For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

122 122 122 122
वो मक़तल में कैसी फ़ज़ा माँगते हैं ।।
जो क़ातिल से उसकी अदा माँगते हैं ।।

जुनूने शलभ की हिमाकत तो देखो ।
चरागों से अपनी क़ज़ा माँगते हैं।।

उन्हें भी मिला रब सुना कुफ्र में है ।
जो अक्सर खुदा से जफ़ा माँगते हैं ।।

असर हो रहा क्या जमाने का उन पर ।
वो क्यूँ बारहा आईना माँगते हैं ।।

अजब कसमकश है मैं किससे कहूँ अब ।
यहां बेवफ़ा ही वफ़ा माँगते हैं ।।

जिन्हें पीना आया है नजरों से साकी ।
वही होश आते नशा माँगते हैं ।।

उन्हीं को मिली है सजाएं यहां पर ।
मेरे हक़ में जो फैसला माँगते हैं ।।

शज़र सूखते जब कहीं तिश्नगी से।
तो बादल से काली घटा माँगते हैं ।।

मैं दिल कैसे दूँ खेलने के लिए अब ।
जरा सोचिए आप क्या माँगते हैं ।।

करो कुछ तो उनपे भी नज़रे इनायत ।
तुम्हारे लिए जो दुआ माँगते हैं ।।

लगी हाथ उनको ही मायूसियां तब ।
तेरे दिल का जब रास्ता माँगते हैं ।।

यकीनन वही लोग होंगे सितमगर।
जो रिश्ता यहाँ जिस्म का माँगते हैं ।।

डॉ नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 65

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on April 9, 2019 at 11:44am

आ0 गुरुदेव कबीर साहब हार्दिक आभार ।

Comment by Samar kabeer on April 7, 2019 at 5:49pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

'अजब कसमकश है मैं किससे कहूँ अब'

इस मिसरे में 'कसमकश'    

को "कशमकश" कर लें ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on April 7, 2019 at 3:47pm

आ0 तेजवीर सिंह साहब हार्दिक आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on April 7, 2019 at 3:46pm

आ0 ब्रजेश कुमार ब्रज साहब हार्दिक आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on April 7, 2019 at 3:45pm

आ0 सुशील शरण साहब तहेदिल से बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by TEJ VEER SINGH on April 6, 2019 at 7:11pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल।

यकीनन वही लोग होंगे सितमगर।
जो रिश्ता यहाँ जिस्म का माँगते हैं ।।

Comment by Sushil Sarna on April 5, 2019 at 3:00pm

वो मक़तल में कैसी फ़ज़ा माँगते हैं ।।
जो क़ातिल से उसकी अदा माँगते हैं ।।

जुनूने शलभ की हिमाकत तो देखो ।
चरागों से अपनी क़ज़ा माँगते हैं।।

वाह आदरणीय नवीन जी वाह जवाब नहीं आपकी खूबसूरत अहसासों का। इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई कबूल फरमाएं सर।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 4, 2019 at 11:29am
बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय त्रिपाठी जी..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH posted a blog post

गंगा - लघुकथा -

गंगा - लघुकथा -शंकर सेना में  हवलदार था। उसकी पोस्टिंग सिलीगुड़ी में थी। आज उसका अवकाश था तो अपनी…See More
4 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 का आगाज रविवार दिनांक 28अप्रैल 2019 को श्री…See More
4 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"आदाब। कच्चा चिट्ठा। हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब इस बढ़िया व उम्दा रचना के लिए।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
10 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt shared Naveen Mani Tripathi's blog post on Facebook
16 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय विनय कुमार जी।लघुकथा पर आपकी उपस्थिति मेरे लिये गर्व की बात है।पुनः आभार।"
yesterday
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post शृंगारिक दोहे :
"हार्दिक बधाई आदरणीय । बेहतरीन दोहे।"
yesterday
विनय कुमार commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"बहुत बढ़िया रचना वर्तमान हालात पर आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको"
yesterday
विनय कुमार commented on TEJ VEER SINGH's blog post बौना आदमी - लघुकथा -
"बहुत बढ़िया प्रेरक रचना आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको"
yesterday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब"
yesterday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तेज वीर सिंह जी"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service