For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

May 2013 Blog Posts (195)

रफ्तार बढ़ा...

जो बीत गयी सो बात गयी ...ये बात किसी ने खूब कहीं

अब क्या सोचे तू ,पड़ा-पड़ा ..उठ जाग जा अब रात गयी

कर तैयारी अब आगे की ,कि रात गयी तो बात गयी 

फिर ना कहना ऐ-यार मेरे .. सारी मेहनत बेकार…

Continue

Added by POOJA AGARWAL on May 29, 2013 at 3:30pm — 10 Comments

वो मै था .कि......

..वो मै था .कि......

जो सबके साथ चलना चाहता था ,

पर ये वो थे , अपने को मेरा सहारा समझ बेठे ,

वो मै था , जो प्यार को खुदा मानता रहा ,

पर ये वो थे की मेरे प्यार मे , लालच को तलाशते रहे,

वो मै था, सबसे छोटा बना हुआ था ,

पर ये वो थे सब अपने को बड़े बना बेठे ,

एक मै था कि घर अपना न बना पाया अभी तक

पर ये वो थे सब महल सजा बेठे ,

वो मै था कि बेठा रहा इंतजार मे मौत तक ,

पर ये वो थे कि मुड़ कर भी न देखा रहे गुजर मे…

Continue

Added by aman kumar on May 29, 2013 at 2:00pm — 15 Comments

सब्ज़ दिल

प्रेम के विशाल बटवृक्ष 

जिसमें भावनाओं की गहरी 

जड़ें और यकीन की 

मजबूत साखें

उसमें झूमता है 

इठलाता है 

सब्ज़ दिल 



रिवाजों और रस्मों की 

तेज आँधियाँ भी 

बेअसर होती हैं इस 

विशाल वृक्ष के आगे

जब यकीन के मजबूत तने में 

तना होता है…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on May 29, 2013 at 12:00pm — 9 Comments

मन मूरख

मान मान मन मूरख मेरे,

मत फंस विषय जाल मे,

जो सुख चाहे भाग विषयन से,

मत इन फंद फंसे री ।

जनम जनम नहि इनसे उबरें,

ताते ध्यान धरे…

Continue

Added by annapurna bajpai on May 29, 2013 at 8:30am — 7 Comments

हवा

हवा

एक वासंती सुबह

‘’ मैं कितनी खुशनसीब हूँ ,

मेरे सर पर है आसमान

पैरों तले ज़मीन .

मेरी सांसों के आरोह – अवरोह में ,

मेरे रंध्रों में ,

शुद्ध हवा का है प्रवाह .’’

‘’ मैं कितनी खुशनसीब हूँ .’’

कुंजों में एक सरसराहट सी हुई ,

मालती की कोमल पल्लवों पर ,

ठहरी हुई थी हवा ,

मेरे विचारों को भाँप कर ,

मेरे गालों को थपथपा कर

उसने हौले से कहा –

‘’ खुश और नसीब ,

दो अलग अलग है बात .

मुझसे पूछो –

मैं…

Continue

Added by coontee mukerji on May 29, 2013 at 1:25am — 14 Comments

तेरा मेरा होना ~nutan~

तुम्हारा मेरा होना 

जैसे न होना एक सदी का 

वक्त के परतों के भीतर 

एक इतिहास दबा सा |

जैसे पाषाण के बर्तनों मे 

अधपका हुआ सा खाना 

और गुफा मे एक चूल्हा 

और चूल्हे में आग का होना | 

तुम्हारा मेरा होना 

जैसे खंडहर की सिलाब में 

बीती बारिश का रिमझिम होना

और दीवारों की नक्काशियों में 

मुस्कुराते हुए चेहरों का होना.............



