For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (17,255)

ग़ज़ल

रौशनी दिल में नहीं हो तो ख़तर बनता है,

आग सीने में लगी हो तो ज़रर  बनता है।

टूट  जाते हैं कई  रिश्ते ग़लत  फ़हमी से,

रंजिशें भूल ही जाए जो, बशर बनता है।

बात जो निकले ज़बां से व असर रखती है,

राज़ हो जाए अ़यां गर, तो ज़हर बनता है।

अदबियत जिसको विरासत मेहि मिल जाती हो,

बस कोई ऐसे नहीं 'दाग़' ओ 'जिगर' बनता है।

ह़स्बो फ़ितरत सेहि पहचान लिये  जाते हैं,

रफ़्त: रफ़्ता ज कोई शोख़ नज़र बनता…

Continue

Added by अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " on March 29, 2020 at 2:43pm — 3 Comments

अ़ज़्म

डरते  हैं  जो मुश्किल से घबराते हैं  ख़तरों से , 

लरज़ीदः क़दम फिर वो मन्ज़िल को नहीं पाते ,, 

गर अ़ज़्म जो पुख़्ता हो लें काम भी हिम्मत से, 

तो  लोग  सितारों  से  आगे  हैं  निकल  जाते ।

                   

'मौलिक व अप्रकाशित' 

Added by अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " on March 29, 2020 at 12:19pm — 2 Comments

मेरा सपना

कल नींद में हमने एक सपना देखा।

देखा कि ,मेरा देश बदल गया है।।

जाति ,धर्म का नहीं है रगड़ा

ऊंच-नीच का खत्म है झगड़ा।।

नारी का नहीं है शोषण,

गरीब को भरपूर है पोषण।

सब के, भंडार भरे हैं,

निठल्ले भी काम करें हैं।

ना अपराधों की कही है गंध,

थाना ,कचहरी सब है बंद।

नेता सब सुधर गए हैं,

भ्रष्टाचारी ना जाने किधर गए हैं।

ना रिश्वत है ,ना चित्कार कहीं,

है शांति चहु ओर,

पर जब नींद खुली तो देखा, हकीकत है कुछ और।।



द्वारा भूपेंद्र… Continue

Added by Bhupender singh ranawat on March 29, 2020 at 10:15am — No Comments

स्नेह-धारा

स्नेह-धारा

कल्पना-मात्र नहीं है यह स्नेह का बंधन ...

उस स्वप्निल प्रथम मिलन में, प्रिय

कुछ इस तरह लिख दी थीं तुमने

मेरे वसन्त की रातें

मेरी समस्याओं ने

अव्यव्स्थाओं ने, अभिलाषाओं…

Continue

Added by vijay nikore on March 29, 2020 at 8:00am — No Comments

जिंदगी साथ में चल दे तो सफ़र बनता है l

जिंदगी साथ में चल दे तो सफ़र बनता है l

इस बहाने कोई अपना सा मगर बनता हैl

दे मुसीबत मुझे, मेरी ही बनाई कहते,

इस निभाने को ही कोई तो हुनर बनता है l

बांध देते हो यूँ मुझको मिरी दुनिया में क्यूँ ,

सोच उड़ती ये फ़लक ख़ास बशर बनता है l

जब उजालों में नहीं साफ़ नज़र आया तो,

दिल का चेहरा कहाँ ऐसे ही ख़बर बनता है l

फ़लसफा कब यहाँ मेरा ही सफ़र कर जाये,

"एक दिन में कहाँ अंदाज -ए -नज़र बनता है l "

मौलिक व…

Continue

Added by मोहन बेगोवाल on March 29, 2020 at 7:00am — No Comments

तड़प उनकी भी चाहत की इधर जैसी उधर भी क्या ?(७७ )

(1222 1222 1222 1222 )

तड़प उनकी भी चाहत की इधर जैसी उधर भी क्या ?

लगी आतिश मुहब्बत की इधर जैसी उधर भी क्या ?

**

मिलन के बिन तड़पते हैं वो क्या वैसे कि जैसे हम

जो बेचैनी है सोहबत  की इधर जैसी उधर भी क्या ?

**

हुआ है अनमना सा दिल हुई कुछ शाम भी बोझिल

तम्मना आज ख़िलवत की इधर जैसी उधर भी क्या ? 

**

बग़ैर इक दूसरे के जी सकें और मर न पाएँगे

ज़रूरत ऐसी…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 29, 2020 at 12:00am — 4 Comments

संदेश समय यह देता है!

