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परत घटे ओजोन की, बढ़े धरा का ताप
काटे हम ने पेड़ जो, बने वही अभिशाप।१।
*
छन्नी सा  ओजोन  ही,  छान  रही  है धूप
घातक किरणें रोक जो, करती सुंदर रूप।२।
*
गोला सूरज आग का, विकिरण से भरपूर
पराबैंगनी  ज्वाल  को, ओजोन  रखे  दूर।३।
*
जीवन है ओजोन से, करो न इस को नष्ट
बिन इसके धरती सहित होगा सबको कष्ट।४।
*
क्लोरोफ्लोरोकार्बन,  है जिन की सन्तान
एसी फ्रिज ये उर्वरक, दें उसको नुकसान।५।
*
कर इनका उपयोग कम, करना अच्छा काम
पायेगी  इस  से  धरा,  तन  मन  से  आराम।६।
*
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 22, 2021 at 5:18pm

आ. भाई सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by Samar kabeer on September 22, 2021 at 11:27am

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, अच्छे दोहे रचे आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 17, 2021 at 8:20am

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद । शेष इंगित दोहों में बदलाव के बाद उपस्थित होता हूँ। सादर

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on September 15, 2021 at 7:03pm

जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, सभी दोहों को एक साथ कविता की तरह पढ़ने पर ओज़ोन दिवस के अच्छे दोहे हुए हैं, बधाई स्वीकार करें, लेकिन पाँचवा और छठा दोहा स्वतंत्र रूप से अपनी बात स्पष्ट नहीं कर पाए हैं। सादर। 

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