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dandpani nahak
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dandpani nahak commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"आदरणीय जनाब समर कबीर साहब ,आदाब बहुत बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ह्रदय से मुबारकबाद कुबूल फमाएं ! वाह क्या खूब कहा है " ग़मों के सभी ,असीर यहाँ किसी को नहीं किसी की खबर" बहुत अच्छा"
Jul 4
dandpani nahak left a comment for Ravi Shukla
"आदरणीय रवि शुक्ला जी आदाब , बहुत शुक्रिया मेरा हौसला बढ़ने के लिए"
Jun 29
dandpani nahak left a comment for Md. anis sheikh
"बहुत शुक्रिया आदरणीय अनिस शेख जी"
Jun 29
dandpani nahak left a comment for surender insan
"आदरणीय सुरेंदर इंसान जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए"
Jun 29
dandpani nahak left a comment for Amit Kumar "Amit"
"बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी"
Jun 29
dandpani nahak left a comment for Tasdiq Ahmed Khan
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया साहब हौसला अफ़जाई का"
Jun 29
dandpani nahak left a comment for munish tanha
"आदरणीय मुनीस तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया तहे दिल से मेरा हौसला बढ़ाने के लिए"
Jun 27
dandpani nahak left a comment for Manan Kumar singh
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है"
Jun 27
dandpani nahak left a comment for बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
"बहुत शुक्रिया आदरणीय हौसला बढ़ने का"
Jun 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें सभी शैर एक से बढ़ कर एक खास कर" मैं जिसे ढूंढ रहा था....." और "था निकलना किसी पर....." बहुत बेहतरीन"
Jun 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय रवि शुक्ला जी आदाब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ख़ास कर ' मैं जिसे अश्क़ समझाता था समन्दर निकला' वाह क्या कहने बहुत खूब!"
Jun 27
dandpani nahak left a comment for Ravi Shukla
"आदरणीय रवि शुक्ल जी आदाब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Jun 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल नमन जी प्रणाम, बहुत बढ़िया ग़ज़ल का प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! ख़ास कर आपका मक़्ता बहुत अच्छा लगा !"
Jun 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय अरुण कुमार निगम जी आदाब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल का प्रयास हार्दिक बधाई स्वीकार करें! खासकर एक मज़दूर था..... शैर बहुत अच्छा लगा"
Jun 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय राज़ नवादवी साहब आदाब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही हार्दिक बधाई स्वीकार करें!' हाथ खली लिए दुनिया से सिकंदर निकला' वाह! बहुत खूब !"
Jun 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही हार्दिक बधाई स्वीकार करें! काफिला लूट लिया..... वाह! बहुत अच्छा"
Jun 27

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Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 122 122 122

हमें क्यों किसी से गिला हो
जिसे भी जो चाहे मिला हो

लूटा सा पिटा सा दिखा था
न रहमत का ही काफिला हो

न जाने ये कब तक यूँ ही बस
जिंदगी तिरा सिलसिला हो

उसे क्या खबर हो जहाँ की
इश्क में किसी मुबतिला हो

कहें क्या अगर सुन के सच भी
गया जो वही तिलमिला हो

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on May 3, 2019 at 10:46am — 1 Comment

आओ एक सपना देखो

आओ एक सपना देखो

और उसपे विश्वास करो

कठिन डगर मिले अगर

गौरव का अहसास करो

आओ एक सपना देखो.....



देखो बाज़ जो होता है

फ़िक्र न करता मेघों की

और जंगल में हाथी भी

क्या चिंता करे है बाघों की

उड़ो सारा आकाश तुम्हारा

डैनों का विकास करो



आओ एक सपना देखो.....



लगातार लगे रहने से

पर्बत बी देता रास्ता है

कोई चीज़ असंभव है

कौन यहाँ ऐसा कहता है



नया इतिहास रच बसने को

रोज यूँ ही प्रयास करो



आओ एक… Continue

Posted on March 12, 2019 at 10:09am — 2 Comments

जब क़सम हिंदुस्तान की है

जब क़सम हिंदुस्तान की है
फिक्र फिर किसे जान की है

फ़लक है समूचा तिरंगा
यही बात तो शान की है

ज़माने हुए थी सचाई
तस्वीरें ही पहचान की है

मुद्दतों से तो हम न सुधरे
घडी आज इम्तहान की है

शिखर पर मुल्क हो हमारा
ये ख्वाहिश ही नादान की है

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on August 15, 2018 at 10:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल : 2122 2122 2122

एक दुजे के अब हबीब नहीं रहे हैं
लोकतंत्र औ हम करीब नहीं रहे हैं

फसल की वाज़िब मिले क़ीमत ऐसी तो
हम किसानों के नसीब नहीं रहें हैं

खत्म करके सब गरीबों को मुल्क से
घोषणा कर दो गरीब नहीं रहे हैं

हर ज़ुल्म हमने सहे हैं मगर फिर भी
यूँ कभी भी बेतर्तीब नहीं रहें हैं

मंदिर मस्जिद एक साथ न हो कभी भी
इस क़द्र तंग तहज़ीब नहीं रहे हैं


दण्डपाणि नाहक
मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 8:00pm — 5 Comments

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At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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