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ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे

2122 1122 22
चाँद बनकर वो निखर जाएंगे ।
शाम होते ही सँवर जाएंगे ।।

जख्म परदे में ही रखना अच्छा ।
देखकर लोग सिहर जाएंगे ।।

छेड़िये मत वो कहानी मेरी।
दर्द मेरे भी उभर जाएंगे ।।

घूर कर देख रहे हैं क्या अब।
आप नजरों से उतर जाएंगे।।

वक्त रुकता नहीं है दुनिया में ।
दिन हमारे भी सुधर जाएंगे ।।

क्या पता था कि जुदा होते ही ।
इस तरह आप बिखर जाएंगे ।।

ये मुहब्बत है इबादत मेरी ।
एक दिन दिल मे ठहर में जाएंगे ।।

इश्क़ पर बात अभी क्या करना ।
इश्क पर आप मुकर जाएंगे ।।

जिद मुनासिब कहाँ है पीने की ।
आप तो हद से गुजर जाएंगे ।।

बज्म में आ गए तो रुकिए भी।
आज की रात किधर जाएंगे ।।

मुझको मालूम है फ़ितरत उनकी ।
मुझ से मिलते ही निखर जाएंगे ।।
नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Naveen Mani Tripathi on September 23, 2017 at 9:28pm
आदरणीय शिज्जु शकूर साहब तहे दिल से शुक्रिया आप से सहमत हूँ । शेर में त्रुटि थी अब ठीक कर दिया हूँ । सादर नमन।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 21, 2017 at 11:32am

आ. नवीन मणि त्रिपाठी जी बेहतरीन ग़ज़ल है बहुत बहुत बधाई आपको,

ग़ज़ल के तीसरे और चौथे शे'र के ऊला मिसरों में थोड़ी शंका है मुझे

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 20, 2017 at 11:40pm
आ0 राम अवध विश्वकर्मा जी आभार
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 20, 2017 at 11:39pm
भाई अफरोज शहर जी सादर आभार मतला ठीक कर दिया है ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 20, 2017 at 11:35pm
आ0 मुहम्मद आरिफ़ साहब आभार
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 20, 2017 at 11:35pm
आ0 सुरेंद्र नाथ सिंह कुश क्षत्रप साहब आभार
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 20, 2017 at 11:34pm
आ0 सुशील सरन साहब आभार
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 20, 2017 at 11:32pm
आ0 कबीर सर सादर प्रणाम के साथ हार्दिक आभार ।
Comment by Sushil Sarna on September 20, 2017 at 7:57pm
चाँद बनकर वो निखर जाएंगे ।
शाम होते ही सँवर जाएंगे ।।

जख्म परदे में ही रखना अच्छा ।
देखकर लोग सिहर जाएंगे ।।

वाह आदरणीय वाह बहुत उम्दा अशआर कहे हैं आपने। मुबारकबाद कबूल फरमाएं।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 20, 2017 at 1:29pm
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । मुबारकबाद क़ुबूल करें । शेष गुणीजन अपनी राय देंगे ।

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