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dandpani nahak
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SALIM RAZA REWA commented on dandpani nahak's blog post गज़ल
"भाई बधाई स्वविकरण मतला मज़ा नहीं दे ,"
4 hours ago
Samar kabeer commented on dandpani nahak's blog post गज़ल
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब,ग़ज़ल के साथ अरकान भी लिखा करें,इससे पाठकों को अपनी बात कहने में आसानी होती है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी समय चाहती है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
dandpani nahak posted a blog post

गज़ल

जरुरी नहीं वो भला होमगर जो जैसा है वैसा होयही गुण हो बस आदमी मेंमुसीबत में तो काम का होबहुत जानता है तो अच्छानहीं जानता क्यों बुरा होहमेशा ही सच्चाई जीतेहै कोई जो ना जानता होजो मारे है अंदर का रावणउसी का ही शुभ दशहरा होमौलिक एवम् अप्रकाशितSee More
Oct 8
dandpani nahak commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें! सभी शैर लाज़वाब वाह! क्या कहने! दिल से बधाई"
Oct 6
dandpani nahak left a comment for Naveen Mani Tripathi
"आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!"
Sep 29
dandpani nahak left a comment for डॉ छोटेलाल सिंह
"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
Sep 29
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय तनवीर जी आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें! खासकर 3 रा शैर बहुत अच्छा लगा बहुत बधाई"
Sep 28
dandpani nahak left a comment for Manan Kumar singh
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!"
Sep 28
dandpani nahak left a comment for लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ"
Sep 28
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय मो.अनीस शैख़ साहब आदाब ! बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें खासकर आखिरी शैर वाह! बहुत खूब! क्या कहने फिर से बहुत बधाई"
Sep 28
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय क़मर जौनपुरी साहब आदाब ! बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला बहुत खूबसूरत है और सभी शैर बहुत अच्छे कहे हैं बधाई"
Sep 28
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी प्रणाम ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ह्रदय से मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं!' बहुत छोटा मेरा मुद्दा बड़ा होने से पहले था' वाह! बहुत खूब बहुत बधाई"
Sep 28
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय नादिर ख़ान साहब आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें खासकर 'बहुत मजबूर मैं भी बेवफा होने से पहले था ' वाह ! बहुत खूब ! बहुत बधाई"
Sep 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय लक्षमण धामी ' मुसाफिर' जी आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें सभी शैर बहुत अच्छे हुए है बहुत बधाई"
Sep 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय नीलेश जी आदाब ! बहुत बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ह्रदय से मुबारक बाद मैं तो ग़ज़ल की तारीफ करके ही धन्य हो गया! शानदार मतला सभी शैर बेहतरीन वाह ! और 'कलेजा तो बड़ों जैसा बड़ा होने के पहले था' बहुत बढ़िया क्या कहूँ ! बहुत बहुत बधाई!"
Sep 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीया अंजलि गुप्ता 'सिफर' जी बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए ह्रदय से बधाई स्वीकार करें! शैर दर शैर बधाई ! खासकर मतला और दूसरा तथा चौथा शैर लाज़वाब ! वाह! क्या कहने ! एक बार फिर से बधाई!"
Sep 27

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Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

गज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
मगर जो जैसा है वैसा हो

यही गुण हो बस आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता है तो अच्छा
नहीं जानता क्यों बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही शुभ दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 8, 2019 at 3:07pm — 2 Comments

ग़ज़ल 2122 1212 22

मर भले जाना पर नहीं देना
तुम कभी आयकर नहीं देना

खुद से हम सब का बस ये वादा हो
मुल्क अब बेहतर नहीं देना

राह हम ने भली चुनी है ये
सब को एक सा अवसर नहीं देना

हैं सवा सौ करोड़ हम हर कर
दे सके हैं मगर नहीं देना

याद रखना कभी भी तुम 'नाहक'
मशवरा कारगर नहीं देना

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on September 2, 2019 at 1:42pm — 2 Comments

ग़ज़ल

किनारे हो चाहे कि मझधार पे हो
नज़र तो हमेशा ही पतवार पे हो

पड़ी हो अगर दिल के बीच में ये
इक सुराख़ भी जरूर दीवार पे हो

मैं भी तो नहीं चाहता था कभी यूँ
बहस ख़त्म हो भी तो तकरार पे हो

चलो तेज दोस्त चलो कोई बात न
लगाम भी मगर लाज़मी रफ़्तार पे हो

मैं कब चाहता हूँ भला ये फुलों की
कभी बारिश भी मेरे अश्आर पे हो

जुदा हैं अगर राह अपने तो 'नाहक'
क्यूँ एतराज़ उसके सरोकार पे हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on July 30, 2019 at 8:46pm — 3 Comments

तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो

1222 1222 1222

तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो
अगर ख्वाब हो तो फिर कैसे मुलाकात हो

क़यामत भले हो जाये उस के बाद अच्छा
किनारा झील का औ चांदनी रात हो

तभी तो मैं तुम्हारा हूँ कहूँ खुद को
मेरी आँखों से निकले तेरे ज़ज़्बात हो

फिरूँ हूँ मैं तलाश में तेरी ख्वाब मेरे
कभी तो रु ब रु कोई करामात हो

दुआओं में मांगू मैं यही हर पल
ख़ुशी हो पास तेरे और इफरात हो

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on July 16, 2019 at 10:00pm — 1 Comment

Comment Wall (5 comments)

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At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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