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मार्केटिंग - डॉo विजय शंकर

प्रचार हो रहा है ,
प्रचार चल रहा है ,
दुष्प्रचार दौड़ रहा है ,
अपनी ढपली ,
अपना राग बज रहा है ,
स्वप्रचार ,
स्वयं का उपहास बन रहा है ,
दूसरे का दुष्प्रचार ,
न हास्य है , न व्यंग है ,
स्वयं आपके व्यक्तित्व से
चिपटता जा रहा है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker 10 hours ago

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी , आभार, आपने बड़े मनोयोग से रचना का पाठ किया और ुटण३ ही मनोयोग से उसकी टिप्प्पणी लिखी। बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद।
आपका सुझाव बहुत ही सुन्दर एवं सार्थक है ! अवश्य प्रयास करूंगा। सादर।

Comment by Dr. Vijai Shanker 10 hours ago

आदरणीय विजय निकोर जी , आशा है स्वस्थ एवं सानंद होंगे। रचना पर उपस्थित होने के लिए आपका बहुत बहुत आभार एवं ह्रदय से धन्यवाद सादर।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on Sunday

या शीर्षक "जोंक-बाज़ार"!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on Sunday

निर्जीव और सजीव; उपयोगी और अनुपयोगी; राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय; उचित और अनुचित; स्वाभाविक और थोपी गई  सब चीज़ों/उत्पादों/प्रवृत्तियों पर गहरे और गंभीर कटाक्ष करती 'गागर में सागर' विचारोत्तेजक सृजन हेेतु सादर हार्दिक बधाइयां मुहतरम जनाब 

डॉ. विजय शंकर साहिब। मेरे ख़्याल से आपको यह एक बेहतरीन लघुकथा में भी कहना चाहिए। शीर्षक हिंदी में "जोंक" या "जौंकें" या "जौंकों का प्रकोप/झोंक" जैसे हो सकते हैं। एक अभ्यास मात्र!

Comment by vijay nikore on Friday

अति प्रभावशाली प्रस्तुति। आनन्द आ गया । बधाई, विजय जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on Thursday

आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आशा है आप स्वस्थ एवं प्रसन्न होगें। छोटी सी मेरी इस कविता को आपने इतनी गंभीर विवेचना से नवाज़ा , बहुत बहुत शुक्रिया। आपका ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद।
स्वास्थ ठीक है , व्यस्तता ज्यों कि त्यों। इसी व्यस्तता में अमेरिका आ गए। कुछ ही दिन में लैटिन अमेरिका जाना है।
सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on Thursday

आदरणीय सुश्री नीलम उपाध्याय जी , रचना को मान देने के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।

Comment by Dr. Vijai Shanker on Thursday

आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, रचना को मान देने के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।



Comment by Samar kabeer on Thursday

आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,जब हम कोई आवाज़ रोज़ सुनें, कोई चीज़ रोज़ पढ़ें तो उसके असरात नफसियाती(साइकोलाजी) तौर पर हमारे जीवन पर असर अंदाज़ होने लगते हैं,बहुत सुंदर गम्भीर प्रभावशाली रचना के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें ।

अब आपकी तबीअत कैसी है?

Comment by Neelam Upadhyaya on Thursday
आदरणीय डॉ विजय शंकर जी, नमस्कार । कटाक्षपूर्ण अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई।

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