तुम्हारा होना 

जैसे कोयले की अंगार के पीछे 

हरियाले बरगद की छाँव का होना 

जहाँ सकुन की…

Continue

Added by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on May 29, 2013 at 12:21am — 10 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
सरस्वती वंदना- गीत //डॉ प्राची

////

हंसवाहिनी  वाग्देवी  शारदे  उद्धार  कर

अर्चना स्वीकार कर माँ, ज्ञान का विस्तार कर  



स्वप्न की साकारता संस्पर्श कर लें उंगलियाँ

ज्ञान की अमृत प्रभा द्रुमदल की खोले पँखुड़ियाँ

नवल सार्थक कल्पना में हौंसलों की धार कर …

Continue

Added by Dr.Prachi Singh on May 28, 2013 at 8:00pm — 37 Comments

फिर मिलेंगे अगर खुदा लाया

वाह! तरही मुशायरा के इस अंक में क्या ही शानदार, एक से बढ़कर एक गजलें पढने को मिली...आनंद आ गया... सभी गजलकारों को तहेदिल से मुबारकबाद देते हुए मुशायरा के दौरान व्यस्तता की वजह से पोस्ट नहीं हो सकी 'मिसरा ए तरह' पर गजल प्रयास सादर प्रस्तुत...

क्या पता अच्छा या बुरा लाया।

चैन दे, तिश्नगी उठा लाया।

 

जो कहो धोखा तो यही कह लो,

अश्क अजानिब के मैं चुरा लाया।

 

क्यूँ फिजायें धुआँ धुआँ सी हैं,

याँ शरर कौन है छुपा…

Continue

Added by Sanjay Mishra 'Habib' on May 28, 2013 at 5:21pm — 20 Comments

गर्मी के दिन याद दिलाते हैं गांवों की

पछुआ की यह गर्म हवा व्याकुल करती है,

सूरज की भी किरणें हैं ले रहीं परीक्षा।

गर्मी के दिन याद दिलाते हैं गांवों की,

काश! छुअन छू जाती हमकों अमराई की,

गर्मी के दिन याद.........................।

शहरों की यह आपाधापी, कमरे में बंद अपनी दुनिया।…

Continue

Added by Atul Chandra Awsathi *अतुल* on May 28, 2013 at 1:00pm — 10 Comments

मत खेलो प्रकृति से....

लो झेलो अब गर्मी

भयानक-विकराल और

शायद असह्य भी..है न ?!!

देखो अब प्रकृति का क्रोध

तनी हुई भृकुटि और प्रकोप...



विज्ञान के मद में चूर

ऐशो आराम की लालच में

भूल बैठे थे कि है कोई सत्ता

तुमसे ऊपर भी,

है एक शक्ति - है एक नियंत्रण

तुम्हारे ऊपर भी...



एसी चाहिये-फ्रिज चाहिये

हर कदम पर गाड़ी चाहिये

लेकिन इन सबकी अति से

होने वाली हानि पर कौन सोचे

किसके पास है समय ?!!!



वैज्ञानिक कर रहे हैं शोध

पर किसके…

Continue

Added by VISHAAL CHARCHCHIT on May 27, 2013 at 9:30pm — 17 Comments

!!! गजल !!!

!!! गजल !!!

वज्न- 2122, 2122, 2122, 212

अब वतन को लूटकर सिर कांटना क्या पीर है।

आम जनता रोज मरती शापता क्या पीर है।।

घूस खोरी या कमीशन खूब करते ठाठ से।

मुफलिसी का हाथ थामे रास्ता क्या पीर है।।1

जिन्दगी की डोर टूटी बम धमाका जोर से।

आदमी अब आदमी ना वासना क्या पीर है।।2

न्याय भी अब राग गाती या गरीबी-ताज हो।

जन्म का अधिकार कहती आत्मा क्या पीर है।।3

जेठ सूरज की नवाजिश वृक्ष जलकर मर रहे।

आश का पंछी…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 27, 2013 at 7:46pm — 16 Comments

जिंदगी

जिंदगी

दर्द है या गम,

कि है नीरस सावन,

या कागज कोरा..

जाती हुयी शाम को ..

आती हुयी रात को ..

खिलखिलाती वो हंसी को,

पंक्षियों के कोलाहल को...

