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amod shrivastav (bindouri)
  • Male
  • फतेहपुर,उत्तर-प्रदेश
  • India
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Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । आपको कई बार कह चुका हूँ कि बिना अध्यन के शाइरी करना ऐसा ही है जैसे बिना पतवार के समन्दर में नाव चलाना । 'ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी हो जाएगा' इस मिसरे में आपने…"
Jul 28
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय आसिफ़ भाई साहब कमाल है ..बहुत खूब   हार्दिक बधाई"
Jul 26
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)
"आदरणीय समर दादा जी प्रणाम , मार्गदर्शन के लिए हृदय से आभार"
Jul 25
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा

बहर :- 2122-2122-2122-212ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी हो जाएगा ।।शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा।।अब्र से शबभर गिरेंगी ओश की बूंदें मगर ।दिन ही चढ़ते ये समां इक मस्खरी हो जाएगा।।हाँ खुमार -ए-इश्क है बातें तो होगी रात दिन ।जब भी उतरेगा ये सर से मयकशी हो जाएगा।।उसके हक़ में है सियासत देखना तुम एक दिन।जाने वो बोलेगा क्या क्या औऱ बरी हो जायेगा।।दर्द-ओ-गम शुहरत मुहब्बत सब मिलेगा इश्क में ।इश्क कर के देख ले...खुद जौहरी हो जाएगा।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशितSee More
Jul 25
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,शिल्प,व्याकरण,और शब्दों को बरतना अभी आपको सीखना है,बहरहाल बधाई स्वीकार ।"
Jul 19
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)

बहर.2122-2122-2122-212एक दिन उसने मेरी खामोशियों को रख दिया ।।मेरे पेश-ए-आईने मे'री' हिचकियों को रख दिया ।।तोड़ बंदिश हिज्र -ए-दिल ख़ुल कर युँ रोया इक दफा।उसने दिल के सामने जब चिट्ठियों को रख दिया ।।खन्न की आवाज ले सिक्का छुआ कांसे को जब।भूख ने नजरें उठाई सिसकियों को रख दिया ।।जब कभी मेरा वजू अन्धा हुआ इस भीड़ में ।माँ ने अपनी आस के रौशन दियों को रख दिया ।।गर कभी मायूस हो मन देख कर छत घास की।छत में लाकर के पिता ने तितलियों को रख दिया ।।रूठ कर नींदों ने मुझको गर डराया है कभी।माँ ने सिरहाने में ला…See More
Jul 14
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

आदमीं हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ खुदा ...

2122-2122-2122-212मतला:-ख़ुश ही रहता हूँ शिकायत क्या करूँ क्या है अता।।आदमी हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ ख़ुदा।।हुश्न-ए-मतला:-तेरे ज़ानिब से मुझे जो भी मिला अच्छा लगा ।मैं तो मुफ़लिस था मेरी हिम्मत कहाँ कुछ माँगता।।मेरा दम घुटने लगा जब महफिलों की शान में ।यार आया हूँ उठा कर दूर खुद का मकबरा।।मेरी मैय्यत में गुलों की बारिशें अच्छी नहीं।शाइरी के भेष में करने लगा था इल्तिज़ा।।देख़ो उल्फ़त के सफर ने चैंन ही छीना है बस।तुम भुला पाओ न पाओ मैं भुलाना चाहता ।।जैसी चाहे जो भी चाहे लिख मेरी क़िस्मत को तू।आख़िरत…See More
Jun 1
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है,,,

बहर :- 22-22-22-22-22-2तुम हो शातिर तुमको ऐसा लगता है ।।मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है।। मैं करता तुमसे कैसे दिल की बातें।तुमको मेरा प्रेम ही' सौदा लगता है।।वो मंदिर में गिरजाघर में मस्जिद में।मुझमें तुझमें पहरा जिसका लगता है।।वो पत्थर ख़ुद को समझे क़िस्मत वाला।जिसको छैनी और हथौड़ा लगता है ।।आन पड़े जब मुश्किल घड़ियां जीवन में।एक रु'पइया एक हजारा लगता है ।।हिन्दू मुस्लिम भाई चारे में शामिल ।"चाँद बता तू कौन हमारा लगता है ।।"इनकी उनकी कहता है मेरी सुन अब।तू मेरी ग़जलों का तारा लगता है ।।मौलिक अप्रकाशितSee More
May 27
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

कुछ और नहीं बस सताया गया मुझे.....

1211-22-1221-212दरोज बुझाया जलाया गया मुझे।।कुछ और नहीं बस सताया गया मुझे।।यूँ पहली नजर की मुहब्बत ही नेक थी ।गलत है क़े रस्ता दिखाया गया मुझे।।मुँड़ेर से महताब जैसा दिखाई दूँ।वही एक रोगन चढ़ाया गया मुझे।।मुझे भी यही दौर आसान कह रहा ।वो दौर बता जो बताया गया मुझे।।गुलाब सी खुश्बू बिखेरुं कभी कहीं।कलम से कलम कर लगाया गया मुझे।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशितSee More
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद Tasdiq Ahmed Khan भाई जी रचना के किये हार्दिक बधाई मै भी अंजलि दी की इस्लाह से असहमत हु"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई जी स्नेहिल टिप्पणी के लिए आभार"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद समर दादा प्रणाम मार्गदर्शन के लिए शुक्रिया"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद अंजलि दी प्रणाम बढ़िया गजल हुई है बधाई"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद राजेश कुमारी माता जी प्रणाम माता जी रचना के लिए बधाई खूबसूरत गजल कही है" जिसका दिल बंजारा है़ वो क्या जाने घर बसने में एक जमाना लगता है़" "खाली घर की दीवारें छत कहती हैं घर बच्चों बिन गूँगा बहरा लगता है़" ये दोनों शेर तो मुझे…"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद Tasdiq Ahmed Khan भाई जी प्रणाम गजल के लिए हार्दिक बधाई , अच्छी रचना हुई है सर मुझे भी समझने में गलती हुई थी। . लेकिन काफिया सिर्फ आ स्वर है"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद अमित भाई जी प्रणाम कहते हैं जब फन होता है तो शब्द भी इठलाते खिलखिलाते है। बहुत खूबसूरत गजल भाई जी। . बधाई। . नमन"
May 24

