For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rupam kumar -'मीत'
  • Male
  • Bihar
  • India
Share

Rupam kumar -'मीत''s Friends

  • सालिक गणवीर
  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Chetan Prakash
  • Samar kabeer

Rupam kumar -'मीत''s Groups

 

Welcome, रुपम कुमार -'मीत'!

Latest Activity

सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"प्रिय रूपम आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है, और बेहतरी के लिए गुणीजनों की इस्लाह पर अमल करो.सस्नेह."
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"आ. भाई रुपम कुमार जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई स्वीकारे । आ. भाई रवि जी के मसविरे से गजल और बेहतर होगी । सादर..."
7 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"आदरणीय रवि साहब, सादर प्रणाम आपकी इस्लाह बहुत कमल की होती है, का का दोष समझ आया मुझे, पहला मिस्र वर्तमान काल में लिख कर दूसरा भूत काल में कर दिया यह सिर्फ एक जानने वाला ही कर सकता है,। इस शेर पर भी जरा रोशनी डालिये, सर् तुम किस जतन से रो रहे हो अब…"
18 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' भाई, ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा हुआ है। आपको कुछ सुझाव देना चाहता हूँ, अगर उचित लगें तो रखियेगा, और अगर पसंद न आएँ तो दरगुज़र कर दीजियेगा। पहले शे'र में "सदा" के स्थान पर "सदा के लिए" ज़ियादा…"
20 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)

बह्र-221/2121/1221/212वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गयाआँखों से प्यार का मेरे मौसम चला गया[1]वो किस जतन से रो रहा है अब अज़ाब मेंइक रोज़ रात को मेरे ख़्वाबों में आ गया[2]उसके नज़र के पास मैं, रहता था और वोहद्द-ए नज़र से मुझको हटाता चला गया[3]उसको ख़बर थी मौत मेरी तीरगी से हैजलते हुए चराग़ तभी तो बुझा गया[4]लगता है उसकी आंख में थोड़ा मलाल हैजब जा रहा था दूर मुझे देखता गया[5]रूपम कुमार 'मीत'"मौलिक व अप्रकाशित"See More
yesterday
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post किसे आवाज़ दूँ (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"बंद है हर दर यहाँ तो हर गली वीरान हैज़िन्दगी मुझको कहाँ लाई किसे आवाज़ दूँ आदरणीय रवि साहब, आपको बधाई देता हूँ पूरी ग़ज़ल के लिए, क्या खूब कहा है आपने और इस शेर पर ख़ास तौर पर दाद देता हूँ।।"
yesterday
Chetan Prakash left a comment for Rupam kumar -'मीत'
"मित्र, आपका स्वागत है !"
Jul 3
Chetan Prakash and Rupam kumar -'मीत' are now friends
Jul 3
Rupam kumar -'मीत' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा के देवता को बेवफ़ा हम कैसे होने दें(११३ )
"साहब, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, क़बूल कीजिए, हर शेर के लिए दाद और मुबारक बाद देता हूँ, वाह!! "
Jul 3
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"सर सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन क़ुबूल  किजीए। हम वो नहीं हुज़ूर जो डर जाए चोट सेहमने तो ओखली में रखा है जी सर अभी यह शेर हुआ आपका वाह!! क्या ही कहने वाह!!"
Jul 3
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, क्या ही  कहने वाह! बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है।"
Jul 3
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको

2122/1212/22 (112)रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमकोग़म-ज़दा ही रखे ख़ुदा तुमको[1]जान-ए-जाँ मौसम-ए-ख़िज़ाँ में भीहमने रक्खा हरा भरा तुमको[2]बे-तरह चीख़ कर लिखा हमनेअपनी ग़ज़लों में बे-वफ़ा तुमको[3]सुर्ख़ आँखें गवाही देती हैकल की शब भी थी रत-जगा तुमको[4]हिज्र ने हमको बे-क़रार कियामिल गया फ़ासलों से क्या तुमको[5]बीच दरिया में हाथ छोड़ दियाडूब जाऊँगा इल्म था तुमको[6]अपनी मंज़िल की जब ख़बर है मुझेक्यूँ भरोसा नहीं मेरा तुमको[7]बाद मुद्दत सुकून पाया थाफिर से क्यूँ याद कर लिया तुमको[8]हमको मसरूफ़ ही मिले हो तुमकॉल जब भी सनम…See More
Jun 29
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको
"आदरणीय Rupam kumar -'मीत' साहिब, उस्ताद-ए-मुहतरम के सुझाए हुए मिस्रे को ध्यान से पढ़िए, उसके कई पहलू निकल रहे हैं, और ये शे'र में बहुत बड़ी ख़ूबी होती है। /मुझे तो सभी बोलते हैं कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं…"
Jun 28
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको
""मुझे तो सभी बोलते हैं कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं है" इस शैर और उस शैर के भाव अलग हैं, विचार करें ."
Jun 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको
"आद0 रूपम कुमार मीत जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल के हवाले इतनी अच्छी चर्चा हुई। आदर0 समर साहब, आद0 रवि भसीन साहब का बहुत बहुत शुक्रिया। आपको बधाई"
Jun 28
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको
"उस्ताद समर कबीर साहब, आदाब पेश करता हूँ, आपने जो कहा इस से यह साबित होता है मैं बुरा हूँ, लेकिन एक मेरा शेर है, "मुझे तो सभी बोलते हैं कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं है" अब फिर से यह शेर नहीं कह सकता, मैं तो अपने महबूब को तंज करना…"
Jun 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Motihari
Native Place
Bihar
Profession
Student
About me
मुझे तो सभी बोलते है कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं है -'मीत'

