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ममता ......(लघुकथा )

ममता ....

"सुनिए,  मैं ये कह रही थी कि 5 दिन के बाद अपनी पोती नीलू का जन्म दिन है । नीलू पूरे चार साल की हो जाएगी" पार्वती ने लेटे-लेटे अपने  पति राघव से कहा।

"हाँ वो तो है ।" राघव ने जम्हाई लेते हुए कहा ।

"मैं ये सोच रही थी क्यों न हम  इस मौके पर हम  अपनी तरफ से ग्यारह हजार रुपये का चेक अपने आशीर्वाद के रूप में भेज दें क्योंकि शारीरिक व्याधियों की हम दिल्ली तो जा नहीं सकते ।" पार्वती ने कहा ।

"तेरा विचार सही है । मैं कल ही  बैंक में चेक डाल दूँगा । पार्वती  एक बात तो बता कि हमारे बेटा बहू रोज तेरे  से इस  ईवेंट के बारे में डिस्कस करते हैं पर क्या एक बार भी उन्होंने हमें जन्म दिन पर बुलाया,नहीं न  । और तू उन पर निहाल हो रही है ।" राघव ने कहा ।

"वो नही बुलाएंगे तो क्या हम भी अपना फर्ज़ भूल जाएं ।हम बड़े हैं वो बच्चे हैं । आप तो बेकार ही सोचते रहते हो । आप तो बस कल चेक भेज दो ।"

राघव हाँ हाँ करता जा रहा था और महसूस कर रहा था कि ममता बेटे की  इस  उपेक्षा पर कितनी भारी थी  हालांकि उपेक्षा की व्यथा ने माँ की आँखें गीली कर दी थी ।

सुशील सरना / 28-2-23

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Sushil Sarna on March 10, 2023 at 5:30pm

आदरणीया रचना भाटिया जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीया जी 

Comment by Rachna Bhatia on March 9, 2023 at 10:22am

आदरणीय सुशील सरना जी,आज के ज्वलंत विषय पर अच्छी लघुकथा हुई। बधाई स्वीकारें।

Comment by Sushil Sarna on March 2, 2023 at 11:24am

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 1, 2023 at 3:09pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।

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