Profile Information

Gender
Male
City State
फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) २१२६५७
Native Place
Bindour
Profession
writing & PVT -JOB
About me
मै--- बस-- साधारण इंसान हूँ -

मेरा परिचय

मै माध्यम वर्ग के कायस्थ परिवार से हूँ । निवास उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला में बिन्दकी तहसील के अंतर्गत बिन्दौर ग्राम में है।किसी विधा की कोई खास जानकारी नही है। बस लिखता हूँ । जो दिल और दिमाक में आयालेखन मेरा बस एक सौख है । या कहु मेरी मानसिक बीमारी जो कागज पर उतर जाती है।मै खुद नही जनता मै ये भाव कैसे लिखता हु।लेकिन लिखता हु। और बस लिखता हूँ ....आप मेरे कविता ,लेख ,अतुकांत,आदि मेरे ब्लॉग"अहसास के कुछ पन्ने"पर पढ़ सकते है।....सादर नमन ...

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शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा

बहर :- 2122-2122-2122-212

ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी हो जाएगा ।।

शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा।।

अब्र से शबभर गिरेंगी ओश की बूंदें मगर ।

दिन ही चढ़ते ये समां इक मस्खरी हो जाएगा।।

हाँ खुमार -ए-इश्क है बातें तो होगी रात दिन ।

जब भी उतरेगा ये सर से मयकशी हो जाएगा।।

उसके हक़ में है सियासत देखना तुम एक दिन।

जाने वो बोलेगा क्या क्या औऱ बरी हो जायेगा।।

दर्द-ओ-गम शुहरत मुहब्बत सब मिलेगा इश्क में ।

इश्क…

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Posted on July 25, 2019 at 3:10pm — 1 Comment

उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)

बहर.

2122-2122-2122-212

एक दिन उसने मेरी खामोशियों को रख दिया ।।

मेरे पेश-ए-आईने मे'री' हिचकियों को रख दिया ।।

तोड़ बंदिश हिज्र -ए-दिल ख़ुल कर युँ रोया इक दफा।

उसने दिल के सामने जब चिट्ठियों को रख दिया ।।

खन्न की आवाज ले सिक्का छुआ कांसे को जब।

भूख ने नजरें उठाई सिसकियों को रख दिया ।।

जब कभी मेरा वजू अन्धा हुआ इस भीड़ में ।

माँ ने अपनी आस के रौशन दियों को रख दिया ।।

गर कभी मायूस हो मन देख कर छत घास…

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Posted on July 14, 2019 at 6:37pm — 2 Comments

आदमीं हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ खुदा ...



2122-2122-2122-212

मतला:-

ख़ुश ही रहता हूँ शिकायत क्या करूँ क्या है अता।।

आदमी हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ ख़ुदा।।

हुश्न-ए-मतला:-

तेरे ज़ानिब से मुझे जो भी मिला अच्छा लगा ।

मैं तो मुफ़लिस था मेरी हिम्मत कहाँ कुछ माँगता।।

मेरा दम घुटने लगा जब महफिलों की शान में ।

यार आया हूँ उठा कर दूर खुद का मकबरा।।

मेरी मैय्यत में गुलों की बारिशें अच्छी नहीं।

शाइरी के भेष में करने लगा था इल्तिज़ा।।

देख़ो उल्फ़त के…

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Posted on May 31, 2019 at 12:20pm

मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है,,,

बहर :- 22-22-22-22-22-2



तुम हो शातिर तुमको ऐसा लगता है ।।

मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है।। 

मैं करता तुमसे कैसे दिल की बातें।

तुमको मेरा प्रेम ही' सौदा लगता है।।

वो मंदिर में गिरजाघर में मस्जिद में।

मुझमें तुझमें पहरा जिसका लगता है।।

वो पत्थर ख़ुद को समझे क़िस्मत वाला।

जिसको छैनी और हथौड़ा लगता है ।।

आन पड़े जब मुश्किल घड़ियां जीवन में।

एक रु'पइया एक हजारा लगता है ।।

हिन्दू मुस्लिम भाई…

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Posted on May 24, 2019 at 5:46pm

Comment Wall (9 comments)

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At 8:02am on September 13, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय श्रीवास्तव अमोद जी,  नए मित्र के रूप में आपका स्वागत है |

At 12:29pm on April 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय  श्रीवास्तव अमोद विन्दोरी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर आपको  बधाई। 

At 11:03pm on April 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

श्रीवास्तव आमोद विन्दोरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:19am on March 30, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आमोद जी , नये मित्र के  रूप में आपका स्वागत . शुभ कामनाएं . 

At 12:39pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 10:49pm on August 18, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
धन्यवादसर
At 11:48pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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At 5:43am on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें
At 2:05am on July 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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