच्छी ग़ज़ल कही ! मुख फाड़ेगा जो कलयुग तो ये सतयुग ने कहा…"
18 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आ. सुरेंदर भाई ग़ज़ल अच्छी कही , बधाई आपको"
21 minutes ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आँख मौसम ने फिराई, रौ फिरा कर निकला। फिर घटाओं की जफ़ा से जला इक घर निकला।1 सुर्ख़ियों में हो गईं आज…"
2 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"क्या हो क़ासिद से गिला किसलिए कमतर निकला बेवफा तो ये मेरा अपना ही दिलबर निकला झील से देते थे उपमा…"
10 hours ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरनीय सुरिंदर जी,अच्छी ग़ज़ल के साथ आगाज़ के लिए बधाई सवीकार करें।"
10 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"बहुत अच्छी कोशिश आदरणीय सुरेन्द्र इन्सान जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें सादर।"
10 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"*ग़ज़ल* न तो गौहर, न वो जौहर, न सुख़न्वर निकला। सब ने जिसको कहा बरतर वही कमतर…"
10 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"*ग़ज़ल* न तो गौहर, न वो जौहर, न सुख़न्वर निकला। सब ने जिसको कहा बरतर वही कमतर…"
10 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"*ग़ज़ल* न तो गौहर, न वो जौहर, न सुख़न्वर निकला। सब ने जिसको कहा बरतर वही कमतर…"
10 hours ago
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"सादर नमन आदरणीय समर कबीर जी। बहुत बहुत शुक्रिया।"
10 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आप का स्वागत है ।"
10 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service