For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कड़वे जलवे (लघुकथा)

"लोगों की आदत है हर बात, हर घटना में से केवल नकारात्मक बातें ही निकालते हैं!" झूमते हुए दरख़्तों ने कुछ अनुपयोगी पत्तों और डालियों से छुटकारा पाते हुए तेज़ आंधी से कहा- "अब देख, तुझे लोग केवल तबाही और नुकसान के लिए याद करते हैं, जबकि...!"


"क्या जबकि?" तेज़ हवाओं को लपेटती आंधी ने पूछा।


"जबकि आजकल तुझे विश्व स्तर का 'टेलीविजन चैनल कवरेज़' मिल रहा है, तुझ पर 'विडियो क्लिप्स' इंटरनेट पर अपलोड किए जा रहे हैं! तेरे तो जलवे हैं! तरह-तरह से लोगों को 'ठंडक', 'संतुष्टि' और अच्छी-खासी 'डिजिटल कमाई‌'‌ और 'नाम' भी दिला रही है!"


"छोड़ो यह मीडियापा, फेसबुकियों के जैसा! हम बहूरूपिये ज़रूर हैं, लेकिन हक़ीक़त दिखाते हैं आभासी नहीं! आसमां पर उड़ने वालों को ज़मींदोज़ कर दिखाते हैं! सोने वालों को जगा देते हैं!" आंधी ने अपने मंज़र दिखाते हुए कहा।


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 117

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 16, 2018 at 6:12pm

रचना पर समय देकर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब श्याम नारायण शर्मा साहिब।

Comment by Shyam Narain Verma on May 16, 2018 at 4:39pm
इस अच्छी लघु कथा के लिए बधाई, आदरणीय
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 16, 2018 at 8:14am

मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर समय देकर विचार साझा करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब सुशील सरना जी, जनाब समर कबीर साहिब, जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब, जनाब विजय निकोरे साहिब और मुहतरमा बबीता गुप्ता जी।

Comment by vijay nikore on May 15, 2018 at 12:41pm

कटाक्ष अच्छा है लघु कथा में। हार्दिक बधाई, इस लघु कथा पर, आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी।

Comment by Mohammed Arif on May 15, 2018 at 10:49am

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                    मानवीकरण रूप में बेहतरीन कटाक्षपूर्ण लघुकथा । कुछ सामयिकता का पुट लिए भी है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on May 14, 2018 at 9:35pm

आदरणीय सर जी, नमस्कार, बहुत ही सरल ,सुन्दर शब्दों में प्रस्तुतीकरण, प्रकाशित रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा।

Comment by Samar kabeer on May 14, 2018 at 7:42pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बढ़िया लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on May 14, 2018 at 3:38pm

वाह बहुत सुंदर ... डिजिटल दुनियां को मानवीय सवेदनाओं के साथ जोड़ कर सुंदर लघुकथा का प्रस्तुतीकरण हुआ है आदरणीय उस्मानी साहिब। हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आ. भाई सुशील जी, बेहतरीन रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
39 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत बीहुत मुबारकबाद आपको । कृपया 'वुजूह' शब्द का अर्थ बतएँ? तो…"
41 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' and babita garg are now friends
45 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्या मन है बीमार पड़ौसी - गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई बृजेश जी, गजल की प्रशंसा कर उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद ।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब।"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"अभिनव अरुण जी को लख लख बधाईयाँ "
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत बहुत आभार आद० लक्ष्मण भैया "
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "तारतम्यता"
" सबक़ देती बहुत बढ़िया छंदमुक्त रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट साहिब।"
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"हार्दिक आभार विनय जी "
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत बहुत आभार आद० प्रतिभा जी "
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जी सादर .आभार "
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० रवि शुक्ल भैया को जन्मदिन की हार्दिक बधाई "
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service