उसको है…

Continue

Added by Amod Kumar Srivastava on May 27, 2013 at 4:30pm — 7 Comments

जीवन में जब से तुम आये [गीत]

नए रंग खिले नए फूल खिले ,

जीवन में जब से तुम आये |

आँखों से घटाएं बरस रहीं ,

ये प्रेम के सागर लहराए |

कभी पत्थर जैसे जीते थे |

बेहोशी में दिन बीते थे |

जीवन को बोझ सा ढोते थे |

तनहाई में अक्सर रोते थे |

मायूस मेरा दिल नाच उठा ,

जब देख हमे तुम मुस्काये |

सूना इस दिल का आँगन था |

कहीं भटका भटका सा मन था |

औरों को अपना कहते थे |

खुद से ही खफा हम रहते थे…

Continue

Added by Neeraj Mishra "प्रेम" on May 27, 2013 at 3:00pm — 9 Comments

जो गीत ह्रदय से निकला हो

जो गीत ह्रदय से निकला हो , कागज़ पे लिखो बेमानी है ।

वो गीत ह्रदय पर लिखना, ही जीवन की प्रेम कहानी है |

जब दिल में प्रेम उमड़ता है, आँखों से आंसू बहते हैं ,

मोती हैं समझने वालों को, नासमझो को तो पानी है ।

हर प्रेमी अपने प्रियतम को, हर हाल में पान चाह रहा ,

नासमझ भला ये क्या जाने, प्रेम तो तो एक कुर्बानी है ।

जब प्रेम दिलों में फूटे तो, वो सबके लिए बराबर हो ,

पर प्रेम में भेद भी होता है, इस बात पे ही है…

Continue

Added by Neeraj Mishra "प्रेम" on May 27, 2013 at 2:35pm — 19 Comments

सपने की झलक

सपने की झलक

 

स्वर्णिम कल्पनाओं में पले, सलोने-से, परितुष्ट सपने मेरे,

लगता है कई संख्यातीत संतप्त युगों पर्यन्त  मैंने तुमको

आज  जीवन-गति की लय पर यूँ ध्वनित देखा, गाते देखा।

वर्तमान के उजले संगृहीत प्रकाश में पुन:  प्रदीप्त थे तुम,

समय की धारा पर मैंने तुमको लहरों-सा लहलहाते देखा।

जाने कितने अवशेष हैं अब सुख-निद्रा के यह प्रसन्न-पल,

गिने-चुने पलों की झोली भर कर रंजित मन में संप्रयुक्त

ऐसे ही उल्लास में अपने तू…

Continue

Added by vijay nikore on May 27, 2013 at 1:00pm — 17 Comments

दे विधान भी कड़े कड़े

चीन ने भारतीय सीमा के अन्दर घुसकर ५ किलोमीटर लम्बी सड़क बनाई....तब कवि को लेखनी उठानी पड़ती है.......जागरण के लिए.....

