For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो

बह्र : 2122 1122 1122 22

कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो

आओ बैठो यहाँ पे हश्र हमारा देखो

कैसे हिन्दू को किया दफ़्न वहाँ लोगों ने

एक मुस्लिम को यहाँ कैसे जलाया देखो

जिस तरह लूटा था दिल्ली को कभी नादिर ने

उसने लूटा है मेरे दिल का ख़ज़ाना देखो

आदमी वो नहीं होता जो दिखा करता है

जो नहीं दिखता हो जैसा उसे वैसा देखो

नूर से जल के, फ़लक से कोई साज़िश करके

चाँद को कैसे सितारों ने निकाला देखो

इक जहन्नम के सिवा और भला है भी क्या

मैं कहूँगा न किसी से कि ये दुनिया देखो

लोग जितना ही सुधरने को हमें कहते थे

हमने उतना ही यहाँ ख़ुद को बिगाड़ा देखो

मैंने भी छोड़ दिया ख़ुद को तो अब दुख कैसा

तुमने चाहा ही यही था मुझे तन्हा देखो

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 162

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mahendra Kumar on January 16, 2019 at 11:45am

आदरणीय रवि जी, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और इस्लाह का बहुत-बहुत शुक्रिया. आपकी सलाह अनुसार शेर को दुरुस्त करने का प्रयास करता हूँ. हार्दिक आभार. सादर. 

Comment by Md. anis sheikh on January 16, 2019 at 11:15am

महेन्द्र जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है बहुत बहुत बधाई, बाकी जो समर साहब कहें हैं वो गौर करने वाली बात है आप के माध्यम से मुझे भी सीखने को मिला 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 16, 2019 at 6:31am

आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Ajay Tiwari on January 15, 2019 at 7:16pm

आदरणीय महेंद्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई  है. मतला खास तौर से अच्छा लगा. हार्दिक बधाई.

Comment by राज़ नवादवी on January 15, 2019 at 12:40am

आदरणीय महेंद्र कुमार जी, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. 

मैंने भी छोड़ दिया ख़ुद को तो अब दुख कैसा
तुमने चाहा ही यही था मुझे तन्हा देखो

बहुत ख़ूब. वाह वाह. 

Comment by Samar kabeer on January 14, 2019 at 5:53pm

जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

उन सितारों ने वहाँ रौशनी से जल भुन कर
चाँद को आसमाँ से मिल के निकाला देखो'

इस शैर के ऊला में 'वहां' और सानी में 'आसमाँ' शब्द शिल्प की कमज़ोरी का प्रतीक है,ग़ौर करें,यूँ कर सकते हैं:-

'नूर से जल के फ़लक से कोई साज़िश करके

चाँद को कैसे सितारों ने निकाला देखो'

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 14, 2019 at 12:53pm

आदमी वो नहीं होता जो दिखा करता है 
जो नहीं दिखता हो जैसा उसे वैसा देखो --- क्या बात है साहेब तबीयत तर कर दी गज़ब के अशआर है | 

Comment by Ravi Shukla on January 14, 2019 at 10:31am

आदरणीय महेंद्र जी बहुत अच्छी ग़ज़ल आपने कही दिली मुबारकबाद पेश करता हूं दिखा  दिखता इन शब्दों के अपेक्षा दिखाई शब्द का प्रयोग करें तो वाक्य विन्यास की दृष्टि से अधिक अच्छा होगा सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH posted a blog post

गंगा - लघुकथा -

गंगा - लघुकथा -शंकर सेना में  हवलदार था। उसकी पोस्टिंग सिलीगुड़ी में थी। आज उसका अवकाश था तो अपनी…See More
4 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 का आगाज रविवार दिनांक 28अप्रैल 2019 को श्री…See More
4 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"आदाब। कच्चा चिट्ठा। हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब इस बढ़िया व उम्दा रचना के लिए।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
10 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt shared Naveen Mani Tripathi's blog post on Facebook
16 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय विनय कुमार जी।लघुकथा पर आपकी उपस्थिति मेरे लिये गर्व की बात है।पुनः आभार।"
yesterday
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post शृंगारिक दोहे :
"हार्दिक बधाई आदरणीय । बेहतरीन दोहे।"
yesterday
विनय कुमार commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"बहुत बढ़िया रचना वर्तमान हालात पर आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको"
yesterday
विनय कुमार commented on TEJ VEER SINGH's blog post बौना आदमी - लघुकथा -
"बहुत बढ़िया प्रेरक रचना आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको"
yesterday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब"
yesterday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तेज वीर सिंह जी"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service