For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है
मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है

यहां तालाब नदियां जब कई बरसों से सूखे हैं
खुदा जाने हमें पीने को पानी कौन देता है

हमारी जिंदगी ठहरी हुई इक झील है लेकिन
ये उम्मीदों के दरिया को रवानी कौन देता है

जमीं से आसमां तक का सफर हम कर चुके लेकिन
नहीं मालूम मंजिल की निशानी कौन देता है

परिंदे भी समझते हैं कि पर कटने का खतरा है
इन्हें फिर हौसला ये आसमानी कौन देता है।।

.                                           

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 584

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by atul kushwah on June 1, 2021 at 8:25pm

हृदय से शुक्रगुजार हूं भाई Aazi Tamaam जी।
सादर

Comment by atul kushwah on June 1, 2021 at 8:24pm

अदने से प्रयास को अशीषने के लिए हृदय से आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी सर।

Comment by atul kushwah on June 1, 2021 at 8:23pm

आदरणीय बसंत सर, बहुत—बहुत आभार। हौसला बढ़ जाता है। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 26, 2021 at 8:55pm

आ. अतुल जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Aazi Tamaam on April 22, 2021 at 7:12am

सुंदर रचना के लिए सहृदय बधाई

सादर प्रणाम आदरणीय अतुल जी

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 21, 2021 at 11:59am

आदरणीय  atul kushwah  जी सादर नमस्कार 

बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गाड़ी निकल रही है
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब, मुझे आपकी यह रचना गीत से ज़ियादा हिन्दी की ख़ूबसूरत नज़्म लगी है, बधाई…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ‘गुनगुन करता गीत नया है’
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब, उदाहरणीय गीत की रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में
"बाक़ी टिप्पणियाँ कहाँ गईं भाई?"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में
"'उन्होंने खेल  जो  खेला उसे मिटाने में '---ये मिसरा अब बह्र में हो गया है…"
4 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में
"अफसोस, मतले के सानी में 'उसे' दो बार टाइप हो गया है, कृपया एक 'उसे' रद्द मान…"
5 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

ज़िंदा हूँ अब तक मरा नहीं

ज़िंदा हूँ अब तक मरा नहीं, चिता पर अब तक चढ़ा नहींसाँसे जब तक मेरी चलती है, तब तक जड़ मैं हुआ नहींजो…See More
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

गाड़ी निकल रही है

गीत*कच्चे रास्तों गडारों से,गाड़ी निकल रही है।*जा रहे हैं किधर कोई,बूझता ही नहीं।फूट रहे हैं सर…See More
6 hours ago
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में

1212     1122     1212     22 / 122 बहुत  सी देर लगी आग दिल  लगाने  में उन्होंने खेल जो खेला उसे…See More
6 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे ......
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभारी है सर ।अवश्य"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post श्राद्ध पक्ष के कुछ दोहे. . . .
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post श्राद्ध पक्ष के कुछ दोहे. . . .
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ‘गुनगुन करता गीत नया है’
"वाह अनुपम अभिव्यक्ति आदरणीय अशोक रक्ताले जी । हार्दिक बधाई सर"
7 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service