प्रभु ने तुम्हें बनाया था जब
साथ तुम्हारे और बहुत कुछ
भी सिरजा था,
तुम अपने मद में भूल गए
किरदार में अपने फूल गए
 
दोहन तो सबका खूब किया
पोषण पर किंतु न ध्यान दिया
सब जीव-जंतु और वृक्ष, नदी
ये सब तुमको कुछ देते हैं
बदले में कुछ ना लेते हैं
 
अस्तित्व से तेरे जुड़े हैं ये
सबके पीछे कुछ कारण हैं
उस कारण को भी भूल…
Continue

Added by Dr Vandana Misra on March 28, 2020 at 5:19pm — No Comments

बोल उठी सच हैं लकीरें तेरी पेशानी की(७६ )

(2122 1122 1122 22 /112 )

बोल उठी सच हैं लकीरें तेरी पेशानी की

इस जवानी ने बहुत जिस्म की मेहमानी की

**

क्या दिया कोई किसी अपने को धोका तूने

वज्ह  आख़िर तो कोई होगी पशेमानी की 

**

वक़्त का पहिया लगातार चले मर्ज़ी से

फ़िक्र उसको नहीं दुनिया की परेशानी की

**

आब जिस रूप में हो उसकी बशर है क़ीमत…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 27, 2020 at 11:00pm — 4 Comments

सरकारी राशन



गांव मुहल्लों के लोग कोरोना के कहर के भय से मुक्त अब राहती राशन की आस में खुश हैं।मुखिया, सरपंच और गांव के अगहरिया लोगों के सभी लोग राशन कार्ड धारी हैं ही,लाल कार्ड वाले भी हो गए हैं।भले ही साधन संपन्न हों,तो क्या हुआ?एक बार कुछ ले देकर नाम शामिल हो गए,तो फिर चांदी ही चांदी है।मुफ्त का माल खाते रहिए।पूछता ही कौन है? वातावरण इसी मुआफिक बना हुआ है।कल्लू खेतिहर की बीवी बगल के घर आई है।

" कल अनाज लेने जाना होगा", कल्लू की बहुरिया इतराती हुई बोली।

" कहा से?"अनजान बनती हुई मास्टर भोला…

Continue

Added by Manan Kumar singh on March 27, 2020 at 7:06pm — 2 Comments

ऐ पागल पथिक !

ऐ पागल पथिक ! ठहरो जरा ,

रुको जरा , सांस लो तनिक ,

सम्भलो जरा I

सब कुछ पाने की चाह में ,

कुछ टूट गया उस आशियाने में,

कुछ छूट गया उस हसीं फ़सानें में ,

ठहरों, रुको, उसे सवारों, उसे खोजो जरा I

रुको जरा ........

घर पर नन्हों की आस में ,

और बुजुर्गों की लम्बी प्यास में ,

छूटे किसी साज और रियाज़ में ,

वक्त की चीनी घोलो जरा, कोई सुर ताल छेड़ो जरा I

रुको जरा ........

लूडो की गोटियाँ खोजो ,

शतरंज की बिसात बिछाओ जरा ,

कैरम की धूल…

Continue

Added by Dr. Geeta Chaudhary on March 27, 2020 at 3:32pm — 2 Comments

हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?

कोई भी भाषा हो , लेकिन

हिन्दी सी भला मिठास कहाँ ?

जो दिल से भाव निकलते हैं

वह कोमल सा अहसास कहाँ ?

है नर्तन मधुर तरंगों सा

अपना ' प्रणाम ' अन्यान्य कहाँ ?

जिससे झंकृत हृद - तार मृदुल

वह सुन्दरता , उल्लास कहाँ

जब बच्चा ' अम्मा , कहकर के

जा , माँ के गले लिपटता है

इस नैसर्गिक उद्बोधन में

अद्भुत आनन्द , हुलास कहाँ ?

