For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़

यारों में जब रंजिश होने लगती है
चुपके चुपके साज़िश होने लगती है

आँखों में जब सोज़िश होने लगती है
रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

बाबू जी का साया सर से उठते ही
धरती की पैमाइश होने लगती है

तुम जब मेरे साथ नहीं होते जानाँ
मुझ पर ग़म की यूरिश होने लगती है

मुझसे कोई काम अटक जाता है जब
उनको मेरी काविश होने लगती है

जब जब भी मैं नाम तुम्हारा लिखता हूँ
हाथों में क्यूँ लरज़िश होने लगती है

बच्चे ग़ुरबत को क्या समझें उनकी तो
रोज़ नई फ़रमाइश होने लगती है

मुझसे कोई भूल "समर" हो जाये तो
महशर जैसी पुरसिश होने लगती है

---

रंजिश :- दुश्मनी
साज़िश :- षडयंत्र
सोज़िश :- जलन
पैमाइश :- माप (नपती)
यूरिश :- हमला
काविश :- तलाश
लरज़िश :- कम्पन्न
ग़ुरबत :- ग़रीबी
महशर :- महाप्रलय के बाद ईश्वर जिस मैदान में हर इंसान से उसके कर्मों का हिसाब लेगा ।
पुरसिश :- पूछताछ (जवाब तलबी)
___

समर कबीर
मौलिक/ अप्रकाशित

Views: 285

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on August 5, 2017 at 5:07pm
जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,आपकी प्रतिक्रया पाकर मुग्ध हूँ,ये मेरे लिये बहुत बड़ा सम्मान है कि आपने मेरी इस ग़ज़ल को अपने ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ से नवाजा और इस पर दोबारा तशरीफ़ लाये और मेरी ग़ज़ल का मान बढ़ाया,इस स्नेह के लिए दिल की तमाम तर गहराइयों के साथ शुक्रगुज़ार हूँ आपका ।
Comment by Samar kabeer on August 5, 2017 at 5:03pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by vijay nikore on August 5, 2017 at 4:15pm

// आँखों में जब सोज़िश होने लगती है
रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

बाबू जी का साया सर से उठते ही
धरती की पैमाइश होने लगती है //

आपके हर एक शेर की अपनी ही खूबी है... ७ जुलाई को यह गज़ल पढ़ने के बाद इसके यह २ शेर तो जाने कब-कब खयालों में गूँजते रहे हैं .. कि जैसे आपकी गज़ल म्रेरे खयालों में खुद-ब-खुद पढ़ी जा रही है।

मंच को यह तोफ़ा देने के लिए आपको फिर से बहुत-बहुत बधाई, भाई समर जी।

Comment by Sushil Sarna on August 5, 2017 at 3:00pm

जब जब भी मैं नाम तुम्हारा लिखता हूँ
हाथों में क्यूँ लरज़िश होने लगती है

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , बहुत दिलकश अशआर लिखे हैं आपने ... नमन आपकी लेखनी को , आपकी कल्पना को ... इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल से शे'र दर शे'र मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।

Comment by Samar kabeer on August 5, 2017 at 2:48pm
जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Ravi Shukla on July 17, 2017 at 8:14pm
आदरणीय समर साहब आदाब बह्र मीर पर एक शानदार गजल पेश करने के लिए आपका दिल से शुक्रिया और मुबारकबाद । हर शेर उम्दा कहा है धरती की पैमाइश..... हकीकत बयान की है आपने मकते का जवाब भी नहीं बहुत शानदार मकता कहा है आपने कुल मिलाकर एक बेहतरीन गजल के लिए दिली मुबारकबाद पेश है ।सादर।
Comment by Samar kabeer on July 12, 2017 at 10:39pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Mahendra Kumar on July 12, 2017 at 10:29pm

वाह! वाह!! वाह!!! क्या शानदार ग़ज़ल पढ़ने को मिली है आ. समर सर. मज़ा आ गया. इस ग़ज़ल के कई शेर मुझे मेरे बेहद क़रीब लगे. शेर-दर-शेर दाद के साथ मुबारकबाद पेश है. ईश्वर करे आप यूँ ही लिखते रहें. सादर.

Comment by Samar kabeer on July 10, 2017 at 12:00am
जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 9, 2017 at 11:59pm
मोहतरमा प्राची सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Gurpreet Singh posted a blog post

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)रहे हम तो नादां ये क्या कर चले कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।वो तूफ़ान के जैसे…See More
35 minutes ago
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर जी,,, आपके सुझावों के अनुसार ग़ज़ल में बदलाव करता हूँ "
1 hour ago
Mohammed Arif posted blog posts
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - अब हक़ीकत से ही बहल जायें ( गिरिराज भंडारी )
"आदरनीय सुरेन्द्र भाई , ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका हृदय से आभार ।"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - अब हक़ीकत से ही बहल जायें ( गिरिराज भंडारी )
"आदरनीय आरिफ भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - अब हक़ीकत से ही बहल जायें ( गिरिराज भंडारी )
"आदरनीय समर भाई , ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार । 'मेरे अन्दर का बच्चा कहता है चल न…"
1 hour ago
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"जनाब तस्दीक अहमद खान साहब एवं श्री सुरेंद्र नाथ सिंह साहब, सादर नमस्कार तथा प्रोत्साहित करने हेतु…"
2 hours ago
श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post क्वैक कवि / किशोर करीब
"आदरणीय सुरेंद्र जी सादर नमस्कार,दरअसल मुझे कविता रचना के संबंध में तकनीकी ज्ञान थोड़ा भी नहीं है। बस…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on vijay nikore's blog post दरगाह
"आदरनीय बड़े भाई , हमेशा की तरह खूब सूरत भाव पूर्ण कविता की रचना की है आपने । हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on मंजूषा 'मन''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीया मंजूषा जी , खूबसूरत गज़ल के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।"
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश भाई , अच्छी गज़ल कही है दिल से बधाइयाँ आपको । अंतिम शेर का सानी कुछ अर्थ नही दे पा रहा…"
3 hours ago
santosh khirwadkar posted a blog post

तू कुछ बदला बदला सा ....संतोष.

तू कुछ बदला बदला सा नज़र आता हैदोस्त था मिरा अब दुश्मन नज़र आता हैये तो किसी और की ही शह है…See More
4 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service