Rupam kumar -'मीत''s Blog

वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)

बह्र-221/2121/1221/212

वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया

आँखों से प्यार का मेरे मौसम चला गया[1]

वो किस जतन से रो रहा है अब अज़ाब में

इक रोज़ रात को मेरे ख़्वाबों में आ गया[2]

उसके नज़र के पास मैं, रहता था और वो

हद्द-ए नज़र से मुझको हटाता चला गया[3]

उसको ख़बर थी मौत मेरी तीरगी से है

जलते हुए चराग़ तभी तो बुझा गया[4]

लगता है उसकी आंख में थोड़ा मलाल है

जब जा रहा था दूर मुझे देखता गया[5]

रूपम…

Continue

Posted on July 10, 2020 at 10:00am — 4 Comments

रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको

2122/1212/22 (112)

रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको

ग़म-ज़दा ही रखे ख़ुदा तुमको[1]

जान-ए-जाँ मौसम-ए-ख़िज़ाँ में भी

हमने रक्खा हरा भरा तुमको[2]

बे-तरह चीख़ कर लिखा हमने

अपनी ग़ज़लों में बे-वफ़ा तुमको[3]

सुर्ख़ आँखें गवाही देती है

कल की शब भी थी रत-जगा तुमको[4]

हिज्र ने हमको बे-क़रार किया

मिल गया फ़ासलों से क्या तुमको[5]

बीच दरिया में हाथ छोड़ दिया

डूब जाऊँगा इल्म था तुमको[6]

अपनी मंज़िल…

Continue

Posted on June 27, 2020 at 11:00am — 7 Comments

ग़म-ज़दा होंट मुस्कुराते हैं

2122 1212 22

.

ग़म-ज़दा होंट मुस्कुराते हैं

तेरा जब नाम गुनगुनाते हैं[1]

नींद वो दर है जिसके खुलने से

ख़्वाब आँखों में जगमगाते हैैं[2]

अब उदासी में है परिंदे क्यूँ?

लोग पेड़ों से घर बनाते हैं[3]

तेरे गालों पे बिखरी वो ख़ुशबू

अपने होंटों से हम चुराते हैं

अब तो होता है अपना यूँ मिलना

अब्र सावन में जैसे आते हैंं[5]

तेरी सूरत पे लिक्खा…

Continue

Posted on June 7, 2020 at 10:30am — 21 Comments

ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको

१२२२/१२२२/१२२ 

ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको

वफ़ा का नाम अब डसता है मुझको[१]



मुझे वो बा-वफ़ा लगता नहीं है

मगर वो बे-वफ़ा कहता है मुझको[२]



मेरे पीछे जो तूने गुल खिलाए

तेरे चेहरे पे सब दिखता है मुझको[३]



नहीं है ग़मज़दा वो फिर भी उसने

भरम में आज तक रक्खा है मुझको[४]

मोहब्बत को उड़ाकर ख़ाक़ में वो,

सितमगर, बे-झिझक कहता है मुझको[५]

कलेजा चाक करके ख़ूँ किया है,

भला किश्तों में क्यूँ…

Continue

Posted on June 1, 2020 at 5:00pm — 4 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:49pm on July 3, 2020, Chetan Prakash said…

मित्र, आपका स्वागत है !

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"  आपका अशेष धन्यवाद, मित्र, सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप !"
5 minutes ago
Chetan Prakash posted a blog post

रोटी.....( अतुकांत कविता)

रोटी का जुगाड़ कोरोना काल में आषाढ़ मास में कदचित बहुत कठिन रहा आसान जेठ में भी नहीं था. पर, प्रयास…See More
15 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी,  प्रदत्त विषय पर सुंदर सर्जन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
25 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय मनन कुमार जी, प्रदत्त विषय पर अति सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।"
29 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत विषय पर अति सुंदर दोहों के लिए बधाई स्वीकार करें।"
32 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"रोटी पर गज़ल खेल रोटी का निराला है बहुत संसार मेंरोटी सबको चाहिए इस भूख के बाजार में जो कभी झुकता…"
37 minutes ago
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post रोटी
"बहुत बहुत शुक्रिया जी,पहले मुझे पता नहीं था ,जैसे ही पता चला मैंने वहां पोस्ट कर दी,"
38 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आद0 चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादन। विषयानुकूल बढ़िया हाइकू और कुण्डलिया सृजित हुए हैं। बधाई स्वीकार…"
47 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको

था सब आँखों में मर्यादा का पानी याद है हमको पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको।भले खपरैल छप्पर…See More
48 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन। बढ़िया विषयानुकूल दोहे हुए हैं। बधाई स्वीकार कीजिये"
49 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"धन्यवाद सुरेन्द्र नाथ जी। कर लिया है गौर।"
52 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Neeta Tayal's blog post रोटी
"आद0 नीता त्यागी जी सादर अभिवादन। आपको यह रचना ओ बी ओ के आयोजन में पोस्ट करनी थी,, आपने यहाँ पोस्ट…"
52 minutes ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service