1

भारती महान किन्तु अन्धकार का वितान, है अमा समान ज्ञान का नहीं प्रसार है

द्रोह वृद्धि की कमान, भ्रष्टनीति की मचान, क्यों सजी हुई कि स्वाभिमान तार तार है

मानवीयता न ध्यान, पाप पुण्य व्यर्थ मान, दानवी मनुष्य का मनुष्य पे प्रहार है

धर्म का रहा न मान, रुग्ण आँख नाक कान, शत्रु का लखो विवेक नाश हेतु वार है

2

क्यों नपुन्सकी प्रवृत्ति का…

Continue

Added by Dr Ashutosh Vajpeyee on May 27, 2013 at 10:38am — 16 Comments

मेरी प्यारी भारत माँ

जब देखता हूँ इस युग के भारतवर्ष के मंत्रियों को

खौल उठता है दिल जब देखता हूँ भ्रष्टाचारियों को

हर सड़क पर खुदे हैं गड्ढे

हर गली में कचरों की भरमार

हर रोज़ अख़बारों में हत्या का समाचार

राजधानी होकर भी हर रोज़ होता बलात्कार

सदाचारियों से सरकार का नहीं कोई सारोकार

गरीबी बढती दिन पर दिन

सरकार करती रोज़ भ्रष्टाचार

सदाचारी मंत्रियों की बढती दरकार

दुष्कर्मियों पर परोपकार

सद्कर्मियों का तिरस्कार

मंत्रियों के पास धन की भरमार

आम नागरिकों को…

Continue

Added by Rohit Dubey "योद्धा " on May 27, 2013 at 10:00am — 5 Comments

काँपते उर

संवेदना के शुष्क तरु
के सानिध्य में,
पुष्प प्रीति के,
ढूंढे जा रहे हैं
आज।
पत्थरों को ईश मान,
मंदिरों में घट बंधा,
घट-जलधार के पास से
पिपासाकुल खग...
भगाए जा रहें हैं
आज।
प्रसाधन-जनित
यज्ञशाला की अग्नि में,
आंच के भय से
आहुति,
सब घटा रहे हैं।
सुना है,देखा नहीं
भगवान औ भूत,दोनों
पर...ईशास्था से अभय
को नकार
भूत में विश्वास कर,
उर काँपते हैं आज।
-विन्दु
(मौलिक/अप्रकाशित)

Added by Vindu Babu on May 27, 2013 at 8:10am — 14 Comments

अद्भुत कला

अद्भुत कला है

बिना कुछ किये

दूजे के कामों को

खुद से किया बताकर

बटोरना वाहवाही...

जो लोग

महरूम हैं इस कला से

वो सिर्फ खटते रहते हैं

किसी बैल की तरह

किसी गधे की तरह

ऐसा मैं नही कहता

ये तो उनका कथन है

जो सिर्फ बजाकर गाल

दूसरों के कियेकामों को

अपना…

Continue

Added by anwar suhail on May 26, 2013 at 7:49pm — 5 Comments

आओ प्रिये!

आओ प्रिये ! आओं

फिर रात ढली

फिर चाँद पुकारे

ज्यों रोशनी को

चिराग तरसे

त्यों तुम्हारी याद में

नैन बरसे।।



आओ प्रिये ! आओ

दिल की हर धड़कन

तुम्हें पुकारे ।।



तुम्हारी छुअन से मिलती

नई चेतना मुझको ।

नेह में डूबी हुई

नई प्रेरणा मुझको ।



वही चिर-परिचित सम्बल,

वही तुम्हारा अहसास,…

Continue

Added by TARUN KUMAR SONI "TANVEER" on May 26, 2013 at 4:30pm — 8 Comments

Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ram Awadh VIshwakarma posted a blog post

ग़ज़ल-आ गई फिर से मुसीबत मेरे सर पर कम्बख्त

बह्र-फाइलातुन फइलातुन फइलातुन फैलुनमुँह अँधेरे वो चला आया मेरे घर कमबख्त आ गई फिर से मुसीबत मेरे सर…See More
2 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted blog posts
2 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post आज कल झूठ बोलता हूँ मैं
"आपका बहुत शुक्रिया , आप लोगों की वजह से मेरी अधूरी ग़ज़ल मुक्कमल हुई,, आप से निवेदन है की आगे भी मेरी…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post टिड्डियाँ चीन नहीं जायेंगी
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी, आदाब। मनमोहक रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें। सादर।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post आज कल झूठ बोलता हूँ मैं
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी, उस्ताद मुहतरम की इस्लाह के बाद ग़ज़ल निखर गयी है। वाह...…"
3 hours ago
pratibha pande commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post टिड्डियाँ चीन नहीं जायेंगी
"वाह...चीन  टिड्डियाँ  वायरस  और भारतीय सौहार्द सहिष्णुता....सटीक तीर  । बधाई इस…"
3 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

टिड्डियाँ चीन नहीं जायेंगी

टिड्डियाँ   चीन नहीं जायेंगीवह आयेंगी तो सिर्फ भारतक्योंकि वह जानती हैंकि चीन मेंबौद्ध धर्म आडंबर…See More
4 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।
"जी, भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी । धन्यवाद। "
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, चलने को जमाने में बहुत कुछ चल रहा है । पर सभ प्रमाणिक ट्रेडमार्क नहीं है ।…"
15 hours ago
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post वो सुहाने दिन
"श्रीमान राम साहब और कबीर साहब, हौंसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद। "
15 hours ago
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।
"आपको जो उचित लगे कीजिये,मुझे और भी काम हैं ।"
16 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post उफ़ ! क्या किया ये तुम ने ।
"मुहतरम, अगर आप ब्लॉग पर समझा देते तो मेरे इलावा मुझ जैसे बहुत सारे ना आशना शुअ़रा हज़रात को भी…"
16 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service