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Sunil Verma
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Ravi Prabhakar commented on Sunil Verma's blog post भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"बढ़ीया प्रयास सुनील भाई । वीर भाई की टिप्‍पणी से पूर्णत सहमत । सादर"
Monday
Nita Kasar commented on Sunil Verma's blog post भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"बरसाती मेंढकों का भरोसा कभी नही करना चाहिये।चुनाव में सब्ज़बाग़ तो दिखायें जाते है। विवेक का इस्तेमाल ज़रूरी है बधाई संदेशप्रद कथा के लिये आद० सुनील वर्मा जी ।।"
Saturday
Dr. Vijai Shanker commented on Sunil Verma's blog post भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"अच्छी प्रस्तुति है। बात बड़ी है , सबसे अधिक धोका आदमी चुनावी वादों से ही खाता है। बधाई आदरणीय सुनील जी , सादर।"
Friday
Mahendra Kumar commented on Sunil Verma's blog post कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"पुरुषवादी सोच को इस लघुकथा में बहुत बढ़िया तरीके से उभरा है आपने आ. सुनील जी. शीर्षक से पूरी तरह न्याय हुआ है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 20
Samar kabeer commented on Sunil Verma's blog post भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"जनाब सुनील वर्मा साहिब आदाब,बहुत ख़ूब वाह, ऑटो चालक ने बहुत अच्छा सबक़ दिया,ये सबक़ हमें भी याद रखना चाहिये, मुझे तो ये लघुकथा बहुत पसंद आई,इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से ढेरों बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 19
VIRENDER VEER MEHTA commented on Sunil Verma's blog post भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"भाई सुनील वर्मा जी, रचना का विषय और भाव अच्छे है, अंत सहज ही एक चोट करने वाला बना है जिसके लिए हार्दिक बधाई प्रेषित है... हालांकि रचना में दिखाई गयी स्थिति थोडा असहज और बनावटी लगती है जिसके कारण रचना की मौलिक भावना भी थोड़ी असहज हो जाती है... सादर."
Jul 19
Sunil Verma posted a blog post

भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा

टूटी सड़क| भारी यातायात| साफ सुथरे कपड़े पहने हुए एक युवक बार बार अपने गले में बँधी टाई सही कर रहा था| तभी सामने ने ऑटो आता देख उसने हाथ देकर उसे रोका|ऑटो में बैठते ही युवक ने चालक को अपने गंतव्य स्थान के बारे में बताया और ज़ेब से फोन निकालकर किसी से बातें करनी शुरू कर दी| देश में बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी और धार्मिक अराजकता पर बातें करता हुआ वह सरकार को कोस ही रहा था कि ऑटो चालक ने अब तक लगभग दो सौ मीटर की दूरी तय करने के बाद आगे बने एक पेट्रोल पंप पर अपना ऑटो रोका|"साहब पेट्रोल डलवाना है, क्या…See More
Jul 19

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Sunil Verma's blog post ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा
"बहुत शानदार लघु कथा लिखी है आद० सुनील जी बहुत बहुत बधाई आपको ."
Jul 16
Samar kabeer commented on Sunil Verma's blog post कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"'ज़्यादा'ऐसे नहीं यूँ "ज़ियादा" ।"
Jul 16
Hari Prakash Dubey commented on Sunil Verma's blog post ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा
"सुन्दर प्रस्तुति सुनील जी, बधाई प्रेषित ! सादर "
Jul 16
Mohammed Arif commented on Sunil Verma's blog post कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"आदरणीय सुनील वर्मा जी आदाब, नसबंदी की पृष्ठभूमि पर लिखी सहज प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियों पर ध्यान दिलाना चाहूँगा जैसे-कमजोरी-कमज़ोरी, कंधो-कंधों, दिमाग-दिमाग़,ज्यादा-ज़्यादा, शारिरीक-शारीरिक,करवायेगें-करवायेंगे आदि । देखिएगा ।"
Jul 16
Hari Prakash Dubey commented on Sunil Verma's blog post कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"सुन्दर लघुकथा ,हार्दिक बधाई श्री Sunil Verma जी ! "
Jul 16
KALPANA BHATT commented on Sunil Verma's blog post ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा
"हमेशा की तरह एक बेहतरीन लघुकथा हुई है आदरणीय सुनील भैया | हार्दिक बधाई आपको| बहुत अच्छा लग रहा है आप को पढ़कर |"
Jul 16
Samar kabeer commented on Sunil Verma's blog post कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"जनाब सुनील वर्मा जी आदाब,हमेशा की तरह बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 16
KALPANA BHATT commented on Sunil Verma's blog post कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"एक मर्द की छोटी सोच वाह बेहतरीन कथा और बेहतरीन तंज़ हुआ है आदरणीय सुनील भैया | हार्दिक बधाई |"
Jul 16
Sunil Verma's blog post was featured

ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा

रविवार का दिन था| अखबार पढ़ने के बाद कमलेश जी बरामदे में बैठे रेडियो पर गानें सुन रहे थे| एकाएक उनके कानों में इकतारे की धुन के साथ साथ लोक संगीत के बोल घुल गये|आँखे खोलकर उन्होने आवाज की दिशा में देखा| दरवाजे पर खड़ा एक बूढ़ा याचक कुछ गाते हुए इकतारा बजा रहा था| वह दरवाजे तक गये और उसे वहीं बाहर बने चबूतरे पर बैठने के लिए कहा|"बहुत अच्छा गाते हो| कहाँ से हो?" उसके बैठते ही उन्होनें सवाल किया|"बहुत दूर से हैं बाबूजी| हमारे पुरखे अपने जमाने के बहुत बड़े लोक कलाकार थे| बस उनसे ही थोड़ा बहुत सीख…See More
Jul 15

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भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा

टूटी सड़क| भारी यातायात| साफ सुथरे कपड़े पहने हुए एक युवक बार बार अपने गले में बँधी टाई सही कर रहा था| तभी सामने ने ऑटो आता देख उसने हाथ देकर उसे रोका|

ऑटो में बैठते ही युवक ने चालक को अपने गंतव्य स्थान के बारे में बताया और ज़ेब से फोन निकालकर किसी से बातें करनी शुरू कर दी| देश में बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी और धार्मिक अराजकता पर बातें करता हुआ वह सरकार को कोस ही रहा था कि ऑटो चालक ने अब तक लगभग दो सौ मीटर की दूरी तय करने के बाद आगे बने एक पेट्रोल पंप पर अपना ऑटो रोका|

"साहब पेट्रोल… Continue

Posted on July 19, 2017 at 9:20am — 5 Comments

कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा

बेहद कमजोरी के बावजूद सुगणा ने कंधो के सहारे जोर लगाकर नीचे सरक आये अपने सिर को तकिये पर टिकाया| अधखुली आँखों से खुद को देखा| रक्तस्राव की अधिकता के कारण हर बार वह पहले से ज्यादा अशक्त होती जा रही थी| तीन बार की ज़चगी के बाद अब उसमें और हिम्मत नही बची थी| बात करने पर उसके पति ने उसकी बात मान भी ली थी, मगर शर्त थी की आवश्यक ऑपरेशन वह ही करवायेगी| आज उसी ऑपरेशन के बाद वह बिस्तर पर पड़ी थी| शरीर पहले से ही सुन्न था, अब दिमाग भी सुन्न हो चुका था|

गहरी फूँक छोड़ते हुए उसने…

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Posted on July 15, 2017 at 8:00am — 6 Comments

ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा

रविवार का दिन था| अखबार पढ़ने के बाद कमलेश जी बरामदे में बैठे रेडियो पर गानें सुन रहे थे| एकाएक उनके कानों में इकतारे की धुन के साथ साथ लोक संगीत के बोल घुल गये|

आँखे खोलकर उन्होने आवाज की दिशा में देखा| दरवाजे पर खड़ा एक बूढ़ा याचक कुछ गाते हुए इकतारा बजा रहा था| वह दरवाजे तक गये और उसे वहीं बाहर बने चबूतरे पर बैठने के लिए कहा|

"बहुत अच्छा गाते हो| कहाँ से हो?" उसके बैठते ही उन्होनें सवाल किया|

"बहुत दूर से…

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Posted on July 11, 2017 at 11:43am — 10 Comments

तज़ुर्बा (लघुकथा) -सुनील

दोपहर जरा ढ़ली तो छोटी बहू ने चाय बनाई | आँगन में बैठी अपनी सास और दो जेठानियों को उनके गिलास पकड़ाये और कुछ दूरी बनाते हुए खुद भी अपना गिलास लेकर वहीं फर्श पर बैठ गयी|

ठीक आँगन के बीच में पिड्डे पर बैठी अम्मा को एक टेर सामने वाले घर की तरफ देखकर उस संयुक्त परिवार की बड़ी बहू ने पूछा "उधर क्या देख रही हो अम्मा?"

"देख री हूँ के सामणे के घर म जो नये किरायेदार आये हैं, उणमें प्रेम तो ना है|" गिलास से अपनी कटोरी में चाय उंडेलती हुई अम्मा बोली|

"ल्यो बोलो, न कोई रामा श्यामा होई..अरर न… Continue

Posted on June 3, 2017 at 9:09pm — 1 Comment

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At 8:06pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुनील वर्मा जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "तृप्ति" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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