For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़्इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन
ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो
जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो

छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में
तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो

बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के
शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो

हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं
अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो

इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो
----
शदीद-सख़्त
क़ल्ब-दिल
कलीद्-चाबी
कशीद्-खींचना
गुफ़्त-ओ-शुनीद-बात चीत
पलीद-गन्दा,ग़लीज़
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 344

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on July 21, 2017 at 11:13am
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 21, 2017 at 11:11am
जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,इस ग़ज़ल में भी वही क़वाफ़ी आये हैं जो पिछली ग़ज़ल में भी थे ।
ये ग़ज़ल किसलिये हुई,ये कहानी भी सुन लीजिये,यहाँ मेरे एक शाइर दोस्त हैं उन्होंने इस जमीन में ग़ज़ल कहकर मुझसे फ़रमाइश कि के मैं भी इसमें ग़ज़ल कहूँ, उनकी ग़ज़ल आठ अशआर पर मबनी थी,और सामने के सभी क़ाफिये वो इस्तेमाल कर चुके थे,जैसे 'मज़ीद, ईद, दीद, हमीद,वग़ैरा मेरे लिए उनकी फ़रमाइश पूरी करना एक चैलेन्ज बन गया और मैंने ये ग़ज़ल उन्हें सुनाई और उनसे कहा कि मैंने आपके किसी भी क़ाफिये को छुए बग़ैर अपनी ग़ज़ल कही है,उन्होंने भी कहा कि ये ज़मीन वैसे भी दुश्वार थी आपने अपने तईं इसे और दुश्वार कर लिया और बहतरीन ग़ज़ल कही, ये ग़ज़ल जब मेरे एक शागिर्द सुभाष सोनी ने सुनी तो उन्होंने 27 साल पहले कहा हुआ मेरा एक मतला सुनाया :-
'ये काम आज के अह्ल-ए-जदीद करते हैं
ग़ज़ल के मुंह पे तमांचा रसीद करते हैं'
और सोनी जी ने फ़रमाइश करके वो ग़ज़ल मुझसे कहलवाई जो पटल पर पहले आ गई ।
ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Mahendra Kumar on July 20, 2017 at 9:22pm

इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो ...वाह! कितनी ख़ूबसूरती से आपने प्रचलित मुहावरे को शेर में तब्दील किया है. शानदार!! काफ़िये मेरे लिए बिलकुल नए थे. बहुत कुछ सीखने को मिला. इस उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाई स्वीकार कीजिए आ. समर कबीर सर. सादर.

Comment by Ravi Shukla on July 17, 2017 at 7:56pm
आदरणीय समर साहब आदाब फिर से एक बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली मुबारकबाद पेश करते हैं इसके लिए ।कुछ ऐसी ग़ज़ल कुछ दिन पहले आपने कही थी इन्ही कवाफ़ी के साथ उस पर हुई चर्चाओं से हमे लगा कि यह ग़ज़ल आई है। अशआर में अपनी बात कहने का आपका अंदाज बहुत ही निराला है एक बार फिर से इस ग़ज़ल के अशआर पर दिली मुबारकबाद पेश करते हैं सादर
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:37pm
जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब आदाब,बहुत दिनों बाद आपकी प्रतिक्रया पाकर बेहद ख़ुशी हुई,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:34pm
जनाब विनय कुमार जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:31pm
जनाब मोहित मिश्रा(मुक्त)साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:28pm
जनाब निलेश'नूर',साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:26pm
जनाब बृजेश कुमार'ब्रज'साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:23pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छन्द पर क्या खूब कलम चलाई है आपने, हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीया कल्पना जी"
3 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र को साकार कर दिया आपके सार छन्दों ने हार्दिक बधाई आदरणीय"
13 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"सतविन्दर जी भाये तुमको,मेरे सरसी छन्द । बाग़ बाग़ ये दिल कर डाला,बहुत मिला आनन्द ।। सदा बनाये रखना…"
15 minutes ago
surender insan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीया प्रतिभा पांडे जी।सादर नमन सँग आभार जी।"
15 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"बेहतरीन सार छंद/छन्नपकैया सृजन के लिए सादर हार्दिक बधाई आपको आदरणीय अरुण कुमार निगम जी"
15 minutes ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया,बातें ख़ास बताई चित्र हुआ यह सार्थक सर जी,ले लो खूब बधाई"
18 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"दिया आपने इन छन्दों पर,मुझको इतना मान । मेरे जैसा नहीं जगत में, कोई भी धनवान ।। इतना सुंदर इतना…"
20 minutes ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी,प्रयास आपको पसन्द आया ,यह सार्थक हुआ। तिथि में कोमा का इस्तेमाल…"
22 minutes ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा दीदी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार,सादर नमन!"
24 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सुरेश अग्रवाल जी आदाब,सराहना के लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।"
25 minutes ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"श्रद्धेय सौरभ सर,सादर नमन! प्रयास आपको ठीक लगा,लिखना सार्थक हुआ। अनुमोदन कर उत्साहवर्धन करने के लिए…"
25 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 76 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब मोहित मुक्त साहिब आदाब,सरसी छन्द की सराहना के लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।"
27 minutes ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service