For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बोल उठी सच हैं लकीरें तेरी पेशानी की(७६ )

(2122 1122 1122 22 /112 )
बोल उठी सच हैं लकीरें तेरी पेशानी की
इस जवानी ने बहुत जिस्म की मेहमानी की
**
क्या दिया कोई किसी अपने को धोका तूने
वज्ह  आख़िर तो कोई होगी पशेमानी की 
**
वक़्त का पहिया लगातार चले मर्ज़ी से
फ़िक्र उसको नहीं दुनिया की परेशानी की
**
आब जिस रूप में हो उसकी बशर है क़ीमत
तिश्नगी में ही ज़रूरत न फ़क़त पानी की
**
ज़िंदगी भर की सज़ा लिख दी मुक़द्दर में मेरे
क्यों ख़ुदा प्यार की इक छोटी सी नादानी की
**
क्या हुआ ज़ीस्त में गर पीरी ने दी है दस्तक 
इस में क्या बात भला दोस्त है हैरानी की
**
हाल मुफ़लिस के नहीं आज भी बेहतर हैं  ख़ुदा
है ज़रूरत उसे रब अब भी निगहबानी की
**
एक मिसरे से भला नज़्म कभी शेर हुआ
कुछ भी ऊला के बिना पूछ नहीं सानी की
**
आइना जानता है राज़ सभी तेरे 'तुरंत '
जिसने हर रोज़ तेरे रुख़ की नज़रसानी की
**
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 52

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 29, 2020 at 12:22am

आदरणीय Samar kabeer  साहेब , सच में आपकी नज़र बहुत तेज़ है , मैं लाख सर मारता तो भी मेरे समझ नहीं आती ये बात , जबकि आपकी नज़र सीधी वहीं गई है | सादर नमन | 

Comment by Samar kabeer on March 28, 2020 at 10:45pm
'हाल मुफ़लिस के नहीं आज भी बेहतर है ख़ुदा'
इस मिसरे में 'हाल मुफ़लिस के''के' शब्द की वज्ह से बहुवचन हो रहा है,अगर 'के' रखना है तो "हैं" कर लें,और अगर "है" रखना है तो 'के' की जगह "का" कर लें,उम्मीद है आप समझ गए होंगे ।
Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 28, 2020 at 9:55pm

आदरणीय Samar kabeer साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए शुक्रगुज़ार हूँ | सादर नमन | क्या मुफ़लिस एक वचन है तो "है " नहीं होगा सर ,या यह शब्द एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए "हैं " आएगा ? 

Comment by Samar kabeer on March 28, 2020 at 8:20pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।

'वज़ह आख़िर तो कोई होगी पशेमानी की '

इस मिसरे में 'वज़ह'  को 

"वज्ह" कर लें ।

'क्यों ख़ुदा प्यार की इक छोटी सी नादानी की'

इस मिसरे में 'की' शब्द दो बार खटकता है,इसे यूँ कर सकते हैं:-

'क्यों ख़ुदा प्यार में इक छोटी सी नादानी की'

'हाल मुफ़लिस के नहीं आज भी बेहतर है ख़ुदा'

इस मिसरे में 'है' को "हैं" कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Usha Awasthi posted a blog post

बचपने की उम्र है

खेल लेने दो इन्हे यह बचपने की उम्र हैगेंद लेकर हाथ में जा दृष्टि गोटी पर टिकीलक्ष्य का संधान कर , …See More
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

चराग़ों की यारी हवा से हुई है

122/122/122/122चराग़ों की यारी हवा से हुई है जहाँ तीरगी थी वहीं रोशनी हैइबादत में होना असर लाज़मी है…See More
5 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ईद कैसी आई है!
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब, आदाब। "ईद कैसी आई है"ग़ज़ल को ग़ैर मुरद्दफ़ में तब्दील कर…"
6 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल( कैसी आज करोना आई)

22 22 22 22कैसी आज करोना आईकरते है सब राम दुहाई।आना जाना बंद हुआ है,हम घर में रहते बतिआई!दाढ़ी मूंछ…See More
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मजदूर अब भी जा रहा पैदल चले यहाँ-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा और मार्गदर्शन के लिए आभार । बह्र का संदर्भ…"
8 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

वो सुहाने दिन

कभी लड़ाई कभी खिचाई, कभी हँसी ठिठोली थीकभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली थीएक स्थान है जहाँ सभी…See More
8 hours ago
रणवीर सिंह 'अनुपम' posted a blog post

हल हँसिया खुरपा जुआ (कुंडलिया)

हल हँसिया खुरपा जुआ, कन्नी और कुदाल।झाड़ू   गेंती  फावड़ा,  समझ  रहे   हैं  चाल।समझ  रहे   हैं चाल,…See More
8 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " posted a blog post

ईद कैसी आई है!

ईद कैसी आई है ! ये ईद कैसी आई है ! ख़ुश बशर कोई नहीं, ये ईद कैसी आई है !जब नमाज़े - ईद ही, न हो,…See More
8 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।
"जनाब समर कबीर साहिब, आदाब । ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और तनक़ीद ओ इस्लाह और हौसला अफ़ज़ाई के लिये…"
9 hours ago
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।
"जनाब अमीरुद्दीन ख़ान 'अमीर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन क़वाफ़ी ग़लत हैं,बहरहाल इस…"
9 hours ago
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post योग छंद
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे छंद लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें । भाई 'अनुपम' जी की…"
9 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहब"
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service