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अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र-22/22/22/22/22/2

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ
और किसी को मत देना धोखा जानाँ [1]

जब आँखों को दरिया करने का मन हो
तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ [2]

दिन से रात तलक मैं तुमको रोता हूँ
तुम भी मुझको आठ-पहर रोना जानाँ [3]

अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम
वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ [4]

तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी
सीखो ख़ुद से मिलकर ख़ुश होना जानाँ [5]

आज जला दी वो वाली फ़ोटो जिसमें
सूट तुम्हारे जिस्म पे था काला जानाँ [6]

तुमसे पहले मैं ख़ुश रहता था लेकिन
बाद तुम्हारे रंज-ओ-ग़म रहता जानाँ [7]

चार महीने खेल के दिल को तोड़ दिया
मेरा दिल क्या एक खिलौना था जानाँ? [8]

हाए! तुम्हारे लब को देख के लगता है
तुमने 'मीत' का ख़ून पिया होगा जानाँ[9]

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 30, 2020 at 8:17am

आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  साहिब  जी,   प्रणाम 

ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये बेहद मशकूर हूँ। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 29, 2020 at 7:37pm

आ. रूपम कुमार जी, सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 27, 2020 at 10:59am

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब जी,  मेरा  प्रणाम आपको ,  ग़ज़ल  पर आपकी  उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया , अपना स्नेह बनाए रखिए बालक पर ,

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on September 27, 2020 at 10:41am

जनाब रूपम कुमार जी अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 27, 2020 at 1:21am

आदणीय सुशील सरना साहिब, हौसला अफ़ज़ाई और ग़ज़ल पर उपस्थिति के लिए हृदय तल से शुक्रिया करता हूँ।। बहुत दुआएँ

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 27, 2020 at 1:20am

आदरणीय सालिक सर्, हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति बालक के लिए बड़ी बात है।। बहुत दुआएँ

Comment by Sushil Sarna on September 20, 2020 at 9:32pm
वाह आदरणीय शानदार गजल
Comment by सालिक गणवीर on September 19, 2020 at 8:57pm

प्रिय रुपम कुमार

बह्र-ए-मीर इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करो.सलामत रहो और ख़ूब लिखो.

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 18, 2020 at 8:22pm

मोहतरमा उस्ताद समर कबीर साहिब जी, आपको मेरा प्रणाम, आपकी दाद मिल रही है, तो कोशिश सफल हुई, मैं कोशिश करता हूँ सुधारने की वो त्रुटि, आपका स्नेह बना रहे हम पर।

Comment by Samar kabeer on September 17, 2020 at 8:58pm

जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर बहुत उम्द: ग़ज़ल कही आपने, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'चार महीने खेल के दिल को थोड़ दिया'

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