कोई भी भाषा हो , लेकिन

हिन्दी सी भला मिठास कहाँ…

Continue

Added by Usha Awasthi on March 27, 2020 at 9:33am — 9 Comments

कोरोना का तांडव

पंख कटे पंछी हुए ,सीमित हुयी उड़ान

सर पे अम्बर था जहाँ, छत है गगन समान

सारी दुनिया सिमट कर कमरे में है कैद

घर के बाहर है पुलिस, खड़ी हुई मुश्तैद

जिनकी शादी ना हुयी , उनकी मानो खैर

और हुयी जिनकी न लें, घर वाली से बैर

घर के कामो में लगें, हर विपदा लें टाल

साँप छुछूंदर गति न हो, करफ्यू या भूचाल

भागवान से लड़ नहीं, बात ये मेरी मान

भागवान के केस में, चुप रहते भगवान

प्रथम दिवस आखिर कटा, साँसों में थे…

Continue

Added by Dr Ashutosh Mishra on March 26, 2020 at 7:54pm — 1 Comment

कोरोना पर जीत मंत्र

आप अपने आप को ,कर लो घर में बंद।
फिर खुशियां ही खुशियां है, मुश्किल के दिन चंद।।

सेनीटाइजर या साबुन से, धो लो अपने हाथ।
ज्यादा गर याद आए अपनों की, तो फोन पर कर लो बात।।

हम सबको मिलकर लड़नी है, कोरोना की लड़ाई।।
एक दूजे से दूरी ही ,इसकी है दवाई ।।

कानून तुम मान लो ,सुने कर दो रास्ते ।।
हेलो हाय छोड़ के, बस करो नमस्ते ।।

दाल रोटी से काम चला लो, छोड़ो तुम मेवा ।।
घर पर रहकर कर लो, देश की सेवा।।
द्वारा भूपेन्द्र सिंह राणावत

Added by Bhupender singh ranawat on March 26, 2020 at 7:48pm — 1 Comment

जी हाँ (ग़ज़ल)

हज़ज मुसम्मन महज़ूफ़

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन

1222 / 1222 / 1222 / 122

अभी भी है तुम्हें उस बेवफ़ा से प्यार? जी हाँ

निभाने को ये ग़म ता-उम्र हो तय्यार? जी हाँ [1]

उसे देखे बिना इक पल नहीं था चैन दिल को

उसे फिर देखना चाहोगे तुम इक बार? जी हाँ [2]

सिवा ज़िल्लत मिला कुछ भी नहीं कूचे से उसके

अभी भी क्या तुम्हें जाना है कू-ए-यार? जी हाँ [3]

पता तो है तुम्हें सर माँगती है ये मुहब्बत

तो क्या जाओगे हँसते हँसते…

Continue

Added by रवि भसीन 'शाहिद' on March 26, 2020 at 3:38pm — 5 Comments

सब निरोग सब हों सुखी

कोरोना का संक्रमण सारे देश , जहान

है दुस्साध्य परिस्थिति , मुश्किल में है जान

इस संकट की घड़ी में हमको रहना एक

दृढ़ संकल्पित हों खड़े , भुला सभी मतभेद

सर्व हिताय खड़े हुए डा0 नर्स तमाम

पुलिस महकमे के लिए है आराम हराम

नित सफाई कर्मी करें बिना शिकन के काम

इनके सेवा भाव को शत , शत मेरा प्रणाम

आई है , टल जाएगी , यह जो बड़ी विपत्ति

अनुशासित घर में रहें बिना किसी आपत्ति

सब निरोग , सब हों सुखी , करना यही…

Continue

Added by Usha Awasthi on March 25, 2020 at 5:32pm — 2 Comments

ज़रा  सोचें  अगर इंसान सब लोहा-बदन  होते(७५ )

(1222 1222 1222 1222 )

ज़रा  सोचें  अगर इंसान सब लोहा-बदन  होते

यक़ीनन फिर क़ज़ा आने पे पत्थर के क़फ़न होते

**

निज़ामत ग़ौर करती  गर ग़रीबों की तरक़्क़ी पर

वतन में अब तलक भी लोग क्या नंगे बदन होते ?

**

फ़िरंगी की अगर हम नक़्ल से परहेज़ कर लेते 

नई पीढ़ी के फ़रसूदा भला क्या पैरहन होते ?

**

जूँ  लुटती आज है लुटती इसी मानन्द  गर   क़ुदरत

तो क्या दरिया शजर बचते कहीं पर कोई बन होते ?

**

अगर इन्सां न  मज़हब और फिरकों में बँटा…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 25, 2020 at 5:00pm — 3 Comments

मानव तेरी करनी

विवेक पर जब मन हावी हो जाता है,

तभी तो ऐसा मंजर नजर आता है।

हे मानव, तू अड़ा रहा मनमानी पे,

किया निरंतर खिलवाड़ प्रकृति से।

हे अधम, प्रगति के मद में,

तूने प्रकृति का तिरस्कार किया।

बस, मैं ही मैं हूं ,तू इस खुश फहमी में जिया।

पर, मत भूल, प्रकृति जब विकराल रूप धर लेती है,

फिर वह सांसे भी हर लेती है।

अब भी समय है, हे मानव ,संभल जा,

अपनी हरकतों से बाज आ।



सुन, ए नादान ,गर जीना है सुकून से,

तो प्रकृति की शरण में जा।

वो मां है,… Continue

Added by Bhupender singh ranawat on March 25, 2020 at 2:11pm — 1 Comment

कोरोना का क्या रोना

जितना हो सकता हो दूरियां बनाइये

मुख से न कहके नयन से जताइये


घबराइये न दिल को दिलासा दिलाइये

विपदा की घड़ी में भी बस  मुस्कुराइये


जीभर  के बात अपनी सबको सुनाइये

बस थोड़ा और अपने मुँह को घुमाइये


घर जो आये हाथ  सोप से धुलाइये

पी के नींबू नींद भी गहरी लगाइये


बस प्राणायाम योग  ध्यान आजमाइये

प्रतिरोध…
Continue

Added by Dr Ashutosh Mishra on March 25, 2020 at 1:43am — 3 Comments

कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कोरोनामय जग हुआ, फीका पड़ा बसन्त

माँगे खुद की खैर अब, राजा, रंक, महन्त।१।

**

जन्मा चाहे चीन में, लाये अपने लोग

जिससे सारे देश में, फैल रहा यह रोग।२।

**

विकट घड़ी में आपदा, आयी सबके द्वार

घर के बाहर आ मगर, करो नहीं सत्कार।३।

**

घर में बैठो चन्द दिन, ढककर खिड़की द्वार

कोरोना पर  वार  को, यही सफल  हथियार।४।

**

आज चिकित्सक का कहा, थोड़ा मानव मान

घर  में  चुपके  बैठ  कर, होगा  रोग  निदान।५।

**

करो नमस्ते दूर से , नहीं मिलाओ…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 24, 2020 at 8:04pm — 2 Comments

प्रणय-परीक्षा

प्रणय-परीक्षा

सुना है कुछ ऐसा केवल

स्वप्न-लोक में 

या परियों की कहानी में होता है

सात समुद्र पार से आता है

घोड़े पर सवार

सात युगों का प्यार

पर हवा-सी झूमती

शैतानी-भरी हँसी हँसती

भरे आँखों में खुमारी की लालिमा

ऐसी गुड़िया से मिलना

मेरे जीवन के रंग-मंच पर

यह कोई सपना नहीं था

काट रही थी कब से मुझको

समय की तेज़ धार

मिला हवा की लहर-सा…

Continue

Added by vijay nikore on March 23, 2020 at 12:30pm — 2 Comments

Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"सादर नमस्कार। आदरणीया अर्चना त्रिपाठी जी ने बहुत ही बड़ी और महत्वपूर्ण बात अपनी टिप्पणी में कह ही दी…"
3 hours ago
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"अमानत ब्याह में आई बेटियों की बिदाई की रस्म में पिता का सहयोग कर रेवती मम्मी के पास पहुंची। बेटियों…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदाब। साहित्यिक पत्रिका वेबसाइट जगत की धरोहर ओबीओ लघुकथा गोष्ठी के इस मासिक अंक 60 में आपकी…"
3 hours ago
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आ. रवि भसीन शाहिद जी ,आपकी कथा आज दिन ब दिन बढ़ते विवाद को सुलझाने की सीढ़ी हो सकती है।हार्दिक बधाई…"
3 hours ago
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"बढ़िया कथा आ. बबिता गुप्ता जी, वाकई में कर्जे की धरोहर अत्यंत पीड़ादायी होती हैं।हार्दिक बधाई आपको"
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"धरोहर (लघुकथा) ताज महल की सैर कर रहे राहुल और प्रियंका ख़ूब मूड में थे। घूम-घूम कर थक गए तो एक जगह…"
5 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीया बबिता गुप्ता जी, बहुत ख़ूब! दिल को छू गई आप की लघुकथा।"
5 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"धरोहर 'विचारा लख्खाराम को मौत के मुंह में उसकी बीमारी से ज्यादा कर्ज के बोझ की चिंता ने ढकेल…"
6 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी अंक-६० में आप सभी का हार्दिक स्वागत है."
7 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
8 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान 'अमीर' साहिब, मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने नाचीज़ की सलाह पर ग़ौर किया।…"
8 hours ago
श्याम मोहन पाराशर(मोहन संप्रास) updated their